बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण में मतदाताओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया, ये उनके लोकत्रंत के प्रति सम्मान को दिखता है। पहले चरण की तरह ही इस बार भी मतदान रिकॉर्ड स्तर पर हुआ। चंपारण, मिथिला, मगध, शाहाबाद, कोसी और सीमांचल के कुल 20 जिलों की 122 विधानसभा सीटों पर भारी वोटिंग दर्ज की गई।

महिलाओं और युवाओं ने बढ़चढ़कर दी लोकत्रंत के पर्व में आहुति
सुबह से ही मतदान केंद्रों पर महिलाओं की लंबी कतारें दिखीं, जो शाम तक थमी नहीं। युवाओं ने भी बढ़-चढ़कर मतदान किया। मुस्लिम मतदाताओं की परंपरागत रूप से ऊंची भागीदारी इस बार भी बरकरार रही।
निर्णायक है दूसरा चरण
एक्सपर्ट के अनुसार, बिहार की कुर्शी का रास्ता इसी चरण से होक निकलेगा है। पिछली बार इन इलाकों में एनडीए को बढ़त मिली थी, जबकि इस बार महागठबंधन अपनी स्थिति मजबूत करने का दावा कर रहा है। दोनों ही गठबंधन अपने आधार वोटरों और युवाओं पर भरोसा जता रहे हैं।
प्रमुख क्षेत्र का विवरण
मगध क्षेत्र (28 सीटें)
गया, औरंगाबाद, नवादा, जहानाबाद और अरवल की 28 सीटें बिहार की सत्ता की चाबी मानी जाती हैं।
2020 में महागठबंधन ने यहां 20 सीटें जीती थीं, जबकि एनडीए को केवल 6 सीटें मिली थीं। इस बार एनडीए कड़ी मेहनत की यहां अपनी जगह बनाने के लिए ।
शाहाबाद क्षेत्र (22 सीटें)
रोहतास और कैमूर जिलों में दूसरे चरण में मतदान हुआ। पिछली बार एनडीए यहां से हताश होती हुई नजर आई थी। इस बार “ऑपरेशन शाहाबाद” के तहत भाजपा ने पुराने नेताओं की वापसी और जातीय संतुलन साधने की कोशिश की है।
अंग प्रदेश (23 सीटें)
भागलपुर, बांका और जमुई में दूसरे चरण में मतदान हुआ। महिलाओं की बड़ी भागीदारी से एनडीए को मिली उम्मीदें ।
2020 में एनडीए को यहां 13 और महागठबंधन को 3 सीटें मिली थीं। जातीय समीकरणों के साथ बाढ़-कटाव, सिल्क उद्योग और विकास के मुद्दे प्रमुख रहे। अमित शाह, योगी आदित्यनाथ और नीतीश कुमार की रैलियों ने माहौल गर्माया।
चंपारण क्षेत्र (21 सीटें)
नेपाल सीमा से सटा यह इलाका एनडीए का पारंपरिक गढ़ है। 2020 में 17 सीटें एनडीए ने जीती थीं।
इस बार भी एनडीए मजबूत दिखा, लेकिन कई सीटों पर महागठबंधन और जन सुराज पार्टी के चलते त्रिकोणीय मुकाबला बन गया। कुछ जगहों पर मतदान बहिष्कार और पैसे बांटने के वीडियो वायरल होने से हलचल मची।
सीमांचल क्षेत्र (24 सीटें)
पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज में रिकॉर्ड तोड़ मतदान हुआ। यहां 40% से अधिक मुस्लिम मतदाता हैं।
2020 में एनडीए ने 11, महागठबंधन ने 8 और एआईएमआईएम ने 5 सीटें जीती थीं। इस बार हिंदू मतदाताओं की बढ़ी भागीदारी एनडीए के लिए शुभ संकेत मानी जा रही है।
एनडीए “सुशासन और डबल इंजन सरकार” पर भरोसा जता रहा है, जबकि महागठबंधन इसे “सत्ता विरोधी लहर” बता रहा है।
मिथिला क्षेत्र (10 सीटें)
दूसरे चरण में मधुबनी जिले की सभी 10 सीटों पर रिकॉर्ड 63.01% मतदान हुआ।
यह क्षेत्र एनडीए का मजबूत गढ़ रहा है, पर इस बार महागठबंधन ने एमवाई (मुस्लिम-यादव) समीकरण के साथ कड़ा मुकाबला पेश किया है। कुछ सीटों पर जातीय वोटर निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
