मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में भगवान श्री महाकालेश्वर की तीसरी सवारी सोमवार को बड़े उत्साह निकाली गई। यह सवारी हर साल की तरह इस साल भो मार्गशीर्ष माह निकाली जाती है।
सुबह से ही मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में विशेष तैयारियाँ की गई थीं। सभामंडप में भगवान श्री चंद्रमौलीश्वर स्वरूप का विधिवत पूजन-अर्चन किया गया। मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित घनश्याम शर्मा ने मंत्रोच्चारण के साथ भगवान का अभिषेक और आराधना संपन्न की। इस अवसर पर महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष और उज्जैन कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, एसपी प्रदीप शर्मा और प्रशासक प्रथम कौशिक उपस्थित रहे।
रजत पालकी में विराजित हुए महाकाल :
पूजन-अर्चन के पश्चात भगवान श्री महाकालेश्वर रजत पालकी में विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकले। इस दौरान नगरवासियों और श्रद्धालुओं ने भगवान को नमन किया और आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर (सलामी) पेश किया। गार्ड ऑफ ऑनर में पुलिस बैंड, तोपची, कड़ाबीन दल, महाकाल मंदिर समिति का बैंड, घुड़सवार दल और भजन मंडली के सदस्य शामिल थे।
भगवान महाकाल की यह सवारी नगर के प्रमुख चौराहों और बाजारों से होकर गुजरी। चौराहा, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार और कहारवाड़ी होते हुए भगवान का रथ रामघाट पहुंचा। यहाँ मां शिप्रा के जल से अभिषेक किया गया और आरती संपन्न हुई। इस दौरान हजारों श्रद्धालु उपस्थित थे और उन्होंने अपने श्रद्धा भाव के साथ भगवान के दर्शन किए।

सवारी के दौरान मंदिर परिसर और नगर क्षेत्र में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पूरे कार्यक्रम के दौरान उपस्थित रहे और व्यवस्था बनाए रखी। भक्तों ने सोशल मीडिया पर भी अपने अनुभव साझा किए और भगवान महाकाल की भव्य सवारी की तस्वीरें व वीडियो अपलोड किए।
उज्जैन महाकाल मंदिर में निकाली गई यह तीसरी सवारी धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। मार्गशीर्ष माह में यह परंपरा भगवान के भक्तों के लिए विशेष श्रद्धा और आनंद का अवसर प्रदान करती है। मंदिर समिति द्वारा यह सुनिश्चित किया गया कि सवारी की सुरक्षा और भक्तों की सुविधा सर्वोपरि रहे।
माना जा रहा है कि इस प्रकार की सवारी से न केवल भक्तों का मनोबल बढ़ता है, बल्कि मंदिर और नगर के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव भी मजबूत होता है। महाकालेश्वर की यह सवारी भक्ति, परंपरा और नगरवासियों के लिए सामूहिक श्रद्धा का प्रतीक है।
इस अवसर पर नगर भ्रमण और अभिषेक के दौरान भगवान महाकालेश्वर ने भक्तों को आशीर्वाद प्रदान किया और उन्हें जीवन में सुख-शांति और समृद्धि की प्राप्ति की प्रेरणा दी।
