भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम: तिलकेश्वर तीर्थ में ध्वजा महोत्सव में उमड़े हज़ारों श्रद्धालु
इंदौर, 10 नवम्बर 2025:
इंदौर के तिलक नगर स्थित श्री तिलकेश्वर पार्श्वनाथ तीर्थ ने हाल ही में ध्वजा महोत्सव के भव्य आयोजन के जरिए भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। यह आयोजन केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए आत्मिक अनुभव और आध्यात्मिक आनंद का प्रतीक बन गया। जब हज़ारों हाथ श्रद्धा से उठते हैं और दादा की ध्वजा को मंदिर के शिखर पर लहराते हैं, तो पूरा वातावरण भक्ति के मधुर संगीत से गूंज उठता है।
यह दो दिवसीय महोत्सव श्री तिलकेश्वर पार्श्वनाथ तीर्थ धा.पा.सा. न्यास और श्रीसंघ श्री धर्मतिलक चातुर्मास समिति, तिलक नगर, इंदौर के तत्वावधान में श्रद्धापूर्वक संपन्न हुआ। इसमें हज़ारों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और दादा की आराधना का पुण्य लाभ प्राप्त किया।
आयोजन की प्रेरणा और प्रमुख उपस्थित व्यक्ति
ट्रस्ट के दिलीप शाह ने बताया कि इस आयोजन की प्रेरणा पू. पन्यास प्रवर श्री राजरत्नविजयजी म.सा. से प्राप्त हुई। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित थे परम पूज्य आचार्य भगवंत श्री नयचन्द्रसागरसूरीश्वरजी म.सा., पू. साध्वी श्री हेमप्रज्ञाश्रीजी म.सा., पू. साध्वी श्री अर्चनाश्रीजी म.सा., पू. साध्वी श्री रश्मिरेखाश्रीजी म.सा., और पू. साध्वी श्री चारित्रकलाश्रीजी म.सा.।
इसके अलावा समाजसेवी और उद्योगपति नवीन गोधा जी और समाजसेवी अरविन्द जैन भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। यह आयोजन भक्ति और समाजसेवा का अद्भुत उदाहरण था।
भक्तिमय संध्या से महोत्सव की शुरुआत
9 नवम्बर, रविवार को महोत्सव की शुरुआत भक्तिमय संध्या से हुई। इस अवसर पर सुप्रसिद्ध संगीतकार श्री चिरागजी श्रीश्रीमाल ने अपनी मधुर स्वर लहरियों से पूरे वातावरण को भक्ति की भावनाओं से सराबोर कर दिया। मंदिर दीपों और श्रद्धा से जगमगाता रहा, और प्रत्येक भक्त ने दादा के प्रति अपनी निष्ठा और प्रेम प्रकट किया।
ध्वजारोहण और सत्तरभेदी पूजन
10 नवम्बर, सोमवार को आयोजन का प्रमुख आकर्षण सत्तरभेदी पूजन और ध्वजारोहण समारोह था। सत्तरभेदी पूजन को विधिपूर्वक श्री दर्शनजी (उन्हेल वाले) ने संपन्न कराया। इसके बाद प्रातः 10 बजे ध्वजारोहण का शुभारंभ हुआ। जैसे ही दादा की ध्वजा मंदिर के शिखर पर लहराई, जयघोषों और भक्ति के स्वर वातावरण को मंत्रमुग्ध कर देने वाले बना दिया।
ध्वजा महोत्सव के दौरान स्वामीवात्सल्य का आयोजन भी किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रेम और एकता का प्रसाद साझा किया। यह आयोजन ना केवल धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक था, बल्कि समाज में भाईचारा और एकता को भी बढ़ावा देने वाला कार्यक्रम साबित हुआ।
सह लाभार्थी और आयोजन का महत्व
इस दो दिवसीय महोत्सव के सह लाभार्थी और स्वामीवात्सल्य के लाभार्थी स्व. सेठ श्री चिमनलालजी पिस्ताबाई कोठारी की स्मृति में राजेन्द्र-सुधा, चेतन-चहेती कोठारी, दिव्य वास्तु तत्व ग्रुप और समस्त कोठारी परिवार रहे।
श्री तिलकेश्वर पार्श्वनाथ तीर्थ धा.पा.सा. न्यास एवं श्रीसंघ श्री धर्मतिलक चातुर्मास समिति ने कहा, “ध्वजा महोत्सव सिर्फ एक परंपरा नहीं है। यह हमारे भीतर की श्रद्धा और एकता का प्रतीक है। जब यह ध्वजा लहराती है, तो हज़ारों श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति का दीप प्रज्वलित हो उठता है।”
श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया
दिव्य वास्तु तत्व के चेतन कोठारी जी ने कहा, “हमारे पूर्वजों की स्मृति में किया गया यह आयोजन केवल पूजा का अवसर नहीं है, बल्कि दादा के प्रति हमारी आस्था और संस्कारों का उत्सव है। यह भावना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी।”
इस अवसर पर सकल जैन संघ भी उपस्थित रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु दादा की आराधना में सहभागी बनकर उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए आए। आयोजन की भव्यता, सुंदरता और भक्तिभाव ने इंदौरवासियों को यह अनुभव कराया कि जब आस्था संगठित होती है, तो हर पर्व एक उत्सव में बदल जाता है।

