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बिहार चुनाव 2025: सीएम मोहन यादव का बड़ा बयान — कांग्रेस देश के दुश्मनों के सुर में सुर मिलाती है, एनडीए ही विकासकारी

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Published On: 9 November 2025
cm dr mohan yadav in Bihar Elections 2025

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बिहार चुनाव 2025: सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा – “देश के दुश्मनों के सुर में सुर मिलाती है भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस”

विधानसभा चुनाव-2025 के मद्देनजर, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूर्वी चम्पारण जिले की ढाका-चिरैया-नरकटिया-मोतिहारी विधानसभा क्षेत्रों में जोरदार चुनावी प्रचार किया। उन्होंने रोड शो एवं जनसभाओं में जनता से आग्रह किया कि वे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पक्ष में मतदान करें। साथ ही विपक्ष और कांग्रेस पर तीखे तेवर अपनाए।


प्रचार का दौर और प्रमुख विधानसभाएँ

डॉ. मोहन यादव ने ढाका विधानसभा क्षेत्र में रोड शो किया, तथा चिरैया, नरकटिया और मोतिहारी में जनसभाएँ आयोजित की। इसके साथ ही उन्होंने धार्मिक स्थलों जैसे पुनौरा धाम (सीतामढ़ी) का दर्शन भी किया, ताकि उनकी भावनात्मक-सांस्कृतिक अपील और मजबूत हो सके।


कांग्रेस-विरोधी आरोप और सांप्रदायिक बयान

उन्होंने कहा कि कांग्रेस-इंडी गठबंधन “देश के दुश्मनों के सुर में सुर मिलाता है” और देश में अशांति फैलाने, हिंदू-मुस्लिम दंगे कराने में सक्रिय रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि कांग्रेस और उसके साथी विगत वर्षों में राम-संबंधित मसलों पर विवाद खड़ा करते रहे।
उनका कहना था कि आज एनडीए जनकल्याण के भाव से काम कर रही है और वही जनता के सपनों को साकार कर सकती है।


संस्कृति-अपील: सीता-मायें से जुड़ी बात

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की संस्कृति माँ सीता माय्या से जुड़ी है। उनके अनुसार, सीता-माय्या के माध्यम से भगवान राम का बिहार की धरती पर आना और बिहार के माध्यम से राम­राज्य का उदय होना पुरुषार्थ-पराक्रम का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि “राम-कृष्ण की धरती” कहे जाने वाले भारत में राम की बातें करना अपराध नहीं, बल्कि गर्व की बात है।


कांग्रेस पर सीधे वार

उन्होंने विशेष रूप से राहुल गांधी का नाम लेते हुए कहा कि जब राम मंदिर के निर्माण का फैसला आया, तब राहुल गांधी और उनकी पार्टी उस मौके पर मौजूद नहीं थे। उनका कहना था कि “जो भगवान राम के पक्ष में नहीं था, वो किसी का नहीं था”।
उन्होंने भी कहा कि कांग्रेस “नादान” है, तथा उसका व्यवहार गलत दिशा में है।


विकास-अपील और संवेदनशील वर्गों के लिए वादे

मोहन यादव ने बिहार में किसानों की आय बढ़ाने, धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और माताओं-बहनों के लिए योजनाओं के माध्यम से कल्याण के लिए काम करने का दावा किया। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार ने किसानों को सम्मान निधि दी, सीमांत किसानों और जवानों का समान भाव रखा गया। उन्होंने कहा: “ऊर्जा, जल, घर, सड़क—सबको मिल रही है”।
यह भी कहा गया कि माताओं-बहनों को अब तक जो राशि मिली है, भविष्य में वो 10 हजार रुपये तक नहीं बल्कि 2 लाख रुपये तक जाएगी।


रणनीति-संदेश: मतदान की अपील

सीएम ने जनता से कहा कि उच्च मतदान यह संकेत है कि एनडीए आगे है। मतदान को घर बैठने न दें, अपना वोट जरूर करें। विशेष रूप से उन्होंने कहा कि वोटिंग मशीन को ‘श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र’ बताया गया — एक प्रतीकात्मक अपील कि मताधिकार का प्रयोग सुनिश्चित करें।
उन्होंने यह भी तंज कसा कि विपक्ष चुनाव को गंभीरता से नहीं ले रहा – उन्होंने उदाहरण दिया कि राहुल गांधी प्रचार छोड़कर मध्यप्रदेश में छुट्टियाँ मना रहे हैं।


सामाजिक-सांस्कृतिक समांतर

विधानसभा चुनाव के पूर्व, मोहन यादव ने बिहार-मध्यप्रदेश के पुराने संबंधों की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि बौद्ध-मौर्य काल से उज्जैन-बिहार के बीच जुड़ाव रहा है, और आज के समय में भी विकास-संयोग संभव है। उनकी दृष्टि में, बिहार सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि धार्मिक-सांस्कृतिक धुरी है, जिससे विकास-परिवर्तन की उम्मीद बंधती है।


चुनावी रणनीति और माहौल

2025 के 2025 बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर यह माहौल है कि एनडीए पुनः सरकार बनाना चाहती है। डॉ. मोहन यादव का कहना है कि बिहार में उच्च मतदान एनडीए के पक्ष में संकेत है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस-महागठबंधन उसकी हार स्वीकार कर चुका है।
उन्होंने कड़ी भाषा में कहा कि: “अगर इस राज्य में राम-कृष्ण की बात करना अपराध है, तो मैं सौ बार बोलूंगा। यह देश रामराज्य-समर्पित है।”


निष्कर्ष

डॉ. मोहन यादव की यह चुनावी भाषा विवादित भी रही और अपील-प्रधान भी। उन्होंने सांप्रदायिक और भावनात्मक धारा को जोड़ते हुए, विकास-मुद्दों तथा जन-कल्याण-वादों को एकसाथ रखा। बिहार के चुनावी परिदृश्य में यह भाषण यह संकेत देता है कि एनडीए अपने रणनीतिक रूप से धार्मिक-सांस्कृतिक और जन-भावनात्मक संदेशों को सक्रिय कर रही है।
विपक्ष पर लगे आरोप—हिंदू-मुस्लिम दंगे कराने, देश-द्रोहियों के सुर में सुर मिलाने के—ने बहस को और सघन बना दिया है। भावनात्मक-सांस्कृतिक अपीलों के साथ-साथ, योजनाओं और वादों को भी prominently रखा गया है।
अब यह देखना होगा कि मतदाता इस संदेश को किस रूप में ग्रहण करता है और 11 नवंबर के दूसरे चरण मतदान के बाद किस गठबंधन को लाभ मिलता है।

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