मुनि श्री विश्रांत सागर जी महाराज के पिच्छिका परिवर्तन महोत्सव में उमड़ा श्रद्धा का महासैलाब — “भक्ति ही मुक्ति का आधार”
चौरई (जिला छिंदवाड़ा) – रविवार का दिन जैन समाज के लिए अविस्मरणीय बन गया, जब बुंदेलखंड के प्रथमाचार्य, उपसर्ग विजेता राष्ट्रसंत गणाचार्य श्री 108 विराग सागर जी महाराज के परम शिष्य, प्रवचन केसरी श्रवण मुनि श्री 108 विश्रांत सागर जी महाराज ससंघ का पिच्छिका परिवर्तन महोत्सव अत्यंत भव्यता, श्रद्धा और भक्ति के साथ आयोजित हुआ।
प्रातः कालीन बेला में सूर्योदय से पहले ही भक्तजन ग्राम चौरई (छिंदवाड़ा) में एकत्र होने लगे थे। वातावरण में “जैन धर्म की जय”, “गुरुदेव विराग सागर अमर रहें” और “विश्रांत सागर महाराज की जय” के घोष गूंज रहे थे। पूरा नगर आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्तिभाव से सराबोर था।
भोर में हुआ मंगलाचरण और अभिषेक विधि
सुबह 6:00 बजे शुभ मुहूर्त में कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। भक्तों ने सामूहिक रूप से अभिषेक, शांति धारा और पूजन विधान किया। इसके पश्चात् दिव्य समवशरण का आयोजन हुआ, जिसमें मुनि श्री विश्रांत सागर जी महाराज गणधर रूप में विराजमान हुए।
समवशरण की पावन देशना में उन्होंने सभी उपस्थित भक्तों के मन में शांति, करुणा और आत्मकल्याण की भावना का संचार किया। बताया जाता है कि समवशरण में केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि देव, व्यंतर, तिर्यंच जाति के जीव भी धर्म श्रवण के लिए पधारे। मुनि श्री ने सभी की जिज्ञासाओं का समाधान कर धर्म का सार समझाया।
भव्य शोभायात्रा से गूंज उठा चौरई
देशना के उपरांत नगर में एक भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया गया, जिसने पूरे क्षेत्र का माहौल धार्मिक उल्लास से भर दिया।
शोभायात्रा में गाजे-बाजे, शहनाई, बग्घियों, पुष्प वर्षा, भगवा ध्वज और बैंड की मधुर ध्वनियों से वातावरण गुंजायमान था।
“गुरुदेव विराग सागर – विशुद्ध सागर – विश्रांत सागर जी महाराज की जय” के उद्घोषों से पूरा नगर थिरक उठा। श्रद्धालु नाचते, झूमते हुए भक्ति रस में डूब गए। महिलाएँ मंगल कलश लिए मार्ग पर पुष्प बरसाती चलीं, वहीं युवा श्रद्धालु जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे।
मुख्य स्थल पर हुआ पिच्छिका परिवर्तन समारोह
मुख्य कार्यक्रम स्थल पर दोपहर 2:30 बजे से पिच्छिका परिवर्तन महोत्सव का शुभारंभ हुआ।
पूरे आयोजन का संचालन युवा विधानाचार्य अंकित भैया धनेटा और गगनदीप जी फणीन्द बड़ागांव ने किया। कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में जैन श्रद्धालु, समाजजन, साधर्मिक और विभिन्न नगरों से आए गणमान्य उपस्थित थे।
मुनि श्री विश्रांत सागर जी महाराज ने अपने प्रेरक उपदेश में कहा —
“भक्ति ही मुक्ति का आधार है। जब मनुष्य का हृदय प्रभु भक्ति में लीन हो जाता है, तभी उसे आत्म शांति और मुक्ति का मार्ग प्राप्त होता है। हमें अपने जीवन में दया, करुणा और मैत्री को अपनाना चाहिए, यही सच्चा धर्म है।”
उन्होंने कहा कि जैसे समवशरण में सर्प और नेवला जैसे जन्मजात शत्रु भी एक साथ बैठकर प्रभु की वाणी सुनते हैं, उसी प्रकार मनुष्य को भी वैर-भाव मिटाकर एक-दूसरे के प्रति प्रेम और भाईचारे की भावना रखनी चाहिए।
“प्रत्येक जीव में आत्मा है, और प्रत्येक आत्मा मोक्ष का अधिकारी है। जब हम सबके कल्याण की भावना रखते हैं, तभी सच्चे अर्थों में हमारा भी कल्याण होता है।”
भक्ति, करुणा और समानता का संदेश
मुनि श्री ने कहा कि “दया ही धर्म का मूल है”।
हमें अपने जीवन में हर प्राणी के प्रति करुणा और सहानुभूति रखनी चाहिए। जैन धर्म केवल उपदेश नहीं, बल्कि जीवन जीने की सच्ची कला सिखाता है। उन्होंने बताया कि जब हम सब जीवों के साथ समानता का व्यवहार करते हैं, तब समाज में शांति, समरसता और सहयोग की भावना विकसित होती है।
शाम को भव्य महा आरती और सांस्कृतिक आयोजन
संध्या समय महा आरती का आयोजन हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्ज्वलित कर आरती की। पूरा पंडाल दीपमालाओं से जगमग हो उठा।
आरती के पश्चात मुनि श्री विश्रांत सागर जी महाराज ने भक्तों की धार्मिक शंकाओं का समाधान किया।
इसके बाद विधानाचार्य अंकित भैया धनेटा जी के प्रेरक प्रवचन हुए, जिन्होंने युवाओं से धर्म के प्रति सजग रहने, संयम और सेवा का भाव अपनाने की प्रेरणा दी।
रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए, जिनमें धार्मिक भजन, नृत्य, कवित्व और जैन धर्म के उपदेशों पर आधारित नाट्य प्रस्तुति ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
देशभर से पहुंचे श्रद्धालु
कार्यक्रम में केवल छिंदवाड़ा ही नहीं, बल्कि अनेक नगरों और राज्यों से श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा।
चौरई, नागपुर, सिंगोड़ी, अमरवाड़ा, परासिया, कुंडा, शिवनी, तेंदूखेड़ा, घुवारा, बड़ागांव, चिरगांव, बूंदी, सागर सहित अनेक क्षेत्रों से समाजबंधु पहुंचे।
इस भव्य आयोजन में प्रमुख रूप से एन कुमार, अनिल जी गंगवाल, शरद जी, पप्पू लाल जी, रिंकू जी, मोहित जी वात्सल, रितेश जी, अजय जी, भरत सेठ (घुवारा), राजेश जैन महामंत्री, संतोष जैन, कमल जैन, प्रसन्न जैन, चुन्नू जैन (बड़ागांव), प्रदीप जैन (छपरा), राकेश जी (भेलसी संगीतकार, इंदौर) सहित कई क्षेत्रीय गणमान्य उपस्थित रहे।
वातावरण में गूंजती रही धर्म की ध्वनि
पूरे दिन चौरई में “जय गुरुदेव”, “अहिंसा परमो धर्म”, “जैन धर्म अमर रहे” जैसे उद्घोष गूंजते रहे।
यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सामाजिक एकता और आत्म कल्याण का भी सशक्त संदेश लेकर आया।
भक्तों ने मुनि श्री विश्रांत सागर जी महाराज के सान्निध्य में गहन आत्मचिंतन किया और संकल्प लिया कि वे प्रभु महावीर के अहिंसा, सत्य, संयम और करुणा के मार्ग पर निरंतर अग्रसर रहेंगे।
जैन समाज की आस्था का अद्भुत संगम
पिच्छिका परिवर्तन महोत्सव जैन साधुओं के लिए एक अत्यंत पवित्र संस्कार होता है, जो त्याग, संयम और नई साधना यात्रा का प्रतीक है।
इस अवसर पर मुनि श्री ने नई पिच्छिका ग्रहण कर अपनी तपस्या को और अधिक दृढ़ करने का संकल्प लिया। यह क्षण उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति के लिए भावविभोर कर देने वाला था।



