सनातन एकता का अलख जगाती बाबा बागेश्वर धाम की ऐतिहासिक पदयात्रा, दिल्ली से वृंदावन तक 10 दिन चलेगी यह संदेश यात्रा
नई दिल्ली: सनातन धर्म की एकता और अखंडता का संदेश लेकर बाबा बागेश्वर धाम के युवा संत और धर्मगुरु, बाबा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की ऐतिहासिक सनातन हिंदू एकता पदयात्रा अपने दूसरे दिन शनिवार को फरीदाबाद पहुंची। यह 10 दिवसीय पदयात्रा 7 नवंबर को दिल्ली के छतरपुर मंदिर से शुरू हुई और 16 नवंबर को वृंदावन स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर में इसका भव्य समापन होगा। बाबा शास्त्री की यह यात्रा जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से हजारों श्रद्धालु और भक्त इस सनातन एकता के संदेश से जुड़ते जा रहे हैं, जिससे यह एक जन-आंदोलन का रूप लेती दिख रही है।
फरीदाबाद में उमड़ा भक्तिमय जनसैलाब
शनिवार, 8 नवंबर को बाबा बागेश्वर धाम पदयात्रा का दूसरा पड़ाव फरीदाबाद में रहा। यह यात्रा फरीदाबाद के बायोटेक कॉलेज से प्रारंभ हुई और शहर के विभिन्न मार्गों से होती हुई एनआईटी स्थित दशहरा मैदान में पहुंची। पूरे फरीदाबाद में भक्ति और उत्साह का अद्भुत वातावरण था। सुबह से ही सड़कों पर ‘जय श्री राम’ और ‘जय बागेश्वर धाम’ के जयघोष गूंजने लगे। हजारों की संख्या में श्रद्धालु हाथों में भगवा झंडे लिए, नारे लगाते हुए बाबा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के दर्शनों और आशीर्वाद पाने के लिए उत्सुक दिखे।
दशहरा मैदान में बाबा के रात्रि विश्राम और भव्य सत्संग कार्यक्रम की तैयारियां जोरों पर थीं। मंच को भव्य रूप से सजाया गया था और पूरे मैदान में भक्ति की सुगंध बिखरी हुई थी। देर शाम हुई भव्य सत्संग सभा में बाबा ने भक्तों को संबोधित किया, जहाँ हनुमान चालीसा का पाठ और भजन-कीर्तन के साथ-साथ हनुमान कथा का आयोजन भी किया गया। इस आयोजन ने पूरे वातावरण को पूर्णतः आध्यात्मिक और दिव्य बना दिया। स्थानीय समाजसेवी संस्थाओं ने पदयात्रा में शामिल सभी श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह जलपान और भंडारे की व्यवस्था की, जिससे इस जनसमूह की सेवा सुनिश्चित हो सके।
बाबा धीरेंद्र शास्त्री का उद्देश्य: एकजुट सनातन समाज का निर्माण
इस सनातन हिंदू एकता पदयात्रा की शुरुआत बाबा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने 7 नवंबर को दिल्ली के प्रसिद्ध छतरपुर मंदिर से की थी। इस यात्रा के मुख्य उद्देश्यों के बारे में बाबा ने स्पष्ट किया है कि उनका लक्ष्य समाज में फैले जातिवाद का अंत करना, सनातन धर्म की एकता को मजबूत करना और अंततः एक हिंदू राष्ट्र की स्थापना के लिए जन-जागरण करना है।
बाबा शास्त्री लगातार अपने प्रवचनों में इस बात पर जोर दे रहे हैं कि सनातन धर्म किसी एक जाति, वर्ग या समुदाय का नहीं है, बल्कि यह पूरी मानवता के कल्याण और मार्गदर्शन का मार्ग है। वे इस पदयात्रा के माध्यम से समाज के सभी वर्गों को एक मंच पर लाना चाहते हैं और आपसी भेदभाव को भुलाकर एक सूत्र में बांधना चाहते हैं। यात्रा के प्रत्येक पड़ाव पर आयोजित होने वाली सत्संग सभाएं और प्रवचन इसी एकता के संदेश को प्रसारित करने का मुख्य माध्यम हैं।
सनातन हिंदू एकता पदयात्रा 2025 का पूरा रूट मैप (7 नवंबर से 16 नवंबर)
यह 10 दिवसीय पदयात्रा दिल्ली से शुरू होकर हरियाणा के कई जिलों से गुजरते हुए वृंदावन में समाप्त होगी। यहाँ इसका विस्तृत कार्यक्रम दिया गया है:
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7 नवंबर: यात्रा का प्रारंभ दिल्ली के छतरपुर मंदिर से हुआ और पहला पड़ाव जीरखोद मंदिर, दिल्ली में रहा।
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8 नवंबर: फरीदाबाद के बायोटेक कॉलेज से शुरू होकर यात्रा दशहरा मैदान, एनआईटी फरीदाबाद पहुंची।
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9 नवंबर (आज): यात्रा बल्लभगढ़ मंडी से शुरू होकर सीकरी (डॉ. एच.एन. अग्रवाल धर्मशाला + ध्रुव गार्डन) पहुंचेगी।
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10 नवंबर: पृथला (बाघोला अडानी पेट्रोल पंप) से प्रारंभ होकर पलवल गर्वमेंट हाई स्कूल में समापन।
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11 नवंबर: पलवल शुगर मिल से यात्रा शुरू होगी और मीठा गांव (प्रधान जी की भूमि) पर रुकेगी।
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12 नवंबर: होडल मंडी से प्रारंभ होकर वनचारी (JBM) में विश्राम।
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13 नवंबर: कोट-1 बॉर्डर (सेल्स टैक्स) से यात्रा शुरू होकर कोसी मंडी में समापन।
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14 नवंबर: वेकमेट इंडिया कंपनी से गुप्ता टेंट एंड छाता बिलौठी तक का सफर।
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15 नवंबर: यादव हरियाणा ढाबा से जैत के राधा गोविंद मंदिर तक का अंतिम पड़ाव।
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16 नवंबर: यात्रा का भव्य समापन छठीकरा चार धाम से शुरू होकर वृंदावन स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर में होगा। यहाँ एक विशाल सत्संग समारोह का आयोजन किया जाएगा।
भक्ति और एकता का अद्भुत संगम
बाबा बागेश्वर धाम की यह पदयात्रा सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक सामाजिक-सांस्कृतिक जनजागरण का कार्यक्रम बनती जा रही है। इस यात्रा में शामिल हो रहे लाखों भक्त इस बात का प्रमाण हैं कि समाज में सनातन धर्म के प्रति गहरी आस्था है और लोग एकजुट होकर इसकी मूल भावना को बचाना और बढ़ाना चाहते हैं। बाबा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का यह प्रयास निश्चित रूप से एक हिंदू राष्ट्र की दिशा में एक सार्थक और ऐतिहासिक कदम साबित हो रहा है। वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर में होने वाला समापन समारोह इस यात्रा के सबसे भव्य और यादगार पलों में से एक होगा, जहाँ पूरे देश से श्रद्धालु एकत्रित होंगे।
