धर्म नगरी चौरई में गूंजे जयघोष — मुनि श्री विश्रांत सागर जी महाराज का पिच्छिका परिवर्तन आज
छिंदवाड़ा जिले के छोटे से ग्राम चौरई ने आज, 9 नवंबर 2025 को एक ऐतिहासिक पल का साक्षी बना। मुनि श्री 108 विश्रांत सागर जी महाराज ससंघ का भव्य पिच्छिका परिवर्तन समारोह बड़े हर्षोल्लास और धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ।
इस आयोजन में न केवल स्थानीय श्रद्धालु, बल्कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात सहित देशभर से हजारों भक्तों ने भाग लेकर धर्म लाभ प्राप्त किया।
सुबह से ही चौरई में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। नगर के प्रमुख मार्गों पर भक्तों की भीड़ और धार्मिक जयघोष से वातावरण आध्यात्मिक बन गया। नगर का हर कोना धर्म और भक्ति से ओतप्रोत दिखाई दिया।
भव्य शोभायात्रा ने खींचा भक्तों का ध्यान
दोपहर 11:30 बजे से शुरू हुई भव्य शोभायात्रा ने पूरे नगर का वातावरण दिव्यता से भर दिया। शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई मुख्य कार्यक्रम स्थल तक पहुंची, जहां 2:00 बजे से पिच्छिका परिवर्तन समारोह का शुभारंभ हुआ।
श्रद्धालुओं ने पुष्पवृष्टि कर मुनि श्री का स्वागत किया। नगर के मुख्य मार्गों पर तोरण द्वार, सजावट और धार्मिक ध्वजों से भव्य दृश्य निर्मित हुआ।
समवशरण विधान में उमड़ा जनसागर
6 नवंबर से 10 नवंबर तक चल रहे श्री समवशरण महामंडल विधान में भी भक्तों की अपार भीड़ उमड़ रही है।
छोटे से ग्राम चौरई में इन दिनों जैसे धर्म की गंगा बह रही है, हर घर से भक्ति के स्वर गूंज रहे हैं।
भक्त गण मुनि श्री की दिव्य देशना से आत्म कल्याण का मार्ग सुन रहे हैं।
प्रत्येक दिन सुबह 9:15 बजे से मुनि श्री की देशना सभा में सैकड़ों की संख्या में धर्मप्रेमी उपस्थित रहते हैं। जब मुनि श्री अपने प्रवचनों में गणधर के रूप में भगवान की वाणी को जीवंत करते हैं, तो सभा में उपस्थित सभी भक्त साक्षात भगवान के समवशरण का अनुभव करते हैं।
संघस्थ मुनि और ब्रह्मचारी संतों की विशेष भूमिका
संघस्थ मुनि श्री 108 सुयोग सागर जी महाराज और मुनि श्री 108 सुमित्र सागर जी महाराज द्वारा तत्वार्थ सूत्र सहित अन्य धर्मग्रंथों पर आधारित क्लासें निरंतर संचालित की जा रही हैं।
इनके प्रवचनों से धर्मप्रेमियों को गहन आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त हो रहा है।
वहीं, विधानाचार्य बाल ब्रह्मचारी अंकित भैया जी, गगनदीप जी (फणीन्द बड़ागांव), आकाश शास्त्री (चिरगांव) और पंडित रवि शास्त्री (झिलमिली) द्वारा विधि-विधान का संचालन अत्यंत कुशलता से किया जा रहा है।
ब्रह्मचारिणी राधा दीदी का प्रेरक योगदान
संघस्थ ब्रह्मचारिणी राधा दीदी ने इस चातुर्मास के दौरान अद्भुत योगदान दिया है।
उनकी मृदुभाषी और वात्सल्यपूर्ण प्रवृत्ति से प्रेरित होकर बड़ी संख्या में महिलाएँ, बच्चे और युवा वर्ग धर्म की ओर अग्रसर हुए हैं।
राधा दीदी के सान्निध्य में बच्चों ने भक्ति, पूजन और सेवा भाव के माध्यम से आत्मिक उन्नति प्राप्त की है।
भोजन एवं आवास की विशेष व्यवस्था
चौरई विश्रांत सागर चातुर्मास समिति ने देशभर से आने वाले भक्तों और अतिथियों के लिए उत्कृष्ट आवास एवं भोजन की व्यवस्था की है।
सभी व्रतधारी एवं श्रद्धालुओं के लिए शुद्ध सोला का भोजन उपलब्ध कराया गया है।
साथ ही स्थानीय स्वयंसेवकों द्वारा सेवा और स्वागत की भावना से सभी आगंतुकों का समुचित ध्यान रखा जा रहा है।
धर्ममय वातावरण में भावविभोर हुआ चौरई
छोटे से ग्राम चौरई का आज स्वरूप ही बदल गया है।
हर गली, हर मार्ग पर भक्ति गीतों की गूंज, ध्वज पताकाओं की लहर, और श्रद्धा से भरे भक्तों के चेहरे धर्म की अनुभूति करवा रहे हैं।
मुनि श्री की दिव्य देशना और संघ के अनुशासन से यह ग्राम एक सच्ची धर्मनगरी में परिवर्तित हो गया है।
स्थानीय निवासी भी गर्वपूर्वक इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बन रहे हैं।
समाज को एकजुट करने वाला आयोजन
चौरई का यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक एकता और अनुशासन का उदाहरण भी है।
गणाचार्य श्री 108 विराग सागर जी महाराज के शिष्य होने के नाते, मुनि श्री विश्रांत सागर जी महाराज ने सदैव समाज को संयम, अहिंसा और करुणा का संदेश दिया है।
उनके जीवन और साधना से प्रेरित होकर समाज के सभी वर्ग धर्ममार्ग पर अग्रसर हो रहे हैं।
आयोजन समिति की अपील
आयोजन समिति ने संपूर्ण भारत की जैन समाज से आग्रह किया है कि वे इस भव्य पिच्छिका परिवर्तन समारोह में अधिक से अधिक संख्या में सम्मिलित होकर धर्म लाभ प्राप्त करें।
छिंदवाड़ा, नागपुर, इंदौर, जयपुर, अहमदाबाद और मुंबई सहित देशभर से भक्तों के आगमन की संभावना जताई गई है।
संवाददाता की रिपोर्ट
(संवाददाता – जीवन लाल जैन, नागदा)
धर्म की इस अविरल धारा को देखकर कहा जा सकता है कि चौरई अब केवल एक ग्राम नहीं, बल्कि एक जीवंत धर्मपीठ बन चुका है, जहाँ से जैन संस्कृति और आध्यात्मिकता की गूंज पूरे देश में फैल रही है।

