श्रीभूवलय ग्रंथ विमोचन: भारतीय ज्ञान-परंपरा में नवदिव्य धरोहर
आज शनिवार को जयपुर में आयोजित एक भव्य समारोह में श्रीभूवलय ग्रंथ के पहले उपखंड का विमोचन किया गया। धर्म-समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने इस अवसर पर बताया कि यह ग्रंथ केवल जैन साहित्य नहीं है, बल्कि भारतीय ज्ञान-परंपरा की अद्वितीय धरोहर है।
विमोचन समारोह & अंतरराष्ट्रीय मान्यता
विमोचन समारोह में मुख्य वक्ता थे मुनि आदित्य सागर (परम पूज्य आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज के प्रमुख शिष्य) जिन्होंने सूचना दी कि यह ग्रंथ कर्नाटक के कुमुदेन्दु मुनि द्वारा रचित है तथा इसे मल्टीनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लंदन द्वारा अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त हुई है।
राजेश जैन दद्दू ने बताया कि ग्रंथ का यह पहला उपखंड आज श्रीनगरित किया गया है, और इसमें न सिर्फ जैन धर्म के आदर्श शामिल हैं, बल्कि मानवता, नैतिकता और जीवन-दर्शन पर गहरी शिक्षाएँ समाहित हैं।
ग्रंथ-विवरण: नौ खंडों में विशाल धरोहर
यह महान ग्रंथ कुल नौ खंडों में लिखा गया है तथा लगभग दो हज़ार चौंसठ पृष्ठों (≈ 2,064 पृष्ठ) का है। इसमें मानव-मानवता, नैतिक व्यवहार, जीवन का उद्देश्य, धर्म-संस्कृति आदि विषयों पर परिपूर्ण विवेचन किया गया है।
विमोचन-समारोह में यह भी बताया गया कि पहले उपखंड को नव भाषाओं में प्रकाशित किया जा रहा है — जैसे संस्कृत, प्राकृत, द्रविड़, मराठी, गुजराती आदि।
प्रधान सम्पादन-टीम एवं लेखिका
ग्रंथ के प्रधान सम्पादक के रूप में मुनि आदित्य सागर जी हैं, जिन्हें आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज का प्रमुख शिष्य बताया गया है। लेखिका के रूप में शामिल हैं डॉ. तेजस्विनी जैन, जिन्होंने इस ग्रंथ-परियोजना में बृहत भूमिका निभाई है।
डॉ. तेजस्विनी जैन ने बताया कि आज प्रकाशित होने वाला पहला उपखंड (नव-भाषा संस्करण) जैन साहित्य के लिए मील-पत्थर है।
समाज-प्रतिक्रिया एवं उपलब्धि का महत्व
समारोह में शामिल थे इंदौर के वरिष्ठ समाजसेवी जैसे डॉ. जैनेन्द्र जैन, हंसमुख गांधी, टीके वेद मंयक जैन, भुपेंद्र जैन आदि। उन्होंने इस उपलब्धि को “समाज के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि” बताते हुए ख़ुशी जाहिर की।
विशेष रूप से उन्होंने यह कहा कि ग्रंथ-विमोचन जैन समुदाय के भीतर ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण भारतीय दर्शन-परंपरा में एक प्रेरणादायी कदम है।
व्यापक परिणामी प्रभाव
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इस प्रकार के ग्रंथ का विमोचन और अंतरराष्ट्रीय मान्यता ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब पारंपरिक ज्ञान-स्रोतों का पुनर्मूल्यांकन हो रहा है।
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नौ भाषाओं में एक साथ प्रकाशन से ग्रंथ का पहुँच क्षेत्र बहुत विस्तृत होगा — भौगोलिक रूप से तथा भाषाई रूप से।
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ग्रंथ के प्रमुख विषय — मानवता, नैतिकता, जीवन-दर्शन — व्यापक जनसामान्य के लिए प्रासंगिक हैं।
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जैन धर्म-साहित्य के बाहर जाकर यह ग्रंथ भारतीय दर्शन-संस्कृति के अध्ययन-क्षेत्र को भी समृद्ध करेगा।
क्यों “श्रीभूवलय ग्रंथ विमोचन” की खबर है खोज-योग्य
चूंकि इस समाचार में शामिल हैं — ग्रंथ का नाम, विमोचन-समारोह, अंतरराष्ट्रीय मान्यता, प्रमुख सम्पादन-टीम एवं भाषाई विस्तार — इसलिए यह विविध कीवर्ड्स द्वारा खोज इंजन में आकर्षक रूप से स्थान पा सकता है। उदाहरण के लिए: „श्रीभूवलय विमोचन जयपुर“, „मुनि आदित्य सागर ग्रंथ“, „मल्टीनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स जैन साहित्य“, „जैन ग्रंथ नौ भाषाएँ“, आदि। ऐसा विषय-वस्तु जो दर्शाता है जैन धर्म के अतिरिक्त भारतीय ज्ञान-पारंपरिक गरिमा।
निष्कर्ष
आज जयपुर में हुए इस भव्य समारोह में श्रीभूवलय ग्रंथ के पहले उपखंड का विमोचन एक ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायी आयोजन था। इस आयोजन ने जैन धर्म-साहित्य को नई ऊँचाई दी है और भारतीय ज्ञान-परंपरा को समृद्ध किया है। प्रमुख संपादन-टीम, लेखिका, तथा भाषाई विस्तार ने इस ग्रंथ को व्यापक प्रभावशाली बनाया है। समाजसेवी और धर्म-समाज प्रचारक इस उपलब्धि को न सिर्फ जैन समुदाय के लिए बल्कि सम्पूर्ण संस्कृतिक धरोहर के लिए गौरव-पूर्ण बताते हैं।
