झकनावदा (मनीष कुमट):
झाबुआ जिले की हृदयस्थली और माही एवं मधुकन्या नदी के संगम तट पर स्थित अत्यंत प्राचीन धार्मिक स्थल श्री श्रृंगेश्वर महादेव धाम (केसरपुरा) में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में एक भव्य आयोजन किया गया।
यह आयोजन जिला कलेक्टर सुश्री नेहा मीणा के निर्देशानुसार संपन्न हुआ, जिसमें देशभक्ति, संस्कृति और शिक्षा का सुंदर संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम का शुभारंभ महादेव, पंचमुखी हनुमानजी और माही माताजी के दर्शन एवं वंदन से हुआ। इस अवसर पर ग्राम पंचायत भेरूपाड़ा के सरपंच वरदीचंद वसुनिया, बीईओ देवेंद्र ओझा, बीआरसी श्रीमती रेखा गिरी, जन शिक्षक सुरेंद्र सिंगाड़, नारायणदास बैरागी, श्रीकांत यादव, दिनेश राठौड़ सहित कई गणमान्य नागरिक एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
आयोजन में स्कूली छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सामूहिक रूप से राष्ट्रगीत वंदे मातरम् का गायन किया, जिससे वातावरण देशभक्ति से सराबोर हो उठा। धाम परिसर “वंदे मातरम् जय भारत माता” के जयघोष से गूंज उठा। कार्यक्रम के दौरान बच्चों को राष्ट्रगीत के इतिहास, महत्व और मातृभूमि के प्रति समर्पण के भाव से अवगत कराया गया।
औचक निरीक्षण से बढ़ा प्रशासनिक संदेश
आयोजन के पश्चात शासकीय वन कन्या आश्रम झकनावदा में बीईओ देवेंद्र ओझा और बीआरसी श्रीमती रेखा गिरी द्वारा औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान आश्रम की साफ-सफाई, अनुशासन और व्यवस्थाओं को देखकर अधिकारियों ने संतोष जताया और अधीक्षिका श्रीमती कलावती मकवाना की प्रशंसा की।
उन्होंने कक्षा में अध्ययनरत छात्राओं से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की, उनके भोजन, पढ़ाई और आवासीय सुविधा के बारे में जानकारी ली। अधिकारियों ने आश्रम की व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।
इसी दौरान बोलासा संकुल की विभिन्न स्कूलों का आकस्मिक निरीक्षण भी किया गया, जहां प्रभारी प्राचार्य को नियमित निरीक्षण कर विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता और अनुशासन में निरंतर सुधार लाने के निर्देश दिए गए।
श्रंगेश्वर धाम: श्रद्धा और संस्कृति का संगम स्थल
श्रंगेश्वर महादेव धाम झाबुआ जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। यह स्थल माही और मधुकन्या नदियों के संगम तट पर बसा है, जो धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां प्रतिवर्ष अनेक धार्मिक और सामाजिक आयोजन होते हैं जो ग्रामीण क्षेत्र में राष्ट्रप्रेम और संस्कृति की जड़ों को सशक्त करते हैं।

