रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने अधिकारियों को परमाणु हथियारों के परीक्षण के लिए प्रस्ताव तैयार करने का आदेश दिया है। यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पिछले हफ्ते अचानक परमाणु परीक्षण शुरू करने की घोषणा के बाद उठाया गया। रूस ने 1991 में सोवियत संघ के पतन के बाद से कोई परमाणु परीक्षण नहीं किया है। पुतिन ने कहा कि विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियां इस मामले पर जानकारी इकट्ठा करें और सुरक्षा परिषद में इसका विश्लेषण करके परीक्षण की संभावित तैयारियों का प्रस्ताव पेश करें।
रूस ने तेज कार्रवाई की दी चेतावनी :
रूसी सशस्त्र बलों के प्रमुख ने कहा कि रूस को इस मामले में शीघ्र कार्रवाई करनी चाहिए। पुतिन के आदेश से स्पष्ट संकेत मिलता है कि दुनिया के दो सबसे बड़े परमाणु हथियार वाले देश अमेरिका और रूस एक ऐसे कदम के करीब हैं जो वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव को बढ़ा सकता है। हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप का इशारा भूमिगत विस्फोटक परीक्षण की ओर था या अन्य किसी परीक्षण की दिशा में। पुतिन का कदम दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव और नए शीत युद्ध जैसे हालात को दर्शाता है।
अमेरिका ने भी किया मिसाइल परीक्षण :
कुछ ही दिनों बाद अमेरिका ने भी कदम उठाया। कैलिफोर्निया के वेंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से अमेरिकी ग्लोबल स्ट्राइक कमांड ने अनआर्म्ड मिनटमैन III अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल ICBM का सफल परीक्षण किया। पुतिन के आदेश और अमेरिका के परीक्षण से स्पष्ट है कि दोनों देश एक-दूसरे को कड़ा संदेश दे रहे हैं, जिससे वैश्विक सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। दुनिया भर के देश इस घटनाक्रम पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं।
ये तनाव विश्व के लिए है चिंता का विषय :

रूस और अमेरिका के बीच चला रहा तनाव केवल उन देशों के लिए ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। दोनों ही देशों के परमाणु हथियारों और सैन्य शक्ति के कारण किसी भी छोटी सी गलती या गलतफहमी भी वैश्विक स्तर पर गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है। ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें इन दोनों महाशक्तियों पर टिकी हुई हैं।
