🌸 अखिल भारतीय श्री राजेंद्र जैन नवयुवक परिषद का 67वां स्थापना दिवस बडनगर में धूमधाम से मनाया गया 🌸
झंडावंदन, प्रेरक प्रवचन और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का हुआ सम्मान
बडनगर (मध्यप्रदेश)।
धर्म, समाजसेवा और युवा जागृति के संगम का प्रतीक अखिल भारतीय श्री राजेंद्र जैन नवयुवक परिषद का 67वां स्थापना दिवस बडनगर शाखा द्वारा बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। परिषद की स्थापना परम पूज्य आचार्य श्रीमद् विजय यतीन्द्रसूरीश्वरजी महाराज साहब द्वारा कार्तिक पूर्णिमा के पावन दिन की गई थी। उन्होंने इस संगठन को अपने प्रिय शिष्य आचार्य जयंतसेनसूरीश्वरजी महाराज साहब को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी थी।
इस ऐतिहासिक दिवस के अवसर पर बडनगर शाखा में आयोजित समारोह की शुरुआत झंडावंदन से हुई। झंडावंदन का पुण्य कार्य परिषद शाखा अध्यक्ष पवन मेहता द्वारा संपन्न किया गया। कार्यक्रम के शुभारंभ में दीप प्रज्वलन श्रीसंघ के प्रतिष्ठित सदस्यों — मांगीलाल जी औरा, राजेंद्र दगवाड़ा, राजेंद्र बरडिया, नरेंद्र चोपड़ा एवं शांतिलाल गोखरू की उपस्थिति में किया गया।
आचार्य भगवंत श्रीमद् विजय दिव्यानंदसूरीश्वरजी महाराज साहब का प्रेरक संदेश
कार्यक्रम की मुख्य आकर्षण रही पूज्य आचार्य भगवंत श्रीमद् विजय दिव्यानंदसूरीश्वरजी महाराज साहब की पावन निश्रा। उन्होंने अपने दिव्य प्रवचन में कहा —
“हमें धर्म गति से ही सत् गति प्राप्त होती है। सम्यक दर्शन के बिना चरित्र नहीं मिलता और सम्यक चरित्र के बिना मुक्ति नहीं मिलती। गुरु के माध्यम से ही आत्मिक मार्ग की प्राप्ति होती है, इसलिए हमें गुरु चरण और गुरु आचरण दोनों को अपने जीवन में उतारना चाहिए।”
उनके साथ राजविजयजी महाराज साहब सहित अनेक साधु भगवंतों की गरिमामयी उपस्थिति ने समारोह को आध्यात्मिक ऊँचाई प्रदान की।
प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को किया गया सम्मानित
समारोह में समाज के होनहार और मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहन एवं पुरस्कार दिए गए।
स्वर्गीय श्री भेरूलाल जी शांताबाई राठौर की स्मृति में निलेश राठौर द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में —
-
मोक्षा शैलेंद्र सियाल को कक्षा 10वीं में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने पर सम्मानित किया गया।
-
दक्ष हितेश मेहता को कक्षा 12वीं में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने पर पुरस्कृत किया गया।
यह पुरस्कार समारोह परिषद के शिक्षा उत्थान और युवा प्रोत्साहन के संकल्प का प्रमाण रहा।
परिषद कार्यों पर विस्तृत प्रकाश
स्थानीय परिषद कार्यों पर शांतिलाल गोखरू, राजेंद्र दगवाड़ा तथा प्रांतीय परिषद की ओर से राजकुमार नाहर ने विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि परिषद ने समाज में युवाओं को सेवा, संस्कार और नेतृत्व की दिशा दी है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में भी परिषद समाज के आर्थिक, धार्मिक और शैक्षणिक उत्थान के लिए अनेक योजनाएँ प्रारंभ करेगी।
कार्यक्रम का कुशल संचालन राकेश गोलेचा ने किया।
सर्वश्रेष्ठ कार्यकर्ता सम्मान
कार्यक्रम के दौरान स्वर्गीय श्री मानमल जी गोलचा की स्मृति में सर्वश्रेष्ठ कार्यकर्ता पुरस्कार की घोषणा की गई। यह सम्मान मनीष सियाल को उनके उत्कृष्ट समाजसेवी योगदान के लिए निर्मल जी गोलचा एवं श्रीसंघ के सदस्यों द्वारा प्रदान किया गया।
सम्मान के इस पल में उपस्थित सभी सदस्यों ने मनीष सियाल के प्रति हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ व्यक्त कीं।
धर्मसभा एवं चातुर्मास परिवर्तन
स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित धर्मसभा को राजकुमार पारख, साकेत गामा एवं विजय मेहता ने संबोधित किया।
सभा में चारथूई श्रीसंघ को चातुर्मास परिवर्तन का लाभ मिला, जिसकी समाजजनों ने मुक्त कंठ से अनुमोदना की।
धर्मसभा के दौरान उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि परिषद की स्थापना केवल संगठन नहीं बल्कि संस्कार निर्माण का एक मिशन है। इस मंच के माध्यम से हर पीढ़ी में धर्म, अनुशासन और समाजसेवा की भावना विकसित की जा रही है।
स्वामी वात्सल्य एवं सम्मान समारोह
समारोह में आयोजित स्वामी वात्सल्य का लाभ भरत मेहता परिवार द्वारा लिया गया। परिषद की ओर से उनके परिवार का बहुमान एवं सम्मान किया गया। इस अवसर पर सभी उपस्थित समाजबंधुओं ने परिषद परिवार की एकजुटता और सेवा भावना की सराहना की।
कार्यक्रम का प्रभावी संचालन अजीत वोहरा द्वारा किया गया, जबकि राजकुमार नाहर (परिषद मीडिया प्रभारी) ने समस्त आयोजन की जानकारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से साझा की।
मुख्य आकर्षण व उद्देश्य
इस आयोजन का उद्देश्य समाज में संगठन, सद्भावना और युवा प्रेरणा को बढ़ावा देना था।
स्थानीय शाखा ने यह संदेश दिया कि –
“धर्म, संस्कृति और समाजसेवा एक-दूसरे के पूरक हैं। जब युवा पीढ़ी इन मूल्यों से जुड़ती है, तब समाज का भविष्य उज्जवल होता है।”
स्थापना दिवस समारोह न केवल परिषद के गौरवशाली इतिहास की याद दिलाता है, बल्कि नई पीढ़ी को भी अपने कर्तव्य और संस्कारों के प्रति जागरूक करता है।


