अखिल भारतीय श्री राजेन्द्र जैन नवयुवक परिषद का 67वां स्थापना दिवस मेघनगर में धूमधाम से मनाया गया
दादा गुरुदेव की प्रेरणा से गूंजा परिषद् गीत, ध्वजारोहण कर लिया समाजसेवा का संकल्प
मेघनगर (रजत कावड़िया)।
विश्व पूज्य दादा गुरुदेव श्रीमद् विजय राजेन्द्र सूरीश्वरजी महाराज के शिष्य, व्याख्यान वाचस्पति श्रीमद् विजय यतीन्द्र सूरीश्वरजी महाराज साहब द्वारा स्थापित अखिल भारतीय श्री राजेन्द्र जैन नवयुवक परिषद् का 67वां स्थापना दिवस मेघनगर में श्रद्धा, उल्लास और सेवा भावना के साथ मनाया गया। कार्तिक सुदी पूर्णिमा के शुभ दिन स्थानीय श्री राजेन्द्र सूरी जैन ज्ञान मंदिर प्रांगण में परिषद् की स्थानीय इकाइयों — पुरुष, महिला, युवक एवं युवती परिषद — के संयुक्त तत्वावधान में ध्वजारोहण एवं परिषद् गीत के उद्घोष के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
समारोह का आरंभ मंगलाचरण व परिषद् गीत “सेवा, संघटन और संस्कार” के सामूहिक गान से हुआ, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा और गौरव से भर दिया। तत्पश्चात् परिषद् ध्वज का विधिवत आरोहण किया गया। इस अवसर पर उपस्थित सभी सदस्यों ने परिषद् के मूल उद्देश्यों — धर्म, संगठन, सेवा और राष्ट्रप्रेम — पर खरा उतरने का सामूहिक संकल्प लिया।
कार्यक्रम में परिषद् प्रवक्ता दिविक कावड़िया ने जानकारी देते हुए बताया कि इस ऐतिहासिक अवसर पर परिषद् अध्यक्ष देवेंद्र जैन, महामंत्री राहुल लोढ़ा, महिला परिषद् अध्यक्ष स्नेहलता कावड़िया, तथा उपाध्यक्ष साधना लूनिया द्वारा संयुक्त रूप से ध्वजारोहण किया गया। ध्वजवंदन के साथ ही परिषद् गीत की स्वर लहरियों से पूरा प्रांगण गूंज उठा।
उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय श्री राजेन्द्र जैन नवयुवक परिषद् की स्थापना दादा गुरुदेव की प्रेरणा से 1958 में की गई थी, जिसका उद्देश्य युवाओं में नैतिकता, संस्कार, एकता और धर्मसेवा की भावना विकसित करना था। परिषद् के 67 वर्षों का यह गौरवशाली सफर समाजसेवा, शिक्षा, संस्कार और संगठन के कार्यों से ओतप्रोत रहा है।
इस अवसर पर प्रवक्ता कावड़िया ने आगे बताया कि “हमारा ध्वज केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि यह हमारी संघटित शक्ति, अनुशासन और आत्मत्याग की भावना का प्रतीक है। जब भी परिषद् का ध्वज लहराता है, तो वह यह संदेश देता है कि हम समाज, धर्म और राष्ट्र के उत्थान के लिए समर्पित हैं।”
ध्वजारोहण समारोह के दौरान चारों परिषद इकाइयों — नवयुवक परिषद, महिला परिषद, युवक परिषद और युवती परिषद — के सभी सदस्य बड़े उत्साह के साथ उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में परिषद् गीत गाया और ‘जय राजेन्द्र! जय परिषद्!’ के उद्घोष से वातावरण गुंजायमान कर दिया।
इस अवसर पर श्रीसंघ के वरिष्ठ पदाधिकारीगण, प्रतिष्ठित समाजजन, युवाओं और श्रावक-श्राविकाओं ने भी उपस्थिति दर्ज कर परिषद् के आदर्शों को नमन किया। सभी ने परिषद् के 67 वर्षों की समाजसेवी यात्रा को याद करते हुए भविष्य में और अधिक सशक्त योगदान का संकल्प लिया।
परिषद् अध्यक्ष देवेंद्र जैन ने अपने संबोधन में कहा कि “दादा गुरुदेव ने जिस उद्देश्य से इस संगठन की नींव रखी थी, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक है। समाज के युवाओं को धर्म, शिक्षा और सेवा के मार्ग पर अग्रसर रखना परिषद् का मूल ध्येय है। हमें गर्व है कि हमारी परिषद् ने हमेशा समाज में संस्कार और एकता की अलख जगाई है।”
महिला परिषद् अध्यक्ष स्नेहलता कावड़िया ने कहा कि “महिलाओं की भागीदारी परिषद् की सफलता का प्रमुख कारण है। हमने सदैव सेवा, सादगी और समर्पण के साथ कार्य किया है। समाज में संस्कारों का बीजारोपण तभी संभव है जब महिला शक्ति सक्रिय रूप से धर्मकार्य में जुड़ी रहे।”
महामंत्री राहुल लोढ़ा ने परिषद् के विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि “परिषद् का उद्देश्य केवल आयोजन नहीं, बल्कि युवाओं में कर्तव्यनिष्ठा और आत्मविकास की भावना को मजबूत करना है। आने वाले वर्षों में हम शिक्षा, पर्यावरण और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में भी नये प्रकल्प प्रारंभ करने जा रहे हैं।”
उपाध्यक्ष साधना लूनिया ने कहा कि “यह परिषद् एक परिवार की तरह है, जहाँ हर सदस्य को सेवा का अवसर मिलता है। हमें इस गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसे हम पूर्ण समर्पण से निभाएंगे।”
समारोह के अंत में उपस्थित सभी सदस्यों ने दादा गुरुदेव श्रीमद् विजय राजेन्द्र सूरीश्वरजी महाराज के चरणों में वंदना की और यह प्रार्थना की कि उनकी प्रेरणा सदैव परिषद् परिवार को नई दिशा और ऊर्जा प्रदान करती रहे।
कार्यक्रम का समापन “परिषद् जयघोष” और मंगल पाठ के साथ हुआ। श्रद्धा, एकता और अनुशासन से ओतप्रोत यह आयोजन न केवल स्थापना दिवस का स्मरण बना, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बन गया।
मुख्य बिंदु:
- श्री राजेन्द्र सूरी जैन ज्ञान मंदिर परिसर में मनाया गया स्थापना दिवस
- परिषद् अध्यक्ष, महामंत्री, महिला अध्यक्ष व उपाध्यक्ष ने किया ध्वजारोहण
- परिषद् गीत के साथ गूंजा प्रांगण, लिया सेवा और संगठन का संकल्प
- 67 वर्षों की गौरवगाथा को किया स्मरण, नए सामाजिक उपक्रमों की रूपरेखा तैयार
