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सिद्धाचल महातीर्थ देववंदन एवं कार्तिक पूर्णिमा आयोजन से गूंजा श्री राजेन्द्र सूरी जैन ज्ञान मंदिर मेघनगर | जैन समाज आराधना

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Published On: 5 November 2025
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सिद्धाचल महातीर्थ की भावपूर्ण वंदना से गूंजा श्री राजेन्द्र सूरी जैन ज्ञान मंदिर परिसर – कार्तिक पूर्णिमा पर श्रद्धा, भक्ति और आराधना का अनूठा संगम

मेघनगर।
कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्री राजेन्द्र सूरी जैन ज्ञान मंदिर, मेघनगर का वातावरण भक्ति और आध्यात्मिकता से ओतप्रोत हो गया। मूर्तिपूजक त्रिस्तुतिक श्रीसंघ द्वारा इस शुभ दिन पर श्री सिद्धाचल महातीर्थ देववंदन एवं सिद्धाचल रास का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता कर भगवान की आराधना की।

कार्यक्रम का शुभारंभ भक्तिमय माहौल में मंगलाचरण से हुआ। इसके पश्चात सभी श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से सिद्धाचल महातीर्थ की वंदना की और देववंदन क्रिया के माध्यम से अपने जीवन में आत्मशुद्धि और सिद्धपद की प्राप्ति की भावना व्यक्त की।

समाज के अध्यक्ष देवेंद्र जैन ने इस अवसर पर जानकारी देते हुए कहा कि कार्तिक पूर्णिमा जैन धर्म में अत्यंत पवित्र और प्रेरणादायक तिथि मानी जाती है। इस दिन करोड़ों मुनि भगवंतों ने तप, त्याग और साधना के बल पर सिद्धगति को प्राप्त किया था। इसी श्रद्धा के प्रतीक रूप में हर वर्ष समाज द्वारा सिद्धाचल वंदना का आयोजन किया जाता है।

देववंदन के पश्चात भगवान की आरती का लाभ श्रीमती स्नेहलता मनोहलालजी कावड़िया परिवार ने लिया। वहीं मंगलदीपक का लाभ शांतिलालजी राकेशजी लोढ़ा परिवार ने प्राप्त किया। भाते की प्रभावना का लाभ दिलीपकुमारजी सागरमलजी कोठारी परिवार को प्राप्त हुआ।

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पूरे आयोजन में भक्ति, अनुशासन और समर्पण का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। श्रद्धालुजनों ने सिद्धाचल महातीर्थ की स्मृति में भजन, स्तवन और सामूहिक रास के माध्यम से सिद्ध भगवान के चरणों में भावांजलि अर्पित की। समाज के युवा वर्ग ने भी आयोजन में सक्रिय रूप से भाग लेकर धर्मपरंपरा के प्रति अपनी निष्ठा दर्शाई।

अध्यक्ष देवेंद्र जैन ने कहा कि ऐसे आयोजनों का मुख्य उद्देश्य समाज में जिनशासन की महिमा और सिद्धपद की आराधना के महत्व को जन-जन तक पहुँचाना है। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से कहा कि सिद्धाचार्यों के जीवन से प्रेरणा लेकर आत्मकल्याण और समाज सेवा के पथ पर अग्रसर रहना ही सच्ची आराधना है।

अंत में सामूहिक आरती और जय जय सिद्धाचल महातीर्थ के घोष से मंदिर परिसर गूंज उठा। सभी श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को कार्तिक पूर्णिमा की शुभकामनाएँ देते हुए भगवान से विश्व में शांति, सद्भावना और सुख-समृद्धि की प्रार्थना की।

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