सरकार और संत के बीच हार्दिक हुंडिया की अनमोल भूमिका — संत निलेशचंद्र मुनि का अनशन 15 दिन के लिए स्थगित
मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा और विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने दिया आश्वासन – मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से होगी चर्चा
मुंबई, 4 नवंबर 2025।
मुंबई के आजाद मैदान में चल रहे “कबूतर बचाओ आंदोलन” को लेकर राष्ट्रसंत निलेशचंद्रजी मुनि के नेतृत्व में हुए अनशन को सरकार और समाज के साझा प्रयासों से 15 दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया है। इस बीच मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा और विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने आजाद मैदान पहुंचकर मुनिश्री से मुलाकात की और जैन श्रेष्ठी हार्दिक हुंडिया की मध्यस्थता में यह आश्वासन दिया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर आंदोलन की मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।
कबूतर बचाओ आंदोलन की पृष्ठभूमि
महावीर मिशन ट्रस्ट के तत्वावधान में राष्ट्रसंत मुनि निलेशचंद्रजी महाराज ने पुराने कबूतरखानों को पुनः खोलने और पक्षियों के संरक्षण की मांग को लेकर आजाद मैदान में अनशन प्रारंभ किया था।
मुनिश्री का कहना है कि मुंबई में ऐतिहासिक रूप से स्थापित कबूतरखाने न केवल धार्मिक भावनाओं का प्रतीक हैं, बल्कि शहर की पहचान और जैव विविधता का हिस्सा भी हैं।
पिछले कुछ वर्षों में महानगरपालिका द्वारा कई कबूतरखाने बंद कर दिए गए, जिससे हजारों पक्षियों की मृत्यु हुई। इस पर मुनिश्री ने कहा —
“हमारा उद्देश्य सरकार और जनता के अंतःकरण को जागृत करना है, ताकि अबोल जीवों की रक्षा हो सके।”
संत निलेशचंद्र मुनि की प्रमुख माँगें
मुनिश्री ने अपनी माँगों में कई महत्वपूर्ण बिंदु उठाए हैं जो न केवल कबूतरों बल्कि सभी पक्षियों और पशुओं के संरक्षण से जुड़े हैं। इनमें प्रमुख हैं:
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मुंबई में वैज्ञानिक रूप से नियोजित पक्षी-आहार क्षेत्र (Bird Feeding Zones) बनाए जाएँ।
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इन क्षेत्रों को “कबूतरखाना” या “बर्ड सेंचुरी” घोषित कर उनकी स्वच्छता की जिम्मेदारी महानगरपालिका को दी जाए।
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शहरभर में स्वच्छ जलपात्र और पक्षियों के भोजन स्थल नियमित दूरी पर लगाए जाएँ।
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पक्षी एवं पशु प्रेमियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
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भ्रामक बोर्डों को हटाया जाए जिनमें यह लिखा है कि “कबूतरों से बीमारियाँ फैलती हैं” — जब तक यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध न हो।
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पक्षियों को खिलाने पर रोक से संबंधित किसी भी सरकारी नीति को सार्वजनिक किया जाए।
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घायल या निर्जलित पक्षियों के लिए त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
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गौमाता और अन्य पशुओं की रक्षा के लिए सख्त कानूनी कदम उठाए जाएँ।
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पशु-क्रूरता विरोधी कानूनों को सशक्त बनाते हुए इन्हें गैर-जमानती अपराध घोषित किया जाए।
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धार्मिक स्थलों को “धरोहर स्थल” घोषित कर उनकी सुरक्षा और रख-रखाव का जिम्मा सरकार ले।
हार्दिक हुंडिया की मध्यस्थ भूमिका
जैन श्रेष्ठी हार्दिक हुंडिया ने आंदोलन में निर्णायक भूमिका निभाई। वे सरकार और संत समाज के बीच संवाद का माध्यम बने। उन्होंने कहा —
“संत निलेशचंद्रजी मुनि का आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और धर्मनिरपेक्ष भाव से चल रहा है। कबूतर मुंबई की सुंदरता का हिस्सा हैं। सौ साल पुराने कबूतरखानों को बंद करना परंपरा और प्रकृति दोनों के खिलाफ है।”
हार्दिक हुंडिया ने यह भी कहा कि उन्होंने खुद बॉम्बे हाई कोर्ट में Public Interest Litigation (PIL) दाखिल की है, ताकि पक्षियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
उन्होंने कहा —
“सरकार को अबोल जीवों की रक्षा के लिए तुरंत ठोस कदम उठाने चाहिए। हमारा पूरा समर्थन निलेश मुनि जी के साथ है।”
सरकारी प्रतिनिधियों का रुख
आंदोलन के दौरान मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा और विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर आजाद मैदान पहुँचे और आंदोलन स्थल पर उपस्थित जनसमुदाय को आश्वस्त किया कि सभी मांगों को मुख्यमंत्री तक पहुंचाया जाएगा।
राहुल नार्वेकर ने कहा —
“मैं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जी से स्वयं चर्चा करूंगा। कबूतर बचाओ और पशु संरक्षण के इस आंदोलन पर 15 दिनों में सकारात्मक परिणाम लाने का प्रयास किया जाएगा।”
उन्होंने आगे कहा कि वे प्राणी और पक्षियों की जीवहानी को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं करते, और महाराष्ट्र सरकार इस दिशा में ठोस नीति बनाने की ओर अग्रसर है।
मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने मुनिश्री से भेंट कर कहा —
“हम इस आंदोलन की भावनाओं को समझते हैं। सरकार ऐसे समाधान की दिशा में कार्य करेगी जिससे न पक्षियों को तकलीफ हो और न ही जनता को असुविधा।”
अनशन स्थगन और आंदोलन की सफलता
सरकार की ओर से मिले सकारात्मक आश्वासन और समाज के सहयोग से संत निलेशचंद्रजी मुनि ने अपना अनशन 15 दिनों के लिए स्थगित कर दिया।
मुनिश्री ने कहा —
“हम सरकार पर भरोसा रखते हैं कि वह पक्षी और पशु संरक्षण के मुद्दे पर न्यायसंगत और संवेदनशील निर्णय लेगी।”
इस निर्णय से उपस्थित समाजजनों ने संतोष व्यक्त किया और कहा कि धैर्य, संवाद और सत्याग्रह की शक्ति ने इस आंदोलन को नया मोड़ दिया है।
समर्थन और उपस्थिति
इस अवसर पर कई गणमान्य व्यक्ति एवं संगठन उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख हैं:
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संत श्री सुरेशजी महाराज (उज्जैनी बाबा)
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पूर्व मंत्री राज. के. पुरोहित
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पूरण दोशी, हार्दिक हुंडिया, चन्द्रकुमार जाजोदिया
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रमेश एम. जैन (सेवा फाउंडेशन)
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सुरेश सी.ए. (शांतिनाथ जैन मंदिर, महामंत्री)
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सुरेश बासा (आदेश्वर ट्रस्ट), दिनेश जैन (भीनमाल)
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कान्तिलाल शाह (नाकोडा ट्रस्टी), सुरेश पटवारी
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देवेन्द्र जैन, अंकेश जैन, श्रेणिक जैन, नितिन राठौड़, ललित एम. शाह, अशोक सी. जैन, स्नेहा विशारिया
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महावीर मिशन ट्रस्ट, सकल जैन संघ, राजस्थानी 36 कोम समिति
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तखतगढ़ युवा मंच, मरूधर समाचार, राजमणि फाउंडेशन, अरिहंत ग्रुप
इन सभी संस्थाओं और समाजसेवियों ने आंदोलन को “जीवदया और पर्यावरण संरक्षण का मिशन” बताया।
पूर्व मंत्री राज. के. पुरोहित का बयान
पूर्व मंत्री राज. के. पुरोहित ने कहा —
“महाराज जी ने बहुत शांतिपूर्वक अपनी बात रखी है। कबूतरों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। कबूतर हमारी संस्कृति और करुणा के प्रतीक हैं, उन्हें न्याय मिलना चाहिए।”
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि धार्मिक और पारंपरिक कबूतरखानों को संरक्षित किया जाए और शहर में पक्षियों के लिए सुरक्षित वातावरण बनाया जाए।
संविधान और करुणा का संदेश
संत निलेशचंद्रजी मुनि ने अपने वक्तव्य में संविधान के अनुच्छेद 21, 48A और 51A(g) का उल्लेख किया, जिनमें सभी जीवों के जीवन और पर्यावरण संरक्षण के अधिकार की बात कही गई है।
उन्होंने कहा —
“हर जीव को जीने का अधिकार है। कबूतरों और पक्षियों की रक्षा करना हमारा मानव धर्म है।”
निष्कर्ष — करुणा, संवाद और समाधान की दिशा में कदम
“कबूतर बचाओ आंदोलन” ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि समाज की संवेदनशीलता और संतों की तपस्या मिलकर बड़े बदलाव ला सकती है।
सरकार ने 15 दिनों के भीतर ठोस निर्णय का आश्वासन दिया है और जैन समाज ने भी संयमपूर्वक प्रतीक्षा का निर्णय लिया है।
हार्दिक हुंडिया ने कहा —
“हमारी संस्कृति करुणा पर आधारित है। मुंबई की पहचान उसके जीवों से भी है — चाहे इंसान हो या पक्षी। हम सभी को मिलकर इस परंपरा को जीवित रखना है।”


