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इंदौर नगर निगम पोर्टल विवाद: राज्य सरकार ने डेटा देने से किया इनकार, ई-नगर पालिका सिस्टम से बाहर होना अब मुश्किल

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Published On: 4 November 2025
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 इंदौर नगर निगम की डेटा स्वतंत्रता पर रोके शासन, नया पोर्टल विकास ठप?

इंदौर में नगर निगम ने अपना पोर्टल बनाया, लेकिन राज्य सरकार ने डेटा उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया; अब भविष्य अनिश्चित


इंदौर। शहर की प्रशासनिक प्रक्रिया सुचारू बनाने की दिशा में कदम उठाने वाले इंदौर नगर निगम को बड़ी निराशा का सामना करना पड़ रहा है। निगम ने स्वयं का डिजिटल पोर्टल — जिसमें सम्पत्तिकर, जलकर तथा अन्य करों का रिकॉर्ड अपलोड किया जा सकेगा — तैयार कर लिया था। लेकिन प्रदेश सरकार ने इस पोर्टल के लिए आवश्यक डेटा उपलब्ध कराने से इंकार कर दिया है।

निगम अब तक पूरे प्रदेश की तरह राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे ई‑नगर पालिका पोर्टल पर निर्भर थी। लेकिन बार-बार पोर्टल की हैंगिंग, सर्वर डाउन होना जैसी समस्याओं ने निगम के कामकाज को प्रभावित किया। ऐसे में निगम ने स्वीकृति लेकर अपना पोर्टल तैयार करने की पहल की। निजी एजेंसी के माध्यम से यह पोर्टल बना लिया गया। अब इसमें निगम के संपत्तिकर, जलकर व अन्य करों का डेटा अपलोड करना था।

पर समस्या कहाँ आई?


निगम ने इस डेटा के लिए राज्य सरकार से कई बार अनुरोध किया लेकिन क्योंकि सरकार ने डेटा देने के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया, मामला ठप हो गया। सोमवार को आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में यह मामला प्रमुखता से उठा। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने स्पष्ट रूप से कहा कि निगम द्वारा बनाया गया पोर्टल कितनी सुरक्षा सुनिश्चित करता है, कितना राज्य सरकार की नीति के अनुरूप है — इन पहलुओं का परीक्षण करना आवश्यक है। इस आधार पर सरकार डेटा उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को अस्वीकार कर रही है।

नगर निगम के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि पोर्टल राज्य सरकार की अनुमति के पीछे तैयार किया गया है। इसके बावजूद राज्य सरकार के रवैये में कोई बदलाव नहीं आया। दुबे ने यह भी कहा कि यदि हर नगर निगम को अपना अलग पोर्टल बनाने की अनुमति दी गई, तो शासन व्यवस्था में विविधता व सुरक्षा-मानदंडों के लिहाज से समस्या उत्पन्न हो सकती है।

आगे क्या हुआ?


बैठक में तय हुआ कि आगामी समय में भोपाल नगर निगम के पोर्टल का प्रेजेंटेशन भोपाल में संजय दुबे के समक्ष रखा जाएगा। उसके बाद ही इंदौर नगर निगम के पोर्टल की संभावना पर पुनर्विचार होगा। इस प्रकार फिलहाल निगम के खुद-के पोर्टल के आने की संभावना धूमिल हो गई है।

निगम के सुझाव एवं चुनौतियाँ


निगम का तर्क है कि वर्तमान ई-नगर पालिका पोर्टल बार-बार सर्वर डाउन हो जाता है, जिससे करों की वसूली, रिकॉर्ड अपडेट और अन्य प्रशासनिक काम प्रभावित हो रहे हैं। निगम ने यह नया पोर्टल समय-सापेक्ष, अधिक विश्वसनीय और तेजी से संचालन योग्य बनाने का लक्ष्य रखा था। निजी एजेंसी द्वारा विकसित इस पोर्टल में तकनीकी रूप से सुधार आधारित सुविधाएँ शामिल थीं। लेकिन शासन की ओर से सुरक्षा, नीति-अनुरूपता और मानक परीक्षण को आधार बनाकर डेटा देने से इंकार करना निगम की योजना को रोक रहा है।

दूसरी ओर, राज्य सरकार का कहना है कि एक-समान प्रणाली बनाए रखना बेहतर होगा क्योंकि यदि हर नगर निगम अपना पोर्टल बनाएगा, तो डेटा सुरक्षा, इंटरऑपरेबिलिटी और मानकीकरण जैसे महत्वपूर्ण पहलू जोखिम में आ सकते हैं। एक प्रणाली में जगह-जगह विभाजन न हो इसके लिए यह कदम आवश्यक माना जा रहा है।

स्थानीय प्रभाव


इससे इंदौर की आम जनता को तत्काल प्रभाव महसूस हो सकता है। वर्तमान में प्रणाली के अक्सर हैंग होने, सर्वर डाउन होने जैसी शिकायतें आ रही हैं, और निगम ने इन्हीं परेशानियों के चलते अपना विकल्प चुनने की कोशिश की थी। यदि निगम स्वयं का सुचारू पोर्टल नहीं चला पाया, तो करों की समय-से वसूली, रिकॉर्ड अपडेट, शहर के सेवा-प्रदायों में देरी हो सकती है।

विश्लेषण और आगे की राह


इस घटना से दो बड़ी बातें स्पष्ट होती हैं:

  1. स्थानीय-शहरी निकायों द्वारा तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनने की चाह — इंदौर नगर निगम ने खुद का पोर्टल बनाकर इसे दिखाया है।

  2. राज्य-स्तर पर डेटा सुरक्षा, मानकीकरण और नीति-अनुरूपता के प्रश्न — सरकार ने ये कारण दिए हैं कि निगम द्वारा बनाया गया पोर्टल इन मानकों को पूरा करता है या नहीं।

दोनों पक्षों के दृष्टिकोण में संतुलन आवश्यक है। निगम को तत्काल अपने तकनीकी सिस्टम की सुरक्षा व गति का परीक्षण कर उसे मानदंड-अनुरूप तैयार करना होगा। वहीं सरकार को यह देखना होगा कि क्या जिला-नगर निकायों के लिए एक केंद्रीकृत पोर्टल ही बेहतर विकल्प है, या स्वायत्त पोर्टल की अनुमति मिल सकती है बशर्ते सुरक्षा व मानक सुनिश्चित हों।

निष्कर्ष


इंदौर का मामला स्थानीय-शहरी प्रशासन और राज्य-सिस्टम के बीच तकनीकी व नीति-आधारित सहमति की एक चुनौती के रूप में सामने आया है। यदि निगम द्वारा बनाए गए पोर्टल को जल्द परीक्षण व मान्यता मिल जाती है, तो आगे चला जाना संभव है। अन्यथा, निगम को वर्तमान राज्य-पोर्कल पर निर्भर रहना होगा, जो अभी तक निरंतर परेशानी का कारण रहा है।

यह कहानी न सिर्फ इंदौर की है, बल्कि यह उस व्यापक प्रक्रिया की प्रतिनिधि है जिसमें शहरों की स्वायत्तता, डिजिटल प्रशासन की गति व राज्य-नियंत्रण के बीच संतुलन ढूँढ़ा जा रहा है।

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