भारत-इज़रायल दोस्ती का पक्का रिश्ताः कर्ज नहीं, साझा इतिहास
भारत और इज़रायल के बीच संबंध केवल हाल-फिलहाल के रणनीतिक साझेदारी से नहीं बने हैं — बल्कि इनके बीच एक गहरा, ऐतिहासिक और भावनात्मक बंधन है। आज, जब इज़रायल के विदेश मंत्री गिदोन सा’र भारत की धरती पर हैं, उन्होंने भारत को अपना दोस्त बताया और दोनों देशों के बीच दोस्ती को «दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी» के रूप में परिभाषित किया। उसी बीच, इतिहास के एक ऐसे मुकाम की याद आ रही है जिसने आज के भारत-इज़रायल संबंधों की नींव रखी है — Battle of Haifa (1918), जिसे आम समझ में ‘हाइफा युद्ध’ कहा जा सकता है।
बातचीत और सुरक्षा में एक स्वर
भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर के साथ बैठक में गिदोन सा’र ने कहा कि कट्टरपंथी आतंकवाद भारत और इज़रायल दोनों के लिए एक समान और गंभीर खतरा है। इज़रायल ने खुलकर पाकिस्तानी प्रायोजित आतंकवाद पर भारत के पक्ष में आवाज उठाई — विशेषकर जब भारत के जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले की निंदा की गई।
उन्होंने कहा:
“हम रातों-रात समझौता नहीं करेंगे, हमारे देश आतंक से लड़ चुके हैं, हममास, हिज्बुल्लाह, हूथी जैसे समूह हमारी सुरक्षा-व्यवस्था को प्रभावित करते हैं।”
इस प्रकार, भारत-इज़रायल दोस्ती अब सिर्फ कूटनीतिक दोस्ती नहीं बल्कि आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई का प्रतीक बन चुकी है।
हाइफा: कहानी वीरता की और भारत-इज़रायल संबंधों की
हाइफा (आज के इज़रायल में) पर 1918 में हुए युद्ध का विवरण बताता है कि भारत ने सिर्फ अपना हित नहीं देखा, बल्कि उस समय वर्ल्ड वॉर I की पृष्ठभूमि में मोर्चा सम्हाला था।
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23 सितंबर 1918 को, ब्रितानी भारतीय सेना के तहत मुख्य रूप से भारत के प्रामाणिक रेजिमेंट्स (जोधपुर लैंसर्स, मैसूर लैंसर्स, हैदराबाद लैंसर्स) ने Haifa पर ओटोमन (तुर्की) और जर्मन सहयोगी सेनाओं को मात दी।
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इस युद्ध में भारतीय घुड़सवार सेना सिर्फ भालों और तलवारों से सुसज्जित थी, जबकि दुश्मन के पास मशीन-गन, तोपें थीं। तब भी, उन्होंने Mount Carmel की खड़ी ढलानों को पार कर विजय पाई।
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प्रमुख रूप से, मेजर दलपत सिंह (जोधपुर लैंसर्स) को “हीरो ऑफ हाइफा” कहा जाता है।
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इस जीत ने ओटोमन साम्राज्य की मध्य पूर्व में शक्ति को चोट पहुँचाई और इज़रायल के क्षेत्रीय इतिहास को नया मोड़ दिया।
इस जीत का आज-तक असर और कर्ज की बात
इस लड़ाई की विजय ने भारत-इज़रायल बांड को एक यथार्थ-आधारित आधार दिया। निम्नलिखित बिंदु बातें स्पष्ट करते हैं:
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ऐतिहासिक ऋण: भारत ने उस समय के भारतीय सैनिकों के बलिदान से हाइफा व अन्य क्षेत्रों को आज़ाद कराने में योगदान दिया था — इसे कभी-कभी “इज़रायल पर भारत का कर्ज” जैसे भावों से वर्णित किया जाता है।
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दोस्ताना दृष्टिकोण: इस इतिहास-संबंधित विकास ने आज भारत-इज़रायल को सिर्फ रणनीतिक साझेदार नहीं बल्कि साझा इतिहास वाले मित्र बना दिया है। इज़रायल ने भी हर साल 23 सितम्बर को ‘हाइफा डे’ के रूप में भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी है।
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रणनीतिक साझेदारी: आज भारत और इज़रायल सेमीकंडक्टर्स, साइबर सुरक्षा, हाई-टेक, एआई जैसे क्षेत्र में सहयोग बढ़ा रहे हैं। भारत अगले साल फरवरी में आयोजित कर रहा है एआई इम्पैक्ट समिट, जिसमें इज़रायल की भागीदारी की प्रतीक्षा की जा रही है।
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प्रचार और इतिहास सुधार: हाल ही में, इज़रायल के कुछ इतिहास पाठ्यक्रम में भारतीय सैनिकों की भूमिका को अधिक सही तरह से शामिल करने की पहल हुई है।
भारत-इज़रायल दोस्ती आज: क्यों खास है?
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दो लोकतंत्रों का मेल: भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जबकि इज़रायल एक फलता-फूलता लोकतंत्र है। दोनों ने आतंकवाद और अस्थिरता से जूझा है। इस साझा अनुभव से संबंध गहरे बने हैं।
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रणनीतिक साझेदारी: रक्षा, हाई-टेक, साइबर, रणनीतिक खुफिया क्षेत्रों में दोनों देशों की भागीदारी बढ़ी है।
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ऐतिहासिक बंधन: हाइफा जैसी घटनाओं ने इस दोस्ती को सिर्फ आज का विषय न बनाकर, इतिहास-आधारित मित्रता का रूप दे दिया है।
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भविष्य-उन्मुख सहयोग: जैसे कि एआई, सेमीकंडक्टर, अन्वेषण प्रौद्योगिकी आदि में सहयोग की पहल — यह सिर्फ वर्तमान नहीं बल्कि भविष्य-परक साझेदारी का संकेत है।
पाकिस्तान को संदेश — पहलगाम हमले के बाद
इज़रायल के विदेश मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि आतंकवाद किसी एक देश या क्षेत्र का नहीं है — भारत और इज़रायल दोनों इस लड़ाई में साथ हैं। भारत-पाकिस्तान के संदर्भ में यह संकेत कर रहा है कि भारत को अंतरराष्ट्रीय मित्र भी मिल चुके हैं, जो आतंकवाद-विरोधी मोर्चे पर भारत का समर्थन कर सकते हैं। इस प्रकार यह भारत-इज़रायल दोस्ती सिर्फ प्रतीक नहीं बल्कि कार्रवाई-सक्षम है।
निष्कर्ष: क्या सहमति है कि यह दोस्ती कभी कमजोर नहीं होगी?
हां, इस तरह कहा जा सकता है कि भारत और इज़रायल की दोस्ती सिर्फ एक राजनीतिक बयान नहीं है — यह साझा इतिहास, साझा दर्द, साझा भविष्य दृष्टि और साझा रणनीति का मेल है। जब तक भारत-इज़रायल को आतंकवाद, सुरक्षा, तकनीक, आर्थिक साझेदारी आदि-सहायता-क्षेत्रों में साझा हित रहेगा, यह दोस्ती बनी रहेगी। इतिहास ने भारतीय सैनिकों को इज़रायल की धरती पर नायक बनाया — आज यही नायक-भावना दोनों देशों को एक मजबूत गठबंधन बनाती है।

