गोम्मटगिरी तीर्थ क्षेत्र पर एक साथ 10 दीक्षाएं — आचार्य श्री विभव सागर जी के करकमलों से हुआ ऐतिहासिक दीक्षा समारोह
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इंदौर। रविवार का दिन दिगंबर जैन समाज के लिए ऐतिहासिक रहा, जब गोम्मटगिरी बाहुबली अतिशय क्षेत्र में एक साथ 10 दीक्षार्थियों ने जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण कर संसार से वैराग्य का मार्ग अपनाया। इस दीक्षा समारोह ने गोम्मटगिरी को अतिशय क्षेत्र का दर्जा दिलाते हुए इस तीर्थ की धार्मिक महत्ता को और बढ़ा दिया।
इस पुण्य अवसर पर आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज ने अपने करकमलों से 1 ब्रह्मचारी भैया और 9 आर्यिकाओं को दीक्षा प्रदान की। जैसे ही दीक्षा संस्कार प्रारंभ हुआ, पूरा पांडाल “नमोस्तु, नमोस्तु” और “जय जय आचार्य भगवंत की” के जयकारों से गूंज उठा।
गोम्मटगिरी बना अतिशय क्षेत्र
कार्यक्रम संयोजक आकाश पांड्या और धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन ‘दद्दू’ ने बताया कि यह ऐतिहासिक अवसर गोम्मटगिरी तीर्थ क्षेत्र के लिए अतिशय सिद्ध हुआ। एक साथ 10 दीक्षाओं का होना न केवल दुर्लभ बल्कि पुण्य का अद्भुत संगम है।
इंदौर, भोपाल, सागर, नागपुर, जयसिंगपुर, एटा (उत्तर प्रदेश), औरंगाबाद, छिंदवाड़ा, भोपाल और महाराष्ट्र सहित अनेक स्थानों से आए दिगंबर समाजजनों ने इस अवसर का साक्षी बनने का सौभाग्य प्राप्त किया।
दीक्षा लेने वाले 10 दीक्षार्थी और उनके नए धार्मिक नाम
दीक्षा ग्रहण करने वालों में शामिल रहे —
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ब्रह्मचारी सुनील भैया (जयसिंगपुर, महाराष्ट्र) — नामकरण: मुनि श्री 108 विहारसागर जी महाराज
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आर्यिका श्री आराधना श्री माताजी (बाल ब्रह्मचारिणी राजश्री दीदी, छिंदवाड़ा)
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आर्यिका श्री विराग श्री माताजी (मीनू दीदी, इंदौर)
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आर्यिका श्री विचार श्री माताजी (ट्विंकल दीदी, एटा, उप्र)
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आर्यिका श्री विदश श्री माताजी (जयश्री दीदी, औरंगाबाद)
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क्षुल्लिका श्री विश्वप्रज्ञा श्री माताजी (रेखा दीदी, औरंगाबाद)
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क्षुल्लिका श्री विद्याश्री माताजी (सविता दीदी, भोपाल)
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क्षुल्लिका श्री मंत्र श्री माताजी (कोकिला बेन)
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क्षुल्लिका श्री विभक्ति श्री माताजी
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क्षुल्लिका श्री विश्वविद्या श्री माताजी
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क्षुल्लिका श्री विरासत श्री माताजी
आचार्य श्री विभव सागर जी ने नामकरण संस्कार के दौरान प्रत्येक दीक्षार्थी के लिए नए आध्यात्मिक नामों की घोषणा की, जिसके बाद पांडाल “नमोस्तु शासन जयवंत हो” के जयघोषों से गूंज उठा।
भावनाओं से ओतप्रोत रहा दीक्षा समारोह
दीक्षा से पहले सभी दीक्षार्थियों का केशलोंच संस्कार संपन्न हुआ। इस दौरान वातावरण भावविभोर हो उठा। माता-पिता और परिजनों ने नए मुनियों और आर्यिकाओं को पिच्छी, कमंडल, वस्त्र, माला और शास्त्र भेंट कर उन्हें विदाई दी। यह क्षण समर्पण, वैराग्य और करुणा का प्रतीक बन गया।
कार्यक्रम का संचालन बाल ब्रह्मचारी तरुण भैया ने किया और भक्ति गीतों की प्रस्तुति मिनी जैन ने दी, जिनकी मधुर वाणी ने वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया।
आचार्य श्री विभव सागर जी का उपदेश
आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज ने कहा —
“जिन लोगों ने आज दीक्षा ली है, उन्होंने संसार के सभी मोहों का त्याग किया है। यह क्षण केवल उनके लिए नहीं, पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक है। जब कोई आत्मा वैराग्य मार्ग चुनती है, तब वह अनगिनत लोगों को धर्म के प्रति जाग्रत करती है।”
उन्होंने आगे कहा कि गोम्मटगिरी जैसे पवित्र स्थान पर इतनी बड़ी संख्या में दीक्षा होना अपने आप में अतिशय घटना है, जिससे यह स्थल “अतिशय क्षेत्र” बन गया है।
दीक्षा कार्यक्रम में शामिल प्रमुख साधु-संत और गणमान्य
इस अवसर पर आचार्य श्री विनम्र सागर जी महाराज, आचार्य श्री विशद सागर जी, मुनि संघ के अन्य साधु-संतों के साथ-साथ हजारों की संख्या में दिगंबर समाजजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के प्रमुख आयोजकों में —
अशोक-आशा पंचरत्न, आकाश पांड्या, सम्यक जैन, डॉ. गिरीश पाटोदी, संदीप जैन (मोर्या स्टील), राजेश जैन दद्दू, प्रवीण पाटनी, कैलाश लुहाड़िया, कुशलराज जैन पमपम, हंसमुख गांधी, नकुल पाटोदी, प्रीतपाल टोंग्या, जेनेश झांझरी, डॉ. जैनेन्द्र जैन, प्रदीप बड़जात्या सहित अनेक समाजसेवी एवं दिगंबर अनुयायी शामिल रहे।
गोम्मटगिरी — वैराग्य और श्रद्धा का प्रतीक
गोम्मटगिरी तीर्थ क्षेत्र इंदौर शहर से लगभग 6 किमी दूर स्थित है और यह भगवान बाहुबली की 21 फीट ऊँची प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है। अब इस ऐतिहासिक 10 दीक्षाओं के अवसर ने इसे “अतिशय क्षेत्र” का दर्जा दिला दिया है।
यह स्थल अब केवल दर्शन का केंद्र नहीं, बल्कि वैराग्य और तपस्या का सजीव उदाहरण बन गया है, जहां आने वाला हर भक्त आत्मशुद्धि और मोक्षमार्ग की प्रेरणा लेकर लौटेगा।


