देवउठनी एकादशी पर सजी सांवरे की महफ़िल: नागदा में श्री श्याम जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया
कार्तिक शुक्ल एकादशी पर बिरलाग्राम श्याम मंदिर में भव्य भजन संध्या, छप्पन भोग, इत्र वर्षा और आतिशबाज़ी से गूंज उठा परिसर
नागदा (मध्य प्रदेश): देवउठनी एकादशी (कार्तिक शुक्ल एकादशी) के पावन पर्व पर शनिवार, 1 नवंबर 2025 को बिरलाग्राम स्थित श्री श्याम बाबोसा मंदिर में भव्य श्री श्याम जन्मोत्सव एवं भजन संध्या का आयोजन बड़े ही भक्तिभाव और हर्षोल्लास के वातावरण में संपन्न हुआ।
पूरे मंदिर परिसर को दुल्हन की तरह सजाया गया था — रंग-बिरंगे गुब्बारे, पुष्प सजावट, और विद्युत झिलमिल रोशनी से निखरता यह दृश्य श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा था।
भजन संध्या में गूंजे श्याम नाम के गीत
कार्यक्रम का शुभारंभ शाम 7 बजे हुआ, जो देर रात तक श्याम भक्ति के रंग में डूबा रहा।
भजन संध्या में शहर के प्रसिद्ध भजन गायक भुवनेश्वर शर्मा, कमलेश काठा, नागेश काठा, विजय पटेल, बंटी और अन्य कलाकारों ने अपनी मधुर स्वर लहरियों से श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।
हर भजन के साथ मंदिर में “श्याम बाबा की जय”, “हारे के सहारे की जय” जैसे गगनभेदी जयकारे गूंजते रहे।
मावे के केक और छप्पन भोग से रिझाए गए बाबा श्याम
इस पावन अवसर पर छप्पन भोग, पुष्प वर्षा, इत्र वर्षा, भव्य आतिशबाजी और मावे के केक से बाबा श्याम को रिझाया गया।
मध्यरात्रि में महाआरती के साथ जन्मोत्सव का उत्सव मनाया गया।
भक्तों ने आरती के पश्चात बाबा को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए “श्याम जन्मोत्सव की जय” के जयकारे लगाए।
विशेष रूप से श्रद्धालुओं के लिए जोत दर्शन की कतार में सुव्यवस्थित व्यवस्था की गई, ताकि सभी भक्त बाबा श्याम के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त कर सकें।
गरबा और कीर्तन में झूमे भक्त
रात्रि के दूसरे सत्र में श्रद्धालुओं ने गरबा नृत्य, भजन कीर्तन और जन्मोत्सव गीतों पर देर रात तक नृत्य किया।
मंदिर परिसर “श्याममय” वातावरण में परिवर्तित हो गया।
श्याम प्रेमी मुकेश मोहता, पंकज नामदेव, मयंक शर्मा, पंकज अग्रवाल, संदीप प्रभात शर्मा, हनुमान प्रसाद शर्मा, मनोहर पाराशर, सत्यनारायण जोशी, कृष्णा जोशी सहित बड़ी संख्या में भक्तों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
आयोजन समिति के अनुसार, पूरे दिन मंदिर में तैयारियां चलती रहीं — सजावट, प्रसाद वितरण, संगीत संयोजन और प्रकाश व्यवस्था में स्थानीय युवाओं ने बढ़-चढ़कर योगदान दिया।
भक्ति, श्रद्धा और उल्लास का संगम बना श्याम मंदिर
देवउठनी एकादशी का यह अवसर भक्तों की आस्था और प्रेम का अद्भुत संगम साबित हुआ।
मंदिर में प्रवेश करते ही हर भक्त के चेहरे पर भक्ति का उजाला झलक रहा था।
“बाबा श्याम के दरबार में आने से आत्मिक शांति और आनंद की अनुभूति होती है,” ऐसा कहना था श्रद्धालु महेंद्र शर्मा का।
पंडाल में वातावरण इतना भक्ति रस में डूबा था कि बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सभी बाबा के नाम की तान पर झूमते रहे।
नागदा में देवउठनी एकादशी का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व
देवउठनी एकादशी (जिसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है) भगवान विष्णु के चार महीने के योगनिद्रा से जागरण का प्रतीक है।
इसी दिन से विवाह, मांगलिक और धार्मिक आयोजनों की शुरुआत मानी जाती है।
नागदा में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी श्याम जन्मोत्सव के साथ यह पर्व पूरे भक्ति और उत्सव भाव से मनाया गया।
मंदिर समिति ने बताया कि इस वर्ष का आयोजन श्याम परिवार बिरलाग्राम की ओर से किया गया, जिसमें नगर के सभी धर्मप्रेमी परिवारों ने सहभागिता की।
रातभर गूंजते रहे भजनों के स्वर और आतिशबाज़ी की चमक
रात के अंतिम पहर तक बाबा श्याम की महिमा के गीतों की गूंज मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में सुनाई देती रही।
आकाश आतिशबाजी से जगमगा उठा, और श्रद्धालुओं ने इस दृश्य को अपने मोबाइल कैमरों में कैद किया।
भक्तों ने कहा कि “ऐसा दिव्य वातावरण केवल श्याम जन्मोत्सव पर ही देखने को मिलता है।”
भक्तों ने किया आशीर्वाद ग्रहण, निलेश मेहता ने दी जानकारी
कार्यक्रम की संपूर्ण जानकारी श्याम प्रेमी निलेश मेहता ने दी।
संवाददाता जीवनलाल जैन (नागदा) के अनुसार, इस अवसर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु सपरिवार उपस्थित रहे और देर रात तक बाबा के भजनों का आनंद लेते रहे।



