बाल स्वयंसेवक ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्राण वायु — प्रांत बाल कार्य प्रमुख श्री अरुण जी जैन
नागदा समाचार अपडेट | Rashtriya Swayamsevak Sangh News 2025
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर रविवार को नागदा नगर में बाल स्वयंसेवकों का भव्य पथ संचलन निकाला गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत बाल कार्य प्रमुख प्रचारक श्री अरुण जी जैन मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने बाल स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि —
“बाल स्वयंसेवक ही संघ की प्राण वायु हैं, जो राष्ट्र और समाज के प्रति पूर्ण समर्पण के साथ कार्य करते हैं। इन्हीं बाल स्वयंसेवकों से संघ की ऊर्जा, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम की धारा निरंतर प्रवाहित होती है।”
शताब्दी वर्ष में बाल पथ संचलन का आयोजन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में नगर में आयोजित यह बाल पथ संचलन पूरे उत्साह और अनुशासन का प्रतीक रहा। सुबह से ही नगर की कृषि उपज मंडी परिसर में बाल स्वयंसेवकों का एकत्रीकरण हुआ, जहाँ ध्वज प्रणाम, एकल गीत, सामूहिक गीत और अमृत वचन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की गई।
मुख्य मंच पर संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी नगर सह कार्यवाह जीवन सिंह जी डोडिया एवं अन्य गणमान्य कार्यकर्ता उपस्थित थे। नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरते संचलन के दौरान नागरिकों ने पुष्प वर्षा कर बाल स्वयंसेवकों का गर्मजोशी से स्वागत किया।
श्री अरुण जी जैन का प्रेरक बौद्धिक
अपने प्रेरणादायक बौद्धिक में श्री अरुण जी जैन ने कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष में जब हम अपने 100 वर्षों के कार्य की यात्रा पर दृष्टिपात करते हैं, तो यह स्पष्ट होता है कि “संघ की शक्ति का मूल स्रोत — बाल स्वयंसेवक ही हैं।”
उन्होंने कहा कि संघ शाखा में बाल्यावस्था से जुड़ने वाले स्वयंसेवक केवल व्यायाम या खेल नहीं सीखते, बल्कि अनुशासन, देशभक्ति, सेवा और आत्मनियंत्रण के संस्कार ग्रहण करते हैं। यही संस्कार आगे चलकर उन्हें राष्ट्र निर्माण की दिशा में कार्यरत नागरिक बनाते हैं।
जैन ने कहा —
“संघ का कार्य किसी व्यक्ति या संगठन के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र के उत्थान और संस्कृति की रक्षा के लिए है।
बाल स्वयंसेवक ही वह शक्ति हैं जो आने वाले भारत का चरित्र गढ़ते हैं।”
उन्होंने यह भी बताया कि संघ की शाखाएँ बच्चों में आत्मविश्वास, टीम भावना और राष्ट्रप्रेम का संस्कार रोपित करती हैं। यही कारण है कि संघ के स्वयंसेवक चाहे सामाजिक सेवा हो या आपदा राहत — हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाते हैं।
राष्ट्रीय प्रथम की भावना से सेवा कार्य
कार्यक्रम में उपस्थित स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए श्री अरुण जी जैन ने यह भी कहा कि संघ की प्रत्येक गतिविधि “राष्ट्रीय प्रथम” की भावना से प्रेरित है।
उन्होंने कहा कि 1925 से लेकर आज तक, संघ ने लाखों ऐसे स्वयंसेवक तैयार किए हैं जो बिना किसी स्वार्थ के राष्ट्र सेवा, सामाजिक एकता, शिक्षा, पर्यावरण, स्वदेशी और संस्कार निर्माण में जुटे हैं।
उन्होंने कहा —
“बाल स्वयंसेवक केवल शाखा में खेलते नहीं, वे जीवन की दिशा तय करते हैं।
जब राष्ट्र के लिए जीने की प्रेरणा बचपन में मिल जाती है, तो व्यक्ति जीवनभर देश के लिए कार्य करता है।”
नगर में निकला अनुशासनपूर्ण संचलन
बौद्धिक के पश्चात पथ संचलन प्रारंभ हुआ, जिसमें सैकड़ों बाल स्वयंसेवक दंड (लाठी) लेकर संगठित स्वरूप में नगर के प्रमुख मार्गों से गुज़रे।
संपूर्ण संचलन में बाल स्वयंसेवकों की एकरूप वेशभूषा, अनुशासन और लयबद्ध कदमताल ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। मार्गों पर अनेक स्थानों पर स्थानीय नागरिकों, व्यापारी संघों और सामाजिक संगठनों द्वारा स्वागत द्वार सजाए गए और पुष्पवर्षा की गई।
संचलन का समापन पुनः कृषि उपज मंडी परिसर में हुआ, जहाँ सभी स्वयंसेवकों ने मिलकर “भारत माता की जय” के नारों के साथ कार्यक्रम का समापन किया।
संघ का शताब्दी वर्ष — सेवा, संस्कार और संगठन का प्रतीक
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्षों की यात्रा भारत के सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में अमिट योगदान का प्रतीक है। संघ का उद्देश्य एक ऐसे राष्ट्र का निर्माण करना है, जहाँ चरित्र, संस्कार और संस्कृति का समन्वय हो।
संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री अरुण जी जैन ने कहा कि यह शताब्दी केवल उत्सव नहीं बल्कि “राष्ट्र पुनर्जागरण का संकल्प वर्ष” है।
उन्होंने आह्वान किया कि हर परिवार अपने बच्चों को संघ शाखा से जोड़ें, ताकि बाल स्वयंसेवकों के माध्यम से राष्ट्रभक्ति की जड़ें और गहरी हों।
सूचना एवं आभार
कार्यक्रम का संचालन नगर प्रचार प्रमुख अंकित जी पोरवाल ने किया और संपूर्ण आयोजन में नगर के कई स्वयंसेवकों का सहयोग रहा।
यह जानकारी संवाददाता जीवन लाल जैन, नागदा द्वारा प्रदान की गई।



