मध्यप्रदेश में एकता का उल्लास: 150वीं जयंती पर ‘रन फॉर यूनिटी’
आज प्रदेश भर में सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय एकता दिवस बड़े उत्साह से मनाया गया। इस दिन पूरे मध्यप्रदेश के सरकारी कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों व विभिन्न संगठनों में “एकता, अखंडता एवं राष्ट्रीय सुरक्षा” के मूल्यों को सुदृढ़ करने हेतु विविध कार्यक्रम आयोजित किये गए।
एकता की शपथ — हर जिले में
प्रदेश के प्रत्येक जिले में, कार्यक्रम प्रारंभ हुआ शपथ-ग्रहण से। शपथ-ग्रहण समारोह में स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की उपस्थिति में कर्मचारियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों ने मिलकर देश-एकता एवं सामाजिक सद्भाव के संकल्प लिये। इस पहले चरण के कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि मध्यप्रदेश ने “एकता के सूत्र” में बँधने की दिशा में कदम बढ़ा रखा है।
“रन फॉर यूनिटी” में भावपूर्ण भागीदारी
राजधानी भोपाल में आज सुबह आयोजित ‘रन फॉर यूनिटी’ कार्यक्रम में लगभग 2,500 धावकों ने हिस्सा लिया — जिसमें छात्र-छात्राएं, युवा, शासकीय एवं पुलिसकर्मी शामिल थे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शौर्य स्मारक से इस मैराथन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। दौड़ शौर्य स्मारक से आरंभ होकर लाल परेड मैदान पर समाप्त हुई। रास्ते में प्रमुख चौराहे जैसे व्यापमं चौराहा, बोर्ड ऑफिस चौराहा, जेल मुख्यालय तिराहा तथा होम गार्ड टर्निंग पार किये गए। इस अवसर ने कार्यकर्ता-युवा-शिक्षार्थियों को एक सामूहिक आंदोलन में भाग लेने का अवसर दिया, जहाँ एकता-प्रेरणा स्पष्ट तौर पर दृष्टिगत थी।
मंत्रालय परिसर में मुख्य शपथ ग्रहण एवं वृक्षारोपण
भोपाल के मंत्रालय परिसर में स्थित वल्लभभाई पटेल पार्क में एक मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें मंत्रालय, सतपुड़ा भवन तथा विंध्याचल भवन के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों और विभागाध्यक्षों को अनिवार्य रूप से शामिल होने के निर्देश दिए गए थे। समारोह में न केवल शपथ-वचन लिए गए, बल्कि “एकता वृक्षारोपण अभियान” भी संचालित हुआ। स्कूलों तथा पुलिस थानों में सरदार पटेल के जीवन-कार्य पर आधारित फोटो-प्रदर्शनी एवं अन्य शुभारंभ समारोह भी इसी क्रम में आयोजित किये गए।
क्यों महत्वपूर्ण है यह आयोजन?
– 31 अक्टूबर को देश भर में राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है, क्योंकि यह दिन सरदार पटेल की जयंती है; उनका योगदान भारत के राजनीतिक एकीकरण में अमूल्य है।
– केंद्र सरकार ने सरदार पटेल की 150वीं जयंती को दो-वर्षीय समारोह के रूप में मनाने की घोषणा की है – यह वर्ष 2024–26 तक चलेगा।
– इस प्रकार के आयोजन न सिर्फ शैक्षणिक या सांस्कृतिक प्रतीक हैं बल्कि सामाजिक सद्भाव, राष्ट्रीय एकता तथा प्रदेश-स्तर पर नागरिक भागीदारी को सशक्त करने का माध्यम भी बने हुए हैं।
मध्यप्रदेश में इस कार्यक्रम का विशेष स्वरूप
मध्यप्रदेश के लिए यह आयोजन विशेष रूप से बांध-वाले और समावेशी था क्योंकि प्रदेश-स्तरीय संवाद, जन-भागीदारी और स्थानीय-स्तर पर सक्रियता को बढ़ावा मिला।
– प्रत्येक जिले में शपथ-ग्रहण एवं रन-मैराथन द्वारा जनसंपर्क को सक्रिय किया गया।
– स्कूलों में फोटो-प्रदर्शनी और वृक्षारोपण अभियानों द्वारा विद्यार्थियों को एकता एवं पर्यावरण-जागरूकता का संदेश दिया गया।
– पुलिस थानों, शासकीय कार्यालयों में एकता-मंत्र को दैनिक-क्रम में स्थापित करने का संकल्प लिया गया।
भविष्य-दृष्टि और सामाजिक संदेश
इस प्रकार के आयोजन का उद्देश्य सिर्फ एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है; यह लंबे समय तक रहने वाली सामाजिक वृत्ति को बढ़ावा देता है — जहाँ “एकता” सिर्फ प्रतिकात्मक नहीं, बल्कि व्यवहार-आधारित हो। इस दिशा में मध्यप्रदेश ने अच्छा उदाहरण दिखाया है।
चलते–चलते यह कहना उपयुक्त होगा कि आज का दिन याद दिलाता है कि जब हम “एकता, अखंडता एवं राष्ट्रीय सुरक्षा” की भावना से बंधे होते हैं, तो प्रदेश समृद्धि, विकास और सामाजिक सद्भाव की ओर अग्रसर होता है। 150वीं जयंती-अवसर पर यह आयोजन एक नया संकल्प है — आने वाले समय में हम जिस मध्यप्रदेश और भारत की कल्पना करते हैं, वह वास्तव में एक समरस, सशक्त और एकीकृत राष्ट्र होगा।

