साइबर अपराध से लड़ाई केवल पुलिस की नहीं, पूरे समाज की जिम्मेदारी: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
भोपाल: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को ‘रन फॉर साइबर अवेयरनेस 2025’ के सफल आयोजन पर मध्यप्रदेश पुलिस और सभी प्रतिभागियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध से लड़ाई केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पूरे समाज की सहभागिता और जागरूकता पर निर्भर करती है। डिजिटल युग में कानून और तकनीक अपने स्थान पर हैं, लेकिन सबसे बड़ा हथियार जागरूक नागरिक हैं। जब समाज के हर नागरिक में साइबर जागरूकता होगी, तभी देश डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह आयोजन डिजिटल युग में नागरिक सुरक्षा का प्रतीक बन गया है और इसे जन-आंदोलन का रूप दिया गया है। उन्होंने चेताया कि जिस रफ्तार से हम डिजिटल रूप से सशक्त हुए हैं, उसी रफ्तार से नई चुनौतियां और खतरे सामने आ रहे हैं। तकनीक ने हमें जोड़ा तो है, लेकिन अपराधियों को भी नए हथियार दिए हैं। आज साइबर ठगी, फेक प्रोफाइल, हैकिंग, डेटा ब्रीचिंग, ऑनलाइन फ्रॉड, ओटीपी धोखाधड़ी और फेक निवेश लिंक जैसी घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं, जो समाज के हर वर्ग को प्रभावित कर रही हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया रन का शुभारंभ
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अटल पथ स्थित प्लेटिनम प्लाजा से रन के प्रतिभागियों को झंडी दिखाकर रवाना किया। यह साइबर जागरूकता रन अटल पथ से शुरू होकर एपेक्स बैंक तिराहा होते हुए टी.टी. नगर स्टेडियम पर समाप्त हुआ। इस अवसर पर विधायक भगवानदास सबनानी, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना, और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी उपस्थित थे। कार्यक्रम स्थल पर मुख्यमंत्री का स्वागत पुलिस बैंड की धुन और पुष्प गुच्छ से किया गया, और उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किया गया।
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर नागरिकों से अपील की कि यदि किसी के साथ साइबर ठगी हो, तो तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट दर्ज करें। उन्होंने कहा कि देरी करने से पीड़ित के पैसे वापस मिलने की संभावना कम हो जाती है, इसलिए त्वरित कार्रवाई ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। उन्होंने आगे कहा कि जिस तरह से हमने स्वच्छता को अपनी संस्कृति बनाया है, वैसे ही साइबर स्वच्छता को भी अपनी जीवनशैली में शामिल करना होगा।
डिजिटल इंडिया और साइबर सुरक्षा: पीएम मोदी का विज़न
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने डिजिटल इंडिया के माध्यम से भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने का सपना देखा था। डिजिटल भुगतान, ई-गवर्नेंस और ऑनलाइन सेवाएं आज सभी नागरिकों के जीवन का हिस्सा बन गई हैं। मध्यप्रदेश सरकार ने पंचायत स्तर से लेकर सचिवालय तक हर क्षेत्र में डिजिटल सेवाएं लागू की हैं।
डॉ. यादव ने कहा कि आज के समय में साइबर अपराधी विभिन्न तरीके अपनाकर लोगों को ठग रहे हैं—कभी स्वयं को पुलिस अधिकारी बताकर, कभी बैंक अधिकारी बनकर, तो कभी किसी सरकारी एजेंसी का नाम लेकर। यह केवल पैसों की हानि नहीं, बल्कि विश्वास, चरित्र और पहचान की भी क्षति है। जब किसी विद्यार्थी का भविष्य ठगी का शिकार बनता है या किसी परिवार की मेहनत की कमाई लुट जाती है, तो यह समाज के लिए चिंता का विषय बन जाता है।
साइबर सुरक्षा मंत्र: STOP, THINK, AND THEN TAKE ACTION
मुख्यमंत्री ने साइबर सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री मोदी का मंत्र याद दिलाया: “Stop, Think, And Then Take Action”। इसका मतलब है—रुको, सोचो और फिर कदम उठाओ। जब कोई अनजान कॉल आए, तो पहले सोचें; किसी आकर्षक लिंक पर क्लिक करने से पहले सोचें और सुनिश्चित हों कि यह सुरक्षित है। यही डिजिटल युग का संविधान है और यही सुरक्षित नागरिक बनने का संस्कार है।
पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना का संदेश
पुलिस महानिदेशक (DGP) कैलाश मकवाना ने कहा कि साइबर अपराध न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में सबसे तेजी से बढ़ता अपराध बन चुका है। आने वाले वर्षों में यह अपराध अन्य अपराधों की तुलना में अधिक बढ़ने की संभावना रखता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि साइबर अपराध केवल पैसों की हानि नहीं है, बल्कि मेहनत, ज्ञान, विश्वास और पहचान की भी हानि करता है।
कैलाश मकवाना ने कहा कि कई बार किसी की रिसर्च, डिजाइन, विचार या फोटो का बिना अनुमति उपयोग भी साइबर अपराध में आता है। इसलिए यह जरूरी है कि प्रत्येक नागरिक अपने डिजिटल डेटा और पहचान को सुरक्षित रखे, पासवर्ड और ओटीपी को साझा न करे और डिजिटल सुरक्षा को अपनी आदत में शामिल करे।
साइबर जागरूकता का उद्देश्य
डीजीपी मकवाना ने बताया कि इस साइबर जागरूकता रन का उद्देश्य केवल दौड़ना नहीं, बल्कि लोगों को यह समझाना है कि कैसे वे अपनी डिजिटल पहचान और निजी जानकारी सुरक्षित रख सकते हैं। मध्यप्रदेश पुलिस लगातार साइबर जागरूकता अभियान चला रही है।
स्कूलों, महाविद्यालयों, पंचायतों और शहरों में साइबर सुरक्षा कार्यशालाएं और सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इसका लक्ष्य यह है कि हर नागरिक समझे कि जागरूक नागरिक ही सबसे बड़ी सुरक्षा दीवार है। उन्होंने प्रतिभागियों से अपील की कि वे न केवल स्वयं साइबर अपराध के प्रति सतर्क रहें, बल्कि दूसरों को जागरूक करने और समाज को साइबर अपराध से बचाने में सक्रिय योगदान दें।
साइबर जागरूकता माह और सोशल मीडिया अभियान
अक्टूबर माह को साइबर जागरूकता माह के रूप में मनाया गया। इस महीने के दौरान प्रदेश भर में कार्यशालाएं, व्याख्यान, स्कूल और कॉलेज सत्र, और सोशल मीडिया कैंपेन चलाए गए। यही अभियान रन फॉर साइबर अवेयरनेस 2025 का हिस्सा भी था। इस रन में पुलिस अधिकारी, कर्मचारी, विद्यार्थी और स्वयंसेवी संस्थाओं के सदस्य शामिल हुए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी से अपील की कि साइबर जागरूकता को केवल आयोजन या महीने तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपनी दैनिक जीवन की आदत और संस्कार बनाएं।
सुरक्षित डिजिटल जीवन के लिए जरूरी कदम
मुख्यमंत्री ने निष्कर्ष निकाला कि डिजिटल युग में सुरक्षित रहने के लिए केवल दरवाजा बंद करना पर्याप्त नहीं, बल्कि स्क्रीन लॉक करना, पासवर्ड सुरक्षित रखना, और अनजान लिंक पर क्लिक न करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि जैसे हम अपने बच्चों को मूल्यों और संस्कार सिखाते हैं, वैसे ही साइबर सुरक्षा और डिजिटल अनुशासन भी सीखना आवश्यक है।
