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“दो दिवसीय अखिल भारतीय जैन पत्रकार सम्मेलन 2025: जयेन्द्र जैन ‘निप्पू भैया’ को समाजसेवा और जैन धरोहर संरक्षण में सम्मान”

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Published On: 28 October 2025
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भारत वर्षीय तीर्थक्षेत्र कमेटी के शास्त्रोत्तर शताब्दी वर्ष पर दो दिवसीय अखिल भारतीय जैन पत्रकार सम्मेलन सम्पन्न

नई दिल्ली: भारत वर्षीय तीर्थक्षेत्र कमेटी के शास्त्रोत्तर शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में राजधानी दिल्ली में दो दिवसीय अखिल भारतीय जैन पत्रकार सम्मेलन (25–26 अक्टूबर 2025) का भव्य आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में देशभर से जैन पत्रकार, संपादक, और समाजसेवी शामिल हुए। इस अवसर पर चंदेरी के सुप्रसिद्ध पत्रकार एवं समाजसेवी जयेन्द्र जैन ‘निप्पू भैया’ को उनके समाज सेवा और साहित्यिक योगदान के लिए विशेष सम्मान प्रदान किया गया।

इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य जैन समाज में पत्रकारिता की भूमिका, धार्मिक धरोहरों का संरक्षण और समाजसेवा के महत्व को बढ़ावा देना था। दो दिवसीय इस सम्मेलन में प्रतिभागियों को दिल्ली के ऐतिहासिक जैन तीर्थों के दर्शन करने का अवसर भी मिला, जिससे यह आयोजन आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण बन गया।


पहला दिवस: लाल मंदिर, जैन गढ़ी और मुल्तान जिनविहार के दर्शन

सम्मेलन के पहले दिन प्रतिभागियों को दिल्ली के प्रमुख जैन तीर्थस्थलों का दर्शन कराया गया। इस यात्रा का नेतृत्व तीर्थक्षेत्र कमेटी के प्रवीण जैन, श्रीमती मीनू जैन और लाल मंदिर पंचायत के मंत्री अतुल जैन ने किया।

लाल मंदिर का महत्व

लाल मंदिर, जो चांदनी चौक, दिल्ली में स्थित है, जैन धर्म की ऐतिहासिक और धार्मिक शान का प्रतीक है। यहाँ विराजमान भगवान पार्श्वनाथ जी की प्राचीन मूर्ति अपनी अलौकिक आभा और दिव्यता के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर की दीवारों पर प्राकृतिक रंगों और स्वर्ण-लेपित चित्रों से सुसज्जित चित्रकला, जैन कला के स्वर्ण युग की याद दिलाती है।

मुल्तान जिनविहार और जैन गढ़ी

इसके बाद प्रतिनिधियों ने मुल्तान जिनविहार का दर्शन किया, जहाँ विभाजन के समय मुल्तान (अब पाकिस्तान) से लायी गई प्राचीन जैन प्रतिमा प्रतिष्ठित है। यह प्रतिमा मुगल और ब्रिटिश काल में जैन धर्म के संरक्षण की महत्वपूर्ण धरोहर मानी जाती है।

प्रतिनिधिमंडल ने जैन गढ़ी क्षेत्र के प्राचीन जिनालयों का भी दर्शन किया, जहाँ हर जिनालय अपने ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के कारण जैन समाज के लिए गर्व का विषय हैं।

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दूसरा दिवस: संगोष्ठी और सम्मान समारोह

सम्मेलन का दूसरा दिन बाहुबली इंक्लेव, कड़कड़डूमा में संपन्न हुआ। इस अवसर पर परम पूज्य आचार्य श्री 108 प्रज्ञासागर जी महाराज और भट्टारक स्वतीश्री जयेन्द्र कीर्ती जी की पावन उपस्थिति ने आयोजन को आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की।

प्रमुख अतिथि और वक्ता

इस कार्यक्रम में अखिल भारतीय पत्र संपादक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदीश प्रसाद जैन (आगरा), चेयरपर्सन शैलेन्द्र जैन (अलीगढ़), महामंत्री अखिलेश बंसल (जयपुर), और जगदीश जैन (गाज़ियाबाद) सहित देशभर से लगभग 50 पत्रकार और विद्वान उपस्थित रहे।

जयेन्द्र जैन ‘निप्पू भैया’ को सम्मान

इस अवसर पर जयेन्द्र जैन ‘निप्पू भैया’ को उनके पत्रकारिता, समाजसेवा और धार्मिक धरोहरों के संरक्षण में किए गए निरंतर योगदान के लिए सम्मानित किया गया। उनके लेख और शोध कार्यों ने चंदेरी की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित किया है।

वक्ताओं ने कहा,

“जयेन्द्र जैन जैसे समाजसजवी पत्रकार समाज की आत्मा हैं, जो कलम को धर्म, संस्कृति और राष्ट्रसेवा का साधन बना देते हैं। उनके प्रयास से युवा पीढ़ी में धर्म और समाजसेवा के प्रति जागृति आई है।”


सम्मेलन की विशिष्ट विशेषताएँ

    1. धार्मिक और सांस्कृतिक संरक्षण – प्रतिभागियों ने भिमशेन गुफा, जहाँ अतिभव्य भगवान आदिनाथ भियांदांत तीर्थ विराजमान हैं, का भी दर्शन किया। यह स्थल जैन धर्म की प्राचीन और महत्वपूर्ण धरोहरों में गिना जाता है।

    2. जैन समाज की एकता – सम्मेलन ने देशभर के जैन पत्रकारों और समाजसेवियों को एक मंच पर लाकर समाज के प्रमुख विषयों पर चर्चा करने का अवसर प्रदान किया।

    3. जागरूकता और शिक्षा – संगोष्ठी में जैन समाज के वर्तमान मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ और युवा पीढ़ी को धर्म, संस्कृति और पत्रकारिता में योगदान देने के लिए प्रेरित किया गया।

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निष्कर्ष

दो दिवसीय इस सम्मेलन ने जैन समाज की सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक पहचान को और मजबूत किया। साथ ही यह साबित किया कि पत्रकारिता केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और धर्म के प्रति जागृति का एक शक्तिशाली साधन भी है।

जयेन्द्र जैन ‘निप्पू भैया’ जैसे समाजसजवी पत्रकारों के योगदान से यह स्पष्ट होता है कि सही दिशा में किए गए प्रयास समाज और धर्म दोनों के लिए लाभकारी होते हैं। इस आयोजन ने न केवल जैन समुदाय को बल्कि सम्पूर्ण समाज को धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना देने का कार्य किया।

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