वर्धमान तप ओली 2025 का सोमवार से शुभारंभ, जैन समाज मेघनगर में भक्ति और तप की गूंज
मेघनगर (झाबुआ जिला):
जैन धर्म के तप और आराधना के महापर्व वर्धमान तप ओली 2025 का शुभारंभ सोमवार को मेघनगर में धार्मिक उल्लास और श्रद्धा के साथ हुआ। स्थानीय श्री सौधर्म बृहद तप्पोगच्छीय श्वेतांबर जैन मूर्तिपूजक त्रिस्तुतिक श्रीसंघ में यह आध्यात्मिक आराधना आरंभ हुई, जिसका शुभ मुहूर्त पुण्य सम्राट गुरुदेव श्रीमद विजय जयंतसेन सुरीश्वरजी महाराज साहब के पट्टधर, धर्मभूषण गच्छाधिपति श्रीमद विजय नित्यसेन सुरीश्वरजी महाराज साहब द्वारा प्रदत्त किया गया।
इस तपोत्सव का पाया विधिवत डालकर भक्तों ने भक्ति भाव से वर्धमान ओली तप की शुरुआत की। यह ओली आराधना 20 दिनों तक चलेगी, जिसमें अनुशासन, संयम और आयम्बिल उपवास के माध्यम से साधक आत्मशुद्धि की ओर अग्रसर होंगे।
✨ खिमावत परिवार मुंबई ने लिया प्रथम लाभ
इस वर्ष की वर्धमान तप ओली का प्रथम लाभ प्रतिष्ठित दानवीर खिमावत परिवार (मुंबई) ने लिया है। परिवार की ओर से श्रीमती बसंतीदेवी किशोरमलजी खिमावत ने यह पुण्य अवसर ग्रहण किया। यह लाभ वार्षिक आयम्बिल खाते के अंतर्गत प्राप्त हुआ, जिससे मेघनगर जैन समाज में धार्मिक आनंद का वातावरण बन गया।
ज्ञान मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी रजत कावड़िया ने बताया कि इस 20 दिवसीय आराधना में साधक 1 आयम्बिल के बाद 1 उपवास, फिर 2 आयम्बिल और 1 उपवास, इस प्रकार क्रमशः 5 की लड़ी तक तप साधना करते हैं। यह आराधना आत्मसंयम, शुद्ध आहार और आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक है।
🕉️ श्री राजेन्द्र सूरी जैन ज्ञान मंदिर में जारी है तप आराधना
श्री राजेन्द्र सूरी जैन ज्ञान मंदिर, मेघनगर में प्रतिदिन आयम्बिल तप की आराधना श्रद्धापूर्वक की जा रही है। आराधक भक्तजन प्रत्येक दिन उपवास, आयम्बिल और पूजा-अर्चना में लीन होकर गुरु आज्ञा का पालन कर रहे हैं।
इस तप आराधना के दौरान जैन समाज के स्त्री-पुरुष, बालक-बालिकाएँ सभी तपस्या के इस पावन अवसर में भाग ले रहे हैं। मंदिर परिसर में प्रतिदिन धार्मिक वंदना, स्तवन और प्रवचन का आयोजन हो रहा है। समाज में वर्धमान ओली के माध्यम से संयम, सदाचार और आत्मविकास का संदेश दिया जा रहा है।
🌿 वर्धमान तप ओली का धार्मिक महत्व
जैन धर्म में वर्धमान ओली को अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। यह तप आराधना शरीर, मन और आत्मा को शुद्ध करने का माध्यम है। 20 दिनों तक चलने वाले इस तप में साधक भोजन में संयम रखते हुए केवल उकाला, बिना तले और सादा भोजन ग्रहण करते हैं।
इस आराधना से न केवल आत्मिक शांति प्राप्त होती है, बल्कि जीवन में संतुलन, धैर्य और करुणा का संचार भी होता है।
गुरुदेव श्रीमद विजय नित्यसेन सुरीश्वरजी महाराज साहब की प्रेरणा से चल रही यह आराधना जैन समाज में भक्ति और सेवा भावना का संचार कर रही है।
📿 समाज में उत्साह और भक्ति का माहौल
मेघनगर जैन समाज में वर्धमान तप ओली के शुभारंभ से श्रद्धालुजनों में अत्यंत हर्ष का वातावरण है। मंदिर में प्रतिदिन आरती, प्रवचन और सामूहिक आयम्बिल का आयोजन किया जा रहा है। कई आराधक पूरे 20 दिन का तप करने का संकल्प लेकर आराधना में जुटे हैं।
ज्ञान मंदिर ट्रस्ट की ओर से बताया गया कि आने वाले दिनों में ओली के दौरान विशेष प्रवचन, भक्ति संगीत और तप पूर्णाहुति के कार्यक्रम आयोजित होंगे।
