भोपाल में गायत्री परिवार का प्रांतीय युवा चिंतन शिविर: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिक्षा नीति 2020 में सांस्कृतिक विरासत को सराहा
भोपाल, 27 अक्टूबर 2025: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में सोमवार को आयोजित गायत्री परिवार के प्रांतीय युवा चिंतन शिविर का उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार के कुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिक्षा और संस्कृति पर जोर देते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 में हमारी सांस्कृतिक विरासत को समाहित किया गया है, जिससे युवाओं में अपनी सनातन संस्कृति के प्रति गर्व और सम्मान की भावना जाग्रत हो सके।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि “मध्यप्रदेश देश का हृदय है और जैसे हृदय शरीर के लिए महत्वपूर्ण है, वैसे ही मध्यप्रदेश भारत के लिए एक केंद्रीय भूमिका निभाता है। इसी तरह, गायत्री परिवार भी देश की सांस्कृतिक चेतना और युवा नेतृत्व के संवाहक के रूप में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।” उन्होंने यह भी कहा कि “जिओ और जीने दो का भाव केवल शब्दों तक सीमित नहीं होना चाहिए, इसे व्यवहार में उतारकर भारत ने पूरी दुनिया के सामने दिखाया है। नमस्कार की भावना और उसका महत्व भी विश्व स्तर पर देखा गया है।”
मुख्यमंत्री ने शिक्षा नीति के ऐतिहासिक पहलुओं पर चर्चा करते हुए कहा कि “देश में शिक्षा नीति दो बार लागू हुई थी – 1968 और 1986 में। इन दोनों नीतियों ने केवल बाहरी रूपांतरण किया, लेकिन अंदरूनी सामग्री और सांस्कृतिक मूल्यों को नहीं बदला। यही देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण रहा। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शिक्षा नीति 2020 में हर पहलू को समाहित किया गया है, ताकि हमारी सांस्कृतिक विरासत को सटीक रूप में युवाओं तक पहुंचाया जा सके और उन्हें अपने मूल्यों पर गर्व महसूस हो।”
सीएम डॉ. मोहन यादव ने विशेष रूप से यह बताया कि अब पाठ्यक्रम में वे सभी उदाहरण शामिल किए गए हैं जिन्हें पहले पाठ्यक्रम में शामिल करने में हिचकिचाहट होती थी। उन्होंने कहा, “यदि मित्रता का उदाहरण देना है, तो भगवान कृष्ण और सुदामा की मित्रता क्यों नहीं दिखाई जानी चाहिए? इसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। हमारे समाज में ऐसे उदाहरण हैं जो युवाओं को सिखाने योग्य हैं और शिक्षा नीति में इन्हें शामिल करना अत्यंत आवश्यक है।”
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि भगवान राम, कृष्ण और उनके अनुयायियों के जीवन प्रसंग अब शिक्षा नीति का हिस्सा हैं। इससे युवा पीढ़ी न केवल अपने धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को समझ पाएगी बल्कि जीवन में नैतिकता और चरित्र निर्माण की प्रेरणा भी प्राप्त करेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि “सनातन संस्कृति के संवाहक बनना केवल गौरव का विषय नहीं है, बल्कि यह हमारी जिम्मेदारी भी है। शिक्षा नीति 2020 ने इसे संभव बनाया है।”
गायत्री परिवार के युवा चिंतन शिविर का उद्देश्य युवाओं में आध्यात्मिक और सामाजिक चेतना को जाग्रत करना है। शिविर में विभिन्न सत्रों के माध्यम से युवाओं को आत्मविकास, नेतृत्व क्षमता, नैतिक शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी के विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने युवाओं से कहा कि “समाज सेवा और राष्ट्रीय विकास में युवाओं की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। आप सभी को अपने जीवन में मानवता, अहिंसा और सत्य के मूल्यों को अपनाना चाहिए।”
इस मौके पर देव संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि “गायत्री परिवार की यह पहल युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह चरित्र निर्माण और सांस्कृतिक मूल्यों के विकास में भी सहायक होनी चाहिए। शिविर में शामिल कार्यक्रम युवाओं को आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और नैतिक मूल्यों के प्रति संवेदनशील बनाएंगे।”
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि शिक्षा नीति 2020 का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें भारत की सांस्कृतिक धरोहर, धार्मिक सहिष्णुता, सामाजिक समरसता और आचार्याचार्य जीवन के मूल्य शामिल किए गए हैं। उन्होंने कहा कि “युवा पीढ़ी को इन मूल्यों का अनुभव कराना और उन्हें जीवन में उतारना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। गायत्री परिवार की यह पहल इन्हीं लक्ष्यों को साकार कर रही है।”
युवा चिंतन शिविर में विद्यार्थियों और युवाओं के लिए विशेष कार्यशालाएं आयोजित की गईं। इनमें ध्यान, योग, सकारात्मक सोच, नैतिक शिक्षा और नेतृत्व विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सत्र शामिल थे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि “इन कार्यशालाओं के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर, जागरूक और समाजोपयोगी नागरिक बनाने का प्रयास किया जा रहा है।”
गायत्री परिवार के प्रदेश प्रमुख ने बताया कि इस शिविर में प्रदेश के विभिन्न जिलों से युवाओं ने भाग लिया। शिविर का मुख्य उद्देश्य युवाओं को उनके जीवन में नैतिकता, सामाजिक जिम्मेदारी और आध्यात्मिक चेतना के महत्व से अवगत कराना है। उन्होंने कहा कि युवाओं में यह संदेश फैलाना जरूरी है कि वे अपने जीवन में ईमानदारी, सहिष्णुता और सेवा भाव को अपनाएं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने युवाओं से यह आग्रह किया कि वे अपने जीवन में शिक्षा के साथ-साथ संस्कृति और नैतिक मूल्यों को भी महत्व दें। उन्होंने कहा, “हमारे देश की संस्कृति और परंपराएं हमारे गौरव का हिस्सा हैं। युवाओं को इन मूल्यों के प्रति जागरूक करना और उन्हें जीवन में उतारना हमारी जिम्मेदारी है। शिक्षा नीति 2020 ने इसे संभव बनाया है, और गायत्री परिवार इस दिशा में युवाओं को मार्गदर्शन दे रहा है।”
इस शिविर के दौरान मुख्यमंत्री ने युवाओं से संवाद भी किया और उनके प्रश्नों के उत्तर दिए। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने जीवन में आध्यात्मिक और सामाजिक मूल्यों का संतुलन बनाए रखना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि “युवाओं को अपने जीवन में चरित्र, नैतिकता और संस्कृति के मूल्य अपनाने चाहिए। यही एक सशक्त और विकसित समाज की नींव है।”

