इज़रायल ने गाजा में की एयर स्ट्राइक, ट्रंप ने हमास को दी 48 घंटे की चेतावनी – मिस्र ने तुरंत भेजी अपनी टीम
मध्य पूर्व की जटिल सुरक्षा परिस्थिति फिर एक बड़े मोड़ पर आ गई है, जब गाजा पट्टी (Gaza Strip) में इज़रायल की एक हवाई कार्रवाई ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है। उसके तुरंत बाद डोनाल्ड ट्रंप ने Hamas को 48 घंटों के भीतर बंधकों के शव लौटाने का अल्टीमेटम दिया है। साथ ही, मिस्र (Egypt) ने गाजा में एक तकनीकी टीम तुरंत भेजने की घोषणा की है, जो बंधकों के शवों की पहचान और स्थान खोजने में सहायता करेगी।
इज़रायल की एयर स्ट्राइक – वजह और परिणाम
इज़रायली सेना ने शनिवार को गाजा के मध्य हिस्से में हवाई हमला किया और बताया कि इस कार्रवाई का लक्ष्य एक कथित “इस्लामिक जिहाद” सदस्य था, जिसने इज़रायली सेना पर सुनियोजित हमला करने की योजना बनाई थी। इस हमले को उस समय अंजाम दिया गया जब वर्तमान युद्धविराम समझौते के बावजूद स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई थी।
घटनास्थल पर प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि एक कार पर ड्रोन हमले के बाद आग लग गई।
यह स्ट्राइक इस बात का संकेत है कि इज़रायल ने गाजा क्षेत्र में अपनी क्षमता का उपयोग जारी रखा है, भले ही युद्धविराम प्रक्रिया चल रही हो।
ट्रंप की हमास को धमकी – 48 घंटों का अल्टीमेटम
हवाई हमले के कुछ समय बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किया कि यदि Hamas ने 7 अक्टूबर को हुए हमलों में मारे गए बंधकों के शव तुरंत नहीं लौटाए, तो मध्य पूर्व में चल रही “शांति प्रक्रिया” खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में शामिल अन्य देश भी कार्रवाई कर सकते हैं।
उनका कहना था:
“हमास को मारे गए बंधकों के शव, जिनमें दो अमेरिकी भी शामिल हैं, तुरंत लौटाने होंगे, वरना अन्य देश जो इस ‘महान शांति प्रक्रिया’ के भाग हैं, कार्रवाई करेंगे।”
उन्होंने आगे कहा कि वह आने वाले 48 घंटों तक Hamas की गतिविधियों पर नजर रखेंगे।
मिस्र की भूमिका – गाजा में भेजी टीम
ट्रंप की चेतावनी के तुरंत बाद मिस्र ने कदम उठाया। मिस्र की एक तकनीकी टीम गाजा पहुँच रही है, जिसका उद्देश्य है 13 बंधकों के शवों को खोजने और पहचानने में मदद करना। इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस अभियान को व्यक्तिगत रूप से मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि यह टीम सिर्फ शवों की पहचान और स्थान खोजने के लिए है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इज़रायल और Hamas दोनों से मिली जानकारी के आधार पर मिस्र की टीम अपना काम करेगी। खास बात यह है कि पहले इज़रायल ने इस तरह की किसी टीम को प्रवेश की अनुमति नहीं दी थी, यह कहते हुए कि “Hamas खुद शव लौटा सकता है।”
शांति प्रक्रिया पर कितना असर?
इस पूरे घटनाक्रम से संकेत मिलता है कि वर्तमान युद्धविराम को गंभीर परीक्षा का सामना है। Hamas और इज़रायल के बीच बंधकों एवं मृत बंधकों के शवों के आदान-प्रदान को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। उदाहरण के लिए, समाचार एजेंसी रायटर्स के अनुसार पिछले समझौते में 28 मृत बंधकों के शवों में से अधिकांश अभी तक लौटाए नहीं गए हैं।
इस पृष्ठभूमि में ट्रंप की धमकी और मिस्र की सक्रियता को एक नया मोड़ कहा जा सकता है। यदि बंधकों के शवों का आदान-प्रदान नहीं होता है, तो शांति प्रक्रिया में शामिल अन्य देश इससे प्रभावित हो सकते हैं और कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है।
निष्कर्ष
संक्षिप्त में, गाजा में इज़रायल की हवाई कार्रवाई, ट्रंप का Hamas को 48 घंटों का अल्टीमेटम, और मिस्र द्वारा गाजा में टीम भेजना — ये तीनों घटनाएँ एक दूसरे से जुड़ी-जुड़ी हैं। यह पूरा घटनाक्रम उस शांति प्रक्रिया की संवेदनशीलता को उजागर करता है जिसे मध्य पूर्व में स्थिरता के लिए बेहद अहम माना गया था।
यदि Hamas बंधकों के शव नहीं लौटाता है, तो समझौतों और युद्धविराम की नींव पर गहरा असर हो सकता है। वहीं, इज़रायल की कार्रवाई और मिस्र की मध्यस्थता इस जटिल स्थिति में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
