इंदौर बनेगा वैराग्य की राजधानी: गोम्मटगिरि पर आत्मजागरण का महापर्व
राजेश जैन दद्दू, इंदौर
मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर अब “वैराग्य की राजधानी” बनने जा रही है। शहर के प्रसिद्ध तीर्थ क्षेत्र गोम्मटगिरि पर 31 अक्टूबर से 2 नवम्बर 2025 तक दिगंबर जैन समाज के संतों के सान्निध्य में “विभव स्वर्ण जयंती एवं दीक्षा महोत्सव” का ऐतिहासिक तीन दिवसीय आयोजन होने जा रहा है। यह अवसर केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आत्मजागरण और वैराग्य के दीपों से जगमगाता आत्मकल्याण का महापर्व बनेगा।
आत्मजागरण पर्व का शुभारंभ: 31 अक्टूबर को घट यात्रा से
कार्यक्रम संयोजक आकाश पांड्या और धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि यह आयोजन आचार्य भगवन् 108 विभव सागर जी महामुनिराज के सान्निध्य में आयोजित होगा। तीन दिनों तक चलने वाले इस अद्वितीय पर्व की शुरुआत 31 अक्टूबर की प्रातः 6:00 बजे गांधीनगर से गोम्मटगिरि तीर्थ तक भव्य घट यात्रा से होगी। इस यात्रा में 51 मुनि-आर्यिका संघों की उपस्थिति रहेगी, जो पूरे इंदौर को भक्ति, अनुशासन और श्रद्धा के रंग में रंग देंगे।
प्रातः 8:00 बजे ध्वजारोहण एवं मंडप उद्घाटन होगा, जिससे आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होगा। दोपहर 1:00 बजे भावी दीक्षार्थियों की हल्दी-मेंहदी रस्म संपन्न होगी, जिसमें 1500 से अधिक महिलाएं, महिला परिषद् और महिला मंडल की सदस्याएं सहभागी बनेंगी। यह आयोजन समाज की एकता और श्रद्धा का जीवंत प्रतीक बनेगा।
संध्या 7:00 बजे से आयोजित सांस्कृतिक संध्या में कलाकार भक्ति, त्याग और वैराग्य के भावों को प्रस्तुत करेंगे। “रक्षाबंधन एवं दीपावली विशेष नाटिका” भक्ति और करुणा से भरा भाव-विभोर कर देने वाला दृश्य प्रस्तुत करेगी।
1 नवम्बर: गणधर विलय विधान और आचार्य विभव सागर स्वर्ण जयंती का संगम
दूसरे दिन की शुरुआत 1 नवम्बर को प्रातः 6:00 बजे 48 मंडलों पर गणधर विलय विधान से होगी। इसमें 48 समाजिक परिवार और भावी दीक्षार्थी मिलकर भक्ति-साधना करेंगे। यह विधान आत्मशुद्धि और अध्यात्म की गहराइयों में उतरने का अवसर प्रदान करेगा।
प्रातः 11:00 बजे पूर्व आहार चर्या और दोपहर 1:00 बजे विभव स्वर्ण जयंती महोत्सव का शुभारंभ होगा। इस पावन अवसर पर आचार्य भगवन् विभव सागर जी के सान्निध्य में हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहेंगे। देशभर से आए 1000 से अधिक अतिथि और 125 युवा मंडलों की भागीदारी इस दिन को ऐतिहासिक बनाएगी।
विशेष आकर्षण के रूप में 9 वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर और 200 अवॉर्ड प्राप्त जैन समाज गौरव सौरभ जैन (जयपुर) का प्रेरणादायक प्रवचन होगा, जो युवाओं में वैराग्य और आत्मजागरण की लौ प्रज्वलित करेगा।
संध्या 7:00 बजे भावी दीक्षार्थियों की भव्य विदाई शोभायात्रा निकाली जाएगी, जिसमें बैंड-बाजे, बग्गियाँ, घोड़े, डोल-ताशे और हजारों श्रद्धालु शामिल होंगे। यह वैराग्य की अनोखी “वैराग्य बरात” होगी, जो पूरे शहर में अध्यात्म का वातावरण बनाएगी।
2 नवम्बर: आत्मा के नवजीवन का शुभ क्षण
तीसरे दिन 2 नवम्बर, रविवार को गोम्मटगिरि तीर्थ, इंदौर पर आत्मा के नवजीवन का शुभ क्षण आएगा। इस दिन 10 दीक्षार्थियों का महामंगलकारी जेनेश्वरी दीक्षा समारोह संपन्न होगा।
प्रातः 4:00 बजे से केशलोंचन संस्कार प्रारंभ होगा, जो वैराग्य और त्याग की चरम अभिव्यक्ति होगी। इसके बाद प्रातः 8:00 बजे भगवान बाहुबली स्वामी का अतिशयकारी चरणाभिषेक किया जाएगा। यह अनुष्ठान श्रद्धालुओं के लिए सौभाग्य, आस्था और आत्मिक आनंद का दिव्य अनुभव प्रदान करेगा।
दोपहर 12:00 बजे से आचार्य भगवन् विभव सागर जी मुनिराज के करकमलों से 10 दीक्षार्थियों का महामंगलकारी दीक्षा संस्कार प्रारंभ होगा, जो सायं 4:00 बजे तक चलेगा। इस अवसर पर गोम्मटगिरि का प्रत्येक कोना भक्ति और वैराग्य के भावों से ओतप्रोत होगा।
संध्या 7:00 बजे 1008 दीपों से आरती का आयोजन होगा, जो सम्पूर्ण गोम्मटगिरि को प्रकाशमय कर देगा। साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से श्रद्धालु “वैराग्य की ज्योति” का अनुभव करेंगे।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुविधा
आयोजन समिति ने बताया कि 31 अक्टूबर से 2 नवम्बर तक रजिस्ट्रेशन के माध्यम से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सुबह एवं शाम की भोजन व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। गोम्मटगिरि परिसर में सुरक्षा, आवास और पार्किंग की विशेष व्यवस्था भी की गई है ताकि हर श्रद्धालु इस आध्यात्मिक उत्सव का सहज अनुभव ले सके।
वैराग्य का दीपोत्सव — आत्मा का नवजागरण
यह तीन दिवसीय आयोजन केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मा के नवजागरण का उत्सव है — जहाँ त्याग बने आनंद, भक्ति बने प्रेरणा, और वैराग्य जगमगाए दीपों की तरह।
आचार्य भगवन् विभव सागर जी का यह महोत्सव समाज को अध्यात्म, अनुशासन और आत्मकल्याण की दिशा में अग्रसर करेगा। इंदौर का गोम्मटगिरि तीर्थ आने वाले समय में भारत की वैराग्य राजधानी के रूप में प्रतिष्ठित होगा।
