दिवाली पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्र-से नाम संदेश
दिनांक: 20 अक्टूबर 2025
प्रेषक: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
प्रति: पूरे भारतवर्ष तथा विदेशों में रहने वाले भारतीय नागरिक
प्रिय भारतवासियों,
इस पावन प्रकाशोत्सव-दिवाली के अवसर पर मैं आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ। यह पर्व न केवल दीपों की जगमगाहट है, बल्कि सद्भाव, खुशी, समृद्धि और स्वदेशी के भाव को भी उजागर करता है।
1. दीपावली – उजाले का प्रतीक
दिवाली का अर्थ है ‘दियों का त्योहार’ — जहाँ हम अँधेरे पर उजाले, अज्ञान पर ज्ञान, असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की विजय का स्मरण करते हैं। यह पर्व लोगों में उमंग और उत्साह जगाता है। इस दीपोत्सव के माध्यम से हम यह संदेश ले जाते हैं कि हम मिल-जुलकर एक ऐसे समाज का निर्माण कर सकते हैं जहाँ हर व्यक्ति को सम्मान, सुरक्षा एवं उन्नति का अवसर मिले।
2. सद्भाव तथा सामाजिक समरसता
इस दिवाली पर मेरा आग्रह है कि हम सद्भाव का दीप जलाएँ — यानी सामाजिक समरसता, भाई-चारा, आपसी समझ और सहयोग। हमारा यह भारत विविधताओं में समाहित है — भाषा, धर्म, संस्कृति, भूगोल सभी में। इस विविधता में छिपी हमारी ताकत है। जब हम मिलकर आगे बढ़ेंगे, तभी हमारी खुशियों को पूर्ण आयाम मिलेगा।
हमें याद रखना है कि त्योहार केवल प्रकाश और उल्लास का नहीं, बल्कि साझा खुशियाँ और साझा जिम्मेदारियाँ का भी अवसर है। इस दिन जरूरतमंदों, वंचितों और समाज के पिछड़े वर्गों के प्रति हमें अपना हाथ बढ़ाना चाहिए।
3. समृद्धि-उन्मुख दृष्टिकोण
दिवाली का समय है — समृद्धि की कामना के लिए। लेकिन आज के भारत में समृद्धि का अर्थ सिर्फ आर्थिक वृद्धि नहीं, बल्कि सामाजिक कल्याण, सबका साथ-सबका विकास और संतुलित विकास का है। हम चाहते हैं कि हर घर में उजाला हो, हर जीवन में अवसर हो, और हर युवा को सपनों को पूरा करने का अवसर मिले।
मैं इस दिवाली पर यह संकल्प लेता हूँ कि हमारा भारत — सूचना-प्रौद्योगिकी, इनोवेशन, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ेगा। साथ ही, समृद्धि सिर्फ कुछ के लिए नहीं बल्कि सभी के लिए होगी।
4. स्वदेशी का उत्सव
इस बार की दिवाली में एक प्रमुख विषय है – स्वदेशी। अर्थात् अपनी ही देशी वस्तुओं का प्रयोग, अपने ही कारीगरों व उद्योगों को समर्थन देना। यह सिर्फ एक आर्थिक विषय नहीं, बल्कि आत्म-गौरव और आत्म-निर्भरता का विषय है।
मैं आपसे आग्रह करता हूँ: इस दिवाली पर जब आप खरीदारी करें — तो स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दें। ‘गर्व से कहो – यह स्वदेशी है!’ — यह भाव जगाएँ। ऐसा करने से हम अपने देश की अर्थव्यवस्था को बल देंगे, भारतीय कारीगर-शिल्पकारों को सम्मान देंगे और हमारी सामाजिक आत्म-निर्भरता को मजबूत करेंगे।
यह स्वदेशी अभियान हमें याद दिलाता है कि हमारी असली संपत्ति हमारा मानव-संसाधन, हमारी संस्कृति, हमारी कारीगरी और हमारी स्थानीय अर्थव्यवस्था है।
5. सुरक्षित, पर्यावरण-संबद्ध एवं संयमित उत्सव
दिवाली के उल्लास के साथ हमें यह ध्यान रखना होगा कि उत्सव सुरक्षित, संयमित और पर्यावरण-हितैषी हो। हमें पटाखों के कारण होने वाली वायु-प्रदूषण, जल-प्रदूषण तथा अप्रिय प्रभावों से सतर्क रहना होगा। दीपावली का अर्थ है प्रकाश — इसलिए हमें उसे प्रदूषण रोधी, शांतिपूर्ण और आत्म-चिंतनयुक्त बनाना है।
इसके साथ ही, हम इस अवसर पर प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करने का वचन लें। यदि हम हर वर्ष उत्सव की राह पर चलते हुए थोड़ा-थोड़ा संयम अपनाएँ, तो हम आने वाली पीढ़ियों को बेहतर वातावरण सौंप सकते हैं।
6. संदेश का सार एवं आगे की दिशा
तो इस दिवाली पर, आइए हम मिलकर करें:
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एक-दूसरे से सद्भाव का संवाद, प्रेम और अपनापन बढ़ाएँ।
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खुशियों को बाँटें — अपने परिवार, मित्रों और समाज-के-वंचितों के बीच।
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समृद्धि की दिशा में कदम बढ़ाएँ — लेकिन सामाजिक और आर्थिक दोनों तरह से।
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स्वदेशी का जश्न मनाएँ — देशी उत्पादों को हाथ दें, देश की अर्थव्यवस्था को मज़बूती दें।
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उत्सव को सुरक्षित, पर्यावरण-अनुकूल और समवेदनशील बनाएँ।
अगर हम इन चार प्रमुख शब्दों — सद्भाव, खुशी, समृद्धि और स्वदेशी — को अपने दिल-विचार-क्रियाओं में अंगीकृत करें, तो यह दिवाली सिर्फ एक पर्व नहीं बनेगी, बल्कि एक प्रेरणा-केंद्र बनेगी जो हमें नए भारत की दिशा में आगे ले जाएगी।
