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“Diwali 2025: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संबोधन — त्योहारों में समृद्धि, सुरक्षा और सुशासन सुनिश्चित करने के निर्देश”

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Published On: 19 October 2025
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— Bhopal: Madhya Pradesh Chief Minister Mohan Yadav chairs the meeting of the Narmada Valley Development Authority at Samatva Bhavan in Bhopal on Wednesday, June 25, 2025. (Photo: IANS/X/@CMMadhyaPradesh)

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संवाद-परिस्थिति एवं प्रमुख विषय

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राजधानी भोपाल में अपने कार्यालय स्थित समत्व भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के सभी जिलों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जनप्रतिनिधियों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि दिपावली व उसके बाद आने वाले त्योहारों में ‘समृद्धि, सुरक्षा और सुशासन’ तीनों बराबर-बराबर सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी प्रशासन की है।


मुख्य संदेश

  1. त्योहारों का महत्व
    उन्होंने कहा कि दिपावली जैसे प्राचीन-परम्परागत पर्व न केवल सामाजिक मेलजोल और उत्साह का अवसर होते हैं बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था, ग्राम-शहरों में उत्सव-उद्योग, क्रय-शक्तियों एवं लोक-सेवाओं को सक्रिय करने का माहौल भी तैयार करते हैं। इसे अवसर मानकर शासन को ‘साफ-सफाई, कानून-व्यवस्था, आपूर्ति-सुरक्षा’ जैसे बुनियादी पहलुओं को मुस्तैद रखना है।

  2. उपचार-प्रस्तुति-प्रगतिशीलता
    मुख्यमंत्री ने प्रशासन को निर्देश दिए कि त्योहारों के अवसर पर—

    • पुलिस-प्रशासन को पूर्व योजना बनानी चाहिए, भीड़-साधन नियंत्रित हों, ट्रैफिक व सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता हो।

    • चिकित्सा-आपातकालीन व्यवस्थाएँ सक्रिय रहें, विशेषकर ग्रामीण व दुर्गम क्षेत्रों में।

    • बाजारों व मेले-उत्सवों में मूल्य-वृद्धि, कालाबाजारी व वस्तु-आभाव को रोका जाना चाहिए।

    • सार्वजनिक स्थानों, मंदिरों-पंडालों आदि में स्वच्छता, अग्नि सुरक्षा जैसी व्यवस्थाओं पर विशेष निगरानी हो।

  3. जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों को सहयोग-प्रोत्साहन
    उन्होंने यह स्पष्ट किया कि केवल प्रशासन ही नहीं, बल्कि जन-प्रतिनिधि, ग्राम-पंचायती स्तर से लेकर नगरपालिका व निगम स्तर तक, साथ मिलकर काम करें। उन्होंने कहा कि जन-प्रतिनिधियों का सम्मान करना, उन्हें जानकारी-सहयोग देना और योजना-लाभों को “अंतिम व्यक्ति” तक पहुँचाना, शासन-प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।

  4. किसान-कुटुम्ब व आम नागरिकों के लिए राहत-घोषणाएँ
    संबोधन में मुख्यमंत्री ने किसानों को आश्वस्त किया कि “दिपावली मनाने के लिए राज्य सरकार ओर हमारी योजनाएँ पूरी तरह से तैयार हैं — किसी को धन-कमी की चिंता नहीं करनी चाहिए।” उदाहरणस्वरूप, उन्होंने प्राकृतिक आपदा-प्रभावित किसानों को राहत राशि तत्काल हस्तांतरित करने, गेहूँ की बेहतर खरीद-दर सुनिश्चित करने जैसे पहल का उल्लेख किया। 
    इसके अतिरिक्त महिलाओं-लड़कियों के लिए “लाडली बहना” जैसी सामाजिक योजनाओं का उल्लेख भी हुआ था, जिसमें त्योहारी अवसरों पर अतिरिक्त सहायता का आश्वासन दिया गया है।

  5. सतत विकास व त्योहारी अर्थव्यवस्था
    उन्होंने कहा कि बाजार-उत्सव को सिर्फ खरीद-फरोख्त के रूप में नहीं बल्कि ग्रामीण-शहरी अर्थव्यवस्था के संवर्धन के अवसर के रूप में देखना चाहिए। छोटे-उद्यम, स्वयं-सहायता समूह (SHG), हस्तशिल्प व स्थानीय उत्पादों को त्योहारी सीज़न में बढ़ावा देना चाहिए ताकि “स्थानीय अर्थव्यवस्था” को बल मिले। उदाहरण के तौर पर उन्होंने “स्वदेशी मेले” व स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन देने की बात कही है।

  6. त्योहार पूर्व तैयारियों का रोडमैप
    उन्होंने अधिकारियों को याद दिलाया कि इन तैयारियों में शामिल होना चाहिए —

    • जिला-स्तर पर सुरक्षा-मंच तैयार किए जाएँ: पुलिस, होमगार्ड, अग्नि सेवा-सहायता आदि।

    • ट्रैफिक व शहरी भीड़-प्रबंधन योजना समय से पहले तैयार हो।

    • धार्मिक-स्थलों, मण्डप, पंडाल आदि में सजावट-प्रकाश व अग्नि-सुरक्षा मानदंड पूरे हों।

    • आपूर्ति-शृंखला: बिजली-पानी-सफाई-बाजार व सार्वजनिक परिवहन की निर्बाधता सुनिश्चित हो।

    • मीडिया-जनसंपर्क: जनहित-सूचनाएँ समय-समय पर जारी हों, नागरिकों को जागरूक किया जाए कि वे सुरक्षित, संयमित व सामाजिक समरसता के साथ पर्व मनाएँ।


प्रशासनिक निर्देश एवं प्रतिबद्धता

  • मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टर व पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया कि वे अपने जिले में “त्योहारी संचालन कक्ष” स्थापित करें, जहाँ 24×7 निगरानी-समन्वय हो।

  • अधिकारियों को कहा गया कि वे “पुण्य-दिवसों” जैसे दिपावली, भाईदूज आदि के बाद सार्वजनिक सुविधाओं-प्रशासनिक रिस्पॉन्स की समीक्षा करें।

  • उन्होंने कहा कि “सुशासन-पारदर्शिता” त्योहारों के माहौल में और भी महत्वपूर्ण है — योजनाएँ समय से पहुँचें, शिकायत-निवारण त्वरित हो।

  • यह भी कहा गया कि हर जिले में “त्योहारी सांस्कृतिक कार्यक्रम” हों, जिसमें स्थानीय संस्कृति-परंपरा को शामिल किया जाए, पर व्यवस्था ऐसी हो कि उत्सव-उन्माद नियंत्रण से बाहर न जाए।


संदेश का सामाजिक-सांस्कृतिक आयाम

मुख्यमंत्री ने यह महत्वपूर्ण बिंदु उठाया कि त्योहार सिर्फ आनंद-भोग का मामला नहीं है — यह सामाजिक समरसता, पारिवारिक एकता, ग्रामीण-शहरी सम्बन्धों की मरम्मत व पुनर्स्थापना का भी अवसर है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष की दिपावली “सुरक्षित-समर्थ-सक्षम” होनी चाहिए जहाँ हर नागरिक को खुशी मिले, लेकिन इसके साथ सामाजिक जिम्मेदारी, पर्यावरण-सुरक्षा और शांति-व्यवस्था भी बनी रहे।


निष्कर्ष

डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में सिर्फ शुभकामनाएँ नहीं दीं, बल्कि जिम्मेदारी-भरा त्यौहार-परिसर बनाने का रोडमैप पेश किया है। दिपावली जैसे त्यौहारों को आनंद-वर्धक बनाना तो है ही, साथ ही यह प्रशासन-समाज के लिए अवसर है– बेहतर सेवा, सतर्कता, सहभागिता और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त करने का। इस दृष्टि से यह संदेश एक आयोजन-निर्देश से कहीं ऊपर है: यह एक समाज-शासन-संस्कृति त्रैकूट का आह्वान है।

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