21-25 अक्टूबर ऑनलाइन पेंटिंग प्रतियोगिता: ब्राह्मण समाज नागदा का दीपावली-विशेष आयोजन
नागदा। दीपावली के पावन अवसर पर ब्राह्मण समाज नागदा द्वारा संचालित “युवा संस्कार परिवार” ने नगर के नौनिहालों के लिए एक विशिष्ट ऑनलाइन पेंटिंग प्रतियोगिता आयोजित की है। इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य बच्चों में स्वदेशी अपनाने, स्थानीय उत्पादों के उपयोग तथा आत्मनिर्भरता और राष्ट्र निर्माण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
प्रतियोगिता का विशेष संदेश
इस वर्ष की प्रतियोगिता का थीम है –
“स्वदेशी के रंगों से सजे सपनों में, झलकेगा आत्मनिर्भर — विकसित भारत”
यह थीम बच्चों को प्रेरित करती है कि वे अपनी पेंटिंग के माध्यम से स्वदेशी विचारों, आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना और विकसित भारत के सफर को रंगों में बयां करें।
प्रतियोगिता विवरण
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आयु वर्कशॉप अनुसार दो वर्ग: 6 से 15 वर्ष तक के बच्चे समूह 1 (6-10 वर्ष) एवं समूह 2 (11-15 वर्ष) में भाग ले सकते हैं।
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विषय: स्वदेशी, आत्मनिर्भरता एवं विकसित भारत से संबंधित रचनात्मक अभिव्यक्ति।
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प्रवेश तिथि: 21 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक।
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प्रविष्टि पद्धति: प्रतियोगी अपनी पेंटिंग A4 शीत पर तैयार करें और उस पेंटिंग की फोटो लेकर दिए गए व्हाट्सएप नंबर 98264 11331 पर भेजें। पेंटिंग के साथ आधार कार्ड की कॉपी भी संलग्न करनी होगी।
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ई-सर्टिफिकेट: सभी प्रतिभागियों को प्रतियोगिता में शामिल होने पर प्रमाणित ई-सर्टिफिकेट प्रदान किया जाएगा।
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पुरस्कार वितरण: विजेताओं को युवा संस्कार परिवार एवं ब्राह्मण समाज नागदा द्वारा आयोजित अन्नकूट एवं दीपावली मिलन समारोह में सम्मानित किया जाएगा। प्रथम, द्वितीय, तृतीय पुरस्कार और प्रोत्साहन पुरस्कार सहित अनेक आकर्षक पुरस्कार रखे गए हैं।
आयोजन और सहभागिता की अपील
इस ऑनलाइन पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन ब्राह्मण समाज नागदा के युवा संस्कार परिवार द्वारा किया जा रहा है। कार्यक्रम संयोजक निलेश मेहता एवं मंच सदस्यों ने विशेष रूप से नगर-वासी समस्त बच्चों और उनके अभिभावकों से अनुरोध किया है कि अधिक-से-अधिक संख्या में भाग लेकर इस पावन अवसर को सफल बनाएं।
“आओ इस दीपावली पर स्वदेशी का दीप जलाएं, स्थानीय को अपनाएं और आत्मनिर्भर भारत का स्वप्न मिलकर सजाएं।” — संयोजक निलेश मेहता।
स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और विकसित भारत – क्यों मायने रखते हैं?
आज के वैश्विक परिदृश्य में ‘स्वदेशी’ अर्थात घरेलू उत्पाद, ‘आत्मनिर्भरता’ अर्थात अपनी चक्री प्रक्रिया, तथा ‘विकसित भारत’ अर्थात भारतीय समाज-आर्थिक उन्नति — यह तीनों विषय न सिर्फ प्रतीकात्मक हैं, बल्कि वास्तव में रोजमर्रा की ज़िंदगी से जुड़े हुए महत्वपूर्ण मापदंड हैं।
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स्वदेशी अपनाना = हमारी आर्थिक शक्ति का आधार मजबूत करना।
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आत्मनिर्भरता बढ़ाना = हमारी सामाजिक स्वावलंबन की दिशा।
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विकसित भारत बनाना = समग्र समृद्धि, शिक्षा-स्वास्थ्य, नवोन्मेष और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बढ़त।
इस प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों को इन विचारों को रचनात्मक रूप से समझने, व्यक्त करने और सामाजिक बोध विकसित करने का अवसर मिलता है।
प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए कुछ सुझाव
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पेंटिंग तैयार करते समय थीम “स्वदेशी – आत्मनिर्भर – विकसित भारत” को ध्यान में रखें। जैसे, स्थानीय उत्पादन, हस्तशिल्प, तकनीकी नवाचार, बच्चों की कल्पना आदि को चित्रित किया जा सकता है।
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रंगों का चयन विचार-उन्मुख करें: उदाहरण के लिए तिरंगे की रंगीतता, भारत की विविध संस्कृति, स्वदेशी उद्योगों का प्रतीक आदि।
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पेंटिंग पर अपना नाम, उम्र-वर्ग, विद्यालय, साथ ही व्हाट्सएप नंबर एवं अधिकार-अभिभावक का नाम लिखना न भूलें।
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फोटो शिकायती अच्छी क्वालिटी में हो ताकि पेंटिंग के सारे तत्व स्पष्ट दिखें। प्रकाश पर्याप्त होना चाहिए।
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आधार कार्ड की कॉपी संलग्न करना अनिवार्य है — नामांकन तभी मान्य होगा।
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समय-सीमा (21-25 अक्टूबर) के भीतर भेजें। देर भेजे गए पेंटिंग स्वीकार नहीं हो सकती।
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ई-सर्टिफिकेट और पुरस्कार वितरण की प्रक्रिया को ध्यान से पढ़ें और अपना व्हाट्सएप नंबर तथा ई-मेल सही अंकित करें।
क्यों यह प्रतियोगिता विशेष है?
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यह सिर्फ एक पेंटिंग प्रतियोगिता नहीं; यह एक शिक्षा-वर्धक मुहिम है, जहां बच्चों को सिर्फ रंग और कागज नहीं, बल्कि देश-भक्ति, स्वावलंबन और समुदाय-जागरूकता से जुड़ने का अवसर मिलता है।
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ऑनलाइन माध्यम से आयोजन होने के कारण किसी भी स्थान से जुळना आसान है।
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ई-सर्टिफिकेट प्राप्ति से बच्चों के आगे बढ़ने में प्रोत्साहन मिलेगा।
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पुरस्कार और सम्मान समारोह द्वारा बच्चों के प्रयासों को सार्वजनिक रूप से मान्यता मिलती है — जो आत्मविश्वास बढ़ाता है।
आयोजन की पृष्ठभूमि
नगर के स्थानीय सामाजिक संगठन ब्राह्मण समाज नागदा ने, अपने “युवा संस्कार परिवार” शाखा के माध्यम से, हर वर्ष दीपावली के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए हैं। इस वर्ष उन्होंने बच्चों को शामिल करते हुए ऑनलाइन पेंटिंग प्रतियोगिता का रूप लेकर आए हैं। यह कदम समाज-विद्यालय-परिवार को एक साथ लाकर नया उत्साह भरने वाला है।
इस तरह के आयोजन बच्चों में सांस्कृतिक चेतना, कलात्मक अभिव्यक्ति एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने का प्रेरक माध्यम बनते हैं।
निष्कर्ष
यदि आप या आपके जिले/विद्यालय में 6-15 वर्ष के बच्चे हैं — तो यह सुनहरा अवसर हाथ से न जाए। अपने रंगों में स्वदेशी की प्रेरणा, आत्मनिर्भर भारत की आशा और विकसित भारत की आकांक्षा को उकेरिए। अपनी पेंटिंग 21-25 अक्टूबर के भीतर तैयार करें, व्हाट्सएप नंबर 98264 11331 पर भेजें, आधार की कॉपी संलग्न करें और इस दीपावली अनुभव को यादगार बनाएं।
“स्वदेशी के रंगों से सजे सपनों में, झलकेगा आत्मनिर्भर — विकसित भारत” … चलो मिलकर इस दीपावली पर अपने सपनों को रंग दें, देश को स्वावलंबी बनाएं और अपना-अपना योगदान दें।
प्रश्न या सहायता के लिए आयोजक से संपर्क करें – ब्राह्मण समाज नागदा, युवा संस्कार परिवार।
