Indore में लोकायुक्त जांच: भदौरिया के बेटे-बेटी ने काली कमाई से बनाया साम्राज्य, संपत्ति और बैंक खातों की मिली जानकारी
इंदौर, अक्टूबर 2025: लोकायुक्त पुलिस ने इंदौर में निलंबित आबकारी अधिकारी धर्मेंद्र भदौरिया और उनके परिवार के खिलाफ चल रही जांच के तहत दूसरे दिन भी छापेमारी जारी रखी। जांच में खुलासा हुआ है कि भदौरिया के बेटे सूर्यांश और बेटी ने भी अपने पिता की तरह काली कमाई से बड़ा आर्थिक साम्राज्य खड़ा किया था। इस कार्रवाई के तहत लोकायुक्त ने बैंक खातों और संपत्ति की पूरी जानकारी जुटाई है।
भदौरिया परिवार का काला धन और निवेश
लोकायुक्त की टीम ने पाया कि भदौरिया के बेटे सूर्यांश ने फिल्म निर्माण और विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियों में अवैध कमाई का इस्तेमाल किया। इसके अलावा सूर्यांश ने एक साझेदार के साथ मिलकर इंदौर में करोड़ों रुपये का निवेश कर जिम खोला। वहीं, बेटी ने भी काली कमाई को व्यवस्थित तरीके से निवेश किया। वह एक कंपनी की साझेदार थी, जिसमें करोड़ों रुपये की अवैध धनराशि का निवेश किया गया।
साथ ही, एक टाउनशिप के निर्माण का काम भी बेटी की कंपनी देख रही थी। इस मामले में यह खुलासा हुआ कि परिवार ने अपने पिता की भ्रष्ट गतिविधियों का साथ देने के बजाय, खुद काले धन का उपयोग कर अपने व्यवसाय और संपत्ति का नेटवर्क बनाया।
बैंक खाते और लॉकर की जांच
लोकायुक्त पुलिस ने भदौरिया और उनके परिवार के बैंक खातों का पूरा ब्यौरा जुटाया। जांच के अनुसार, भदौरिया और उनके परिवार के खातों में कुल एक करोड़ 26 लाख रुपये जमा हैं। इसके अलावा, 20 से ज्यादा बीमा और अन्य पॉलिसियां भी जांच में मिली हैं।
जांच के दौरान यह भी पता चला कि भदौरिया की पत्नी के नाम बैंक ऑफ बड़ौदा में एक लॉकर मौजूद है। कुल मिलाकर, भदौरिया और उनके परिवार के नाम पर चार लॉकर विभिन्न बैंकों में हैं। लोकायुक्त ने इन लॉकरों को फ्रीज करवा दिया है और उन्हें भदौरिया तथा उनके परिवार की मौजूदगी में खोला जाएगा।
संपत्ति का खुलासा
जांच में यह भी सामने आया कि भदौरिया के बेटे सूर्यांश की एक रेस्टोरेंट में भी साझेदारी है। इस रेस्टोरेंट में सूर्यांश ने भी निवेश किया है। अब तक मिली जानकारी के अनुसार, भदौरिया के पास कुल 20 करोड़ रुपये की संपत्ति है। जबकि उनके पूरे सेवाकाल की कुल तनख्वाह लगभग दो करोड़ रुपये थी।
इतनी बड़ी काली कमाई का खुलासा होने के बाद, संभावना है कि ईडी (एन्सिक्लोपीडिक डिपार्टमेंट) भी इस मामले की जांच शुरू कर सकता है।
लोकायुक्त की कार्रवाई और भविष्य की संभावनाएँ
लोकायुक्त की टीम ने छापेमारी के दौरान दस्तावेजों की जांच कर यह पता लगाया कि भदौरिया और उनके परिवार के साथ जुड़े अन्य लोग भी अवैध कमाई में शामिल थे। टीम अब इन लिंक का पता लगाने में लगी है।
जांच से यह साफ हुआ कि भदौरिया परिवार ने अपने व्यवसाय और संपत्ति को काले धन से विकसित किया। इसके तहत कंपनियों में निवेश, रेस्टोरेंट, जिम, टाउनशिप निर्माण और बीमा पॉलिसियों जैसी विभिन्न गतिविधियों में काले धन का इस्तेमाल हुआ।
भदौरिया की करियर हिस्ट्री और पोस्टिंग
धर्मेंद्र भदौरिया ने अपने सेवाकाल में धार, झाबुआ और आलीराजपुर में पोस्टिंग पाई थी। इन जगहों पर उन्होंने अवैध शराब के सिंडिकेट से जुड़ाव के आरोपों के कारण कई विवादों का सामना किया। उनके बेटे-बेटी ने भी अपने पिता की तरह अवैध कमाई को बढ़ावा देने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
मीडिया और नागरिक प्रतिक्रिया
भदौरिया परिवार के खिलाफ यह छापेमारी और जांच समाचार मीडिया में तेजी से ट्रेंड कर रही है। स्थानीय नागरिक इस कार्रवाई को सकारात्मक मान रहे हैं, क्योंकि इससे भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत संदेश जाएगा।
इंदौर में इस मामले की रिपोर्टिंग के दौरान मीडिया ने यह भी रेखांकित किया कि लोकायुक्त की कार्रवाई ने अवैध संपत्ति और काले धन के लेन-देन को उजागर किया है। इस मामले में आगे की कार्रवाई के लिए ईडी और अन्य वित्तीय जांच एजेंसियों की भूमिका अहम होगी।
निष्कर्ष
लोकायुक्त की छापेमारी और भदौरिया परिवार की संपत्ति का खुलासा यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार सिर्फ सरकारी तंत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार के अन्य सदस्य भी इसका लाभ उठा सकते हैं। इंदौर में इस मामले की जांच का अगला चरण यह सुनिश्चित करेगा कि काले धन का दायरा पूरी तरह सामने आए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
भदौरिया और उनके परिवार के खिलाफ लोकायुक्त की कार्रवाई से यह संदेश जाता है कि भ्रष्टाचार पर नजर रखी जा रही है और कोई भी व्यक्ति अवैध कमाई के जरिए संपत्ति नहीं बना सकता।

