उज्जैन महाकाल मंदिर में VR कंपनी पर धोखाधड़ी का आरोप, पुजारी बनकर श्रद्धालुओं को ठगने का मामला
उज्जैन, मध्यप्रदेश – महाकालेश्वर मंदिर में VR (वर्चुअल रियलिटी) कंपनी पर गंभीर आरोप लगे हैं। स्थानीय तीर्थ पुरोहितों और पुजारियों का कहना है कि यह कंपनी मंदिर परिसर में संचालित होकर श्रद्धालुओं के साथ धोखाधड़ी कर रही है। कंपनी अपने कर्मचारियों को पुजारी का वेश दिलाकर भस्म आरती दर्शन, कुंडली मिलान और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के नाम पर 150 रुपये तक लेकर लोगों को भ्रमित कर रही है। इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय पुरोहित समिति ने कलेक्टर और कमिश्नर को ज्ञापन सौंपकर जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
VR कंपनी के खिलाफ आरोप
स्थानीय रामघाट तीर्थ पुरोहित सभा अवंतिकापुरी के सदस्यों का कहना है कि VR कंपनी ऑनलाइन विज्ञापन और प्रलोभन के जरिए श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है। यह कंपनी महाकाल मंदिर और अन्य पवित्र स्थलों के नाम का गलत उपयोग कर रही है। अधिकृत पंडितों और पुजारियों की जानकारी के बिना, यह कंपनी श्रद्धालुओं से पैसे लेकर अनुष्ठानों का झांसा देती है।
उदाहरण के तौर पर, VR कंपनी के कर्मचारी श्रद्धालुओं को यह कहते हैं कि उनके लिए विशेष पूजा और कुंडली मिलान कराया जाएगा, जिसके लिए 50 रुपये जमा करने होंगे। यदि सेवा से संतुष्टि न हुई, तो पैसे वापस करने का वादा भी किया जाता है। हालांकि, यह केवल प्रलोभन और धोखाधड़ी का तरीका है।
स्थानीय पुजारियों की छवि धूमिल
पंडितों और तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि इस VR कंपनी के प्रलोभन से मंदिर और स्थानीय पुजारियों की छवि धूमिल हो रही है। श्रद्धालु वास्तविक पुजारियों की बजाय कंपनी के कर्मचारियों को ही पुजारी मानकर अनुष्ठान कराने के लिए पैसे दे रहे हैं। इस कारण से परंपरागत और अधिकृत पुजारियों के काम में बाधा उत्पन्न हो रही है।
कंपनी के कर्मचारी पुजारी बनकर घूम रहे
स्थानीय पुरोहितों ने कहा कि VR कंपनी के कर्मचारी पीले कुर्ते पहनकर और खुद को पंडित बताकर श्रद्धालुओं के बीच घूम रहे हैं। ये कर्मचारी मंदिर परिसर में भस्म आरती, पूजा-अर्चना और धर्मशाला लॉज बुकिंग जैसी सेवाओं का झांसा देकर लोगों को ठग रहे हैं।
पंडित गौरव उपाध्याय ने बताया कि “महाकाल दर्शन करने आए श्रद्धालुओं की कुंडली का विश्लेषण करने का झांसा देकर कंपनी बड़ी रकम वसूल रही है। मंदिर परिसर में कंपनी का सेटअप होने के कारण श्रद्धालु उन्हें अधिकृत पुजारी मान बैठते हैं। यह पूरी गतिविधि स्थानीय पुजारियों और मंदिर की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा रही है।”
पुरोहित समिति ने उठाई आवाज
श्री रामघाट तीर्थपुरोहित अवंतिकापुरी और अन्य स्थानीय पुरोहितों ने अ.भा. ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष पंडित सुरेंद्र चतुर्वेर्दी के नेतृत्व में उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह और संभाग आयुक्त आशीष सिंह को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में VR कंपनी और उसके कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।
पुरोहितों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने देशभर के सनातनी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे ऑनलाइन प्रलोभन में न आएं और केवल अधिकृत स्थानीय पुजारियों के माध्यम से ही अनुष्ठान करवाएं।
VR कंपनी की धोखाधड़ी के तरीके
स्थानीय तीर्थ पुरोहितों ने VR कंपनी के धोखाधड़ी के तरीकों का खुलासा किया। कंपनी सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से पूजा-अर्चना का झांसा देती है।
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कुंडली मिलान और पूजन का झांसा – श्रद्धालुओं को कहा जाता है कि उनके लिए विशेष अनुष्ठान और कुंडली मिलान किया जाएगा, इसके लिए राशि जमा करनी होती है।
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भस्म आरती और दर्शन का प्रलोभन – मंदिर परिसर में भस्म आरती दर्शन कराने का दावा करके अधिक राशि वसूल की जाती है।
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धर्मशाला लॉज बुकिंग का झूठा प्रलोभन – यात्रियों को मंदिर की धर्मशालाओं में रुकने का लालच देकर ठगी की जाती है।
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कंपनी कर्मचारी पुजारी बनकर कार्य करते हैं – ये कर्मचारी पीले कुर्ते पहनकर और खुद को पंडित बताकर श्रद्धालुओं को भ्रमित करते हैं।
स्थानीय पुरोहितों की अपील
रामघाट तीर्थपुरोहितों ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे किसी भी ऑनलाइन पूजा या VR कंपनी के झांसे में न आएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि:
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केवल अधिकृत स्थानीय पुजारी और पंडितों के माध्यम से ही पूजा करवाएं।
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किसी भी अनधिकृत कंपनी द्वारा दी गई सेवाओं पर विश्वास न करें।
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मंदिर समिति और स्थानीय तीर्थ पुरोहितों की अनुमति के बिना किसी अनुष्ठान में भाग न लें।
कानून और कार्रवाई की मांग
स्थानीय पुरोहितों का कहना है कि VR कंपनी के खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। यह कंपनी न केवल बिना अनुमति के अनुष्ठान कर रही है, बल्कि मंदिर परिसर में भस्म आरती और अन्य धार्मिक गतिविधियों के नाम पर बड़े स्तर पर ठगी भी कर रही है।
तीर्थपुरोहितों ने कहा, “यदि VR कंपनी के इस प्रकार के कामों को रोकने के लिए सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो स्थानीय पुजारी और तीर्थ पुरोहित मजबूर होकर आंदोलन करेंगे। यह केवल धार्मिक आस्था का मामला नहीं, बल्कि स्थानीय पुजारियों की प्रतिष्ठा और विश्वास का मामला भी है।”
निष्कर्ष
उज्जैन महाकाल मंदिर में VR कंपनी द्वारा किए जा रहे धोखाधड़ी के आरोप गंभीर हैं। इस घटना ने स्थानीय पुजारियों और तीर्थ पुरोहितों की प्रतिष्ठा को प्रभावित किया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और मंदिर की पारंपरिक धार्मिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन को तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है।
स्थानीय पुरोहितों की चेतावनी स्पष्ट है – समय रहते कार्रवाई न हुई तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। इस मामले में VR कंपनी के कर्मचारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई और अनधिकृत गतिविधियों की पूरी जांच अनिवार्य है।

