🚦 मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बोले — “चाहे जितनी जल्दी हो, सड़क सुरक्षा नियमों का पालन अनिवार्य है”
भोपाल में राज्य स्तरीय कार्यशाला में किया “संजय” एप का शुभारंभ, आईआईटी मद्रास के साथ दो एमओयू हस्ताक्षरित
भोपाल, 15 अक्टूबर 2025 — मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि “जीवन अनमोल है, और सड़क सुरक्षा कोई विकल्प नहीं बल्कि कर्तव्य है।” उन्होंने नागरिकों से अपील की कि चाहे कितनी भी जल्दी क्यों न हो, सड़क पर नियमों का पालन अवश्य करें। उन्होंने कहा कि “दुनिया का कोई भी काम आपकी जान से बड़ा नहीं होता। हेलमेट और सीट बेल्ट पहनना केवल नियम नहीं, बल्कि जीवन रक्षा का उपाय है।”
मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, भोपाल में आयोजित एक दिवसीय राज्य स्तरीय सड़क सुरक्षा कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस अवसर पर सड़क सुरक्षा के आधुनिक उपायों पर आधारित एडवांस एप्लीकेशन “संजय” का शुभारंभ किया। साथ ही आईआईटी मद्रास और सेव लाइफ फाउंडेशन के साथ दो महत्वपूर्ण एमओयू (MOU) पर हस्ताक्षर कर “डीडीएचआई” और सड़क सुरक्षा प्रबंधन को नई दिशा दी।
🚘 “हम सुधरेंगे तो जग सुधरेगा” — मुख्यमंत्री डॉ. यादव
कार्यशाला में मुख्यमंत्री ने कहा कि एक अच्छे चालक की असली पहचान उसकी जिम्मेदारी और संवेदनशीलता में होती है। उन्होंने कहा कि “सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करना केवल कानून का पालन नहीं, बल्कि एक सच्चे नागरिक की पहचान है।”
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि समाज में दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सामूहिक सजगता और जनजागरूकता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सरकार सड़क सुरक्षा के लिए सभी संसाधन उपलब्ध कराएगी, लेकिन वाहन का हैंडल और ब्रेक तो नागरिकों के ही हाथ में हैं।
उन्होंने जोर दिया कि नागरिकों को यह समझना चाहिए कि तेज रफ्तार में गाड़ी चलाना हीरो बनना नहीं, बल्कि जोखिम उठाना है। असली हीरो वह है जो नियमों का पालन करता है और दूसरों की सुरक्षा का ध्यान रखता है।
📱 “संजय” एप: सड़क सुरक्षा के डिजिटल युग की नई शुरुआत
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बटन दबाकर “संजय” ऐप लॉन्च किया — एक एडवांस्ड डिजिटल एप्लीकेशन जो सड़क सुरक्षा प्रबंधन, रिपोर्टिंग, और रियल-टाइम ट्रैफिक अलर्ट से जुड़ी सुविधाएं प्रदान करेगा।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने आईआईटी मद्रास द्वारा तैयार ‘सड़क सुरक्षा शिक्षा प्रणाली’ पुस्तक और ‘रोड सेफ्टी रिपोर्ट’ का भी विमोचन किया।
🛣️ मध्यप्रदेश में सड़क नेटवर्क और सुरक्षा नवाचार
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में करीब 9,000 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग और 11,000 किमी राज्य राजमार्ग का मजबूत नेटवर्क है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य इन सड़कों को “सुरक्षित और स्मार्ट कॉरिडोर” में बदलना है।
उन्होंने कहा, “हम सड़क सुरक्षा प्रबंधन और दुर्घटनाओं की रोकथाम के मामले में देश में पांचवें स्थान पर हैं। जल्द ही मध्यप्रदेश को नंबर वन राज्य बनाएंगे।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्यशाला से निकले सुझाव “सड़क सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक धरोहर साबित होंगे।”
🔰 लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह बोले — “सड़क सुरक्षा माइंडसेट है, केवल कानून नहीं”
लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने कहा कि सड़कें किसी भी राज्य के विकास की रीढ़ हैं। जैसे-जैसे सड़कों का आधुनिकीकरण हो रहा है, चुनौतियाँ भी बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल चालान या दंड का विषय नहीं बल्कि मानसिकता (Mindset) का विषय है।
उन्होंने बताया कि लोक निर्माण विभाग ने “लोकपथ ऐप” विकसित किया है, जिसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति सड़क क्षति या दुर्घटना की सूचना तत्काल साझा कर सकता है। इस ऐप में ब्लैक स्पॉट अलर्ट सिस्टम, पेट्रोल पंप, रिपेयर स्टेशन और अन्य आवश्यक सुविधाओं की जानकारी भी उपलब्ध है।
राकेश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में विभाग का लक्ष्य “दुर्घटना-मुक्त मध्यप्रदेश” का निर्माण है।
🧠 तकनीक और जागरूकता से बनेगा सुरक्षित यातायात तंत्र — मुख्य सचिव अनुराग जैन
मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने कहा कि देश में 53% सड़क दुर्घटनाएँ दोपहिया वाहनों से जुड़ी हैं। यदि सभी लोग हेलमेट का सही उपयोग करें, तो लगभग 60% जानें बचाई जा सकती हैं।
उन्होंने बताया कि भारत सरकार एक नया इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम लागू कर रही है, जिसके तहत सड़क दुर्घटना की सूचना तुरंत अस्पताल तक पहुँचेगी और पीड़ित का पहले 7 दिनों का इलाज ₹1.5 लाख तक निःशुल्क होगा।
मुख्य सचिव ने कहा कि सड़क सुरक्षा के पाँच स्तंभ — इंजीनियरिंग, एनफोर्समेंट, एजुकेशन, इमरजेंसी रिस्पॉन्स और इंश्योरेंस — पर एकसाथ कार्य करना आवश्यक है।
🧩 आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर डॉ. वेंकटेश बालासुब्रमण्यम के सुझाव
आईआईटी मद्रास के प्रो. (डॉ.) वेंकटेश बालासुब्रमण्यम ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल तकनीकी नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है।
उन्होंने बताया कि लगभग 93% दुर्घटनाएँ मानवीय त्रुटि के कारण होती हैं और 3% सड़क डिज़ाइन या संकेतों की कमी से।
उन्होंने सटीक डेटा संग्रहण, विभागीय समन्वय और ब्लैक स्पॉट की पहचान को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
🛑 “हर मोड़ को सुरक्षित बनाना” — प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह
लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव श्री सुखवीर सिंह ने बताया कि प्रदेश में अब तक 1041 ब्लैक स्पॉट्स की पहचान की गई है। इनमें से लघु अवधि के सुधार कार्य पूर्ण हो चुके हैं, जबकि दीर्घकालिक कार्य 2027 तक PWD और 2028 तक एमपीआरडीसी द्वारा पूरे किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि “हर मोड़ को सुरक्षित बनाना” इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य है और मध्यप्रदेश सड़क सुरक्षा में मॉडल स्टेट बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
📊 सड़क सुरक्षा प्रदर्शनी और वर्चुअल सहभागिता
कार्यशाला की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने सड़क सुरक्षा से जुड़े आधुनिक उपकरणों और तकनीकी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस आयोजन में लोक निर्माण, परिवहन, यातायात, नगरीय प्रशासन, स्वास्थ्य विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
राज्य के सभी जिलों के कलेक्टर्स, पुलिस अधीक्षक, जिला सड़क सुरक्षा समितियाँ, जनप्रतिनिधि और लगभग 3,000 प्रतिभागियों ने कार्यशाला में वर्चुअल रूप से भाग लिया।
🌟 मुख्यमंत्री की अपील — “सड़क सुरक्षा को आदत नहीं, संस्कृति बनाएं”
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अंत में कहा —
“हम सड़कें सुधार सकते हैं, हेलमेट बाँट सकते हैं, लेकिन जिम्मेदार चालक बनना हर नागरिक की अपनी जिम्मेदारी है। नियमों का पालन ही सच्ची देशभक्ति है।”
उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा को “एक आदत नहीं, बल्कि एक संस्कृति” बनाना होगा। सामूहिक जागरूकता और नागरिक जिम्मेदारी से ही दुर्घटना-मुक्त मध्यप्रदेश का सपना साकार होगा।


