नरक चतुर्दशी 2025: चंबल तट पर पितरों के मोक्ष हेतु दीपयज्ञ, जलांजलि, श्राद्ध और यमदीप दान का भव्य आयोजन — 19 अक्टूबर ब्रह्ममुहूर्त में
नागदा (मध्यप्रदेश)।
दीपावली पर्व की पवित्र बेला में आने वाली नरक चतुर्दशी (यम चतुर्दशी) का धार्मिक और पौराणिक महत्व अत्यंत गहरा है। इसी पावन अवसर पर सहस्त्र औदीच्य ब्राह्मण समाज युवा संगठन एवं ब्राह्मण समाज युवा संस्कार परिवार द्वारा चंबल तट स्थित श्री मुक्तेश्वर महादेव मंदिर परिसर, नागदा में अनवरत पाँचवें वर्ष पितृ मोक्ष, श्राद्ध, जलांजलि, दीपयज्ञ एवं यमदीप दान अनुष्ठान का भव्य आयोजन किया जा रहा है।
यह आयोजन रविवार, 19 अक्टूबर 2025 को ब्रह्ममुहूर्त (प्रातः 4:00 बजे से 6:30 बजे तक) संपन्न होगा। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पितरों की मोक्ष-शांति, पाप-प्रायश्चित और जनकल्याण के लिए सामूहिक वैदिक अनुष्ठान करना है।
🌅 ब्रह्ममुहूर्त में चंबल तट पर पितृ तर्पण और यमदीप दान
कार्यक्रम के संयोजक पंडित निलेश मेहता ने बताया कि यह आयोजन पूरी तरह शास्त्रोक्त विधि-विधान से संपन्न होगा।
पूरे अनुष्ठान का संचालन आचार्य पंडित अजय पंड्या एवं आचार्य पंडित दीपक पंड्या के वैदिक सान्निध्य में किया जाएगा।
विद्वत मंडली में युवा आचार्य दिव्यांश पंड्या भी उपस्थित रहेंगे, जो वैदिक मंत्रोच्चारण से पितृ शांति और यम तर्पण का अनुष्ठान संपन्न कराएँगे।
इच्छुक श्रद्धालुओं से अनुरोध किया गया है कि वे आवश्यक पूजन सामग्री के साथ 19 अक्टूबर को प्रातः 4:00 बजे श्री मुक्तेश्वर महादेव मंदिर परिसर में उपस्थित हों।
संपर्क हेतु मोबाइल क्रमांक — 📞 9826411331, 9713408673।
🔱 नरक चतुर्दशी का वैदिक एवं पौराणिक महत्व
श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने दैत्य नरकासुर का वध किया था और सोलह हज़ार बंदी कन्याओं को उसके अत्याचार से मुक्त कराया था।
इस विजय के उपलक्ष्य में दीपदान की परंपरा प्रारंभ हुई, जिसे आज भी यमदीप दान या दीपयज्ञ के रूप में मनाया जाता है।
पद्मपुराण में उल्लेख है —
“जो व्यक्ति कार्तिक चतुर्दशी के दिन ब्रह्ममुहूर्त में स्नान कर यम तर्पण, पितृ तर्पण और दीपयज्ञ करता है, उसे यमलोक का भय नहीं रहता और पितृजन प्रसन्न होकर परिवार को सुख, समृद्धि और सौभाग्य का आशीर्वाद देते हैं।”
वेदों में भी कहा गया है —
“अधुना कार्तिके अर्पितानां दीपानां महत्त्वं शृणुत।
मानवपूर्वजाः सदा आकांक्षन्ति यत् तेषां कुटुम्बे भक्तः पुत्रः जायते,
यः कार्तिके दीपं दत्त्वा केशवस्य तृप्तिं करोति॥”
अर्थात — कार्तिक चतुर्दशी को भगवान केशव (विष्णु) को दीप अर्पित करने वाला व्यक्ति न केवल अपने पितरों को तृप्त करता है बल्कि यमलोक के भय से भी मुक्त होता है।
🪔 यमदीप दान और पितृ शांति का वैज्ञानिक दृष्टिकोण
आचार्य पंडित अजय पंड्या के अनुसार, नरक चतुर्दशी की रात दीपदान करना केवल धार्मिक कर्म नहीं बल्कि आध्यात्मिक शुद्धि और ऊर्जा संतुलन का माध्यम भी है।
चंबल तट जैसे पवित्र स्थल पर सामूहिक दीपयज्ञ करने से पृथ्वी, जल और आकाश तत्व में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे वातावरण पवित्र होता है।
पंडित दीपक पंड्या ने बताया कि यमदीप दान का अर्थ केवल दीप जलाना नहीं बल्कि अपने भीतर की अंधकारमय प्रवृत्तियों को दूर कर आत्मा को प्रकाश की ओर ले जाना है।
यह अनुष्ठान पितृ दोष निवारण, अकाल मृत्यु से मुक्ति और कुल की समृद्धि का द्वार खोलता है।
🧘♂️ पूजन सामग्री सूची — नरक चतुर्दशी यमदीप दान हेतु
श्रद्धालुओं को अपने साथ निम्न पूजन सामग्री लाने का अनुरोध किया गया है:
-
गन्ने — 4 नग
-
पीला कपड़ा
-
तांबे का कलश, बड़ी परात, छोटी थाली
-
तांबे के 5 दीपक, चांदी का 1 दीपक
-
जल की कुल्हड़ — 7 नग
-
धानी, बताशा, दोने — 7 नग
-
काला तिल, जौ, चंदन, हल्दी-कुमकुम, भस्मी
-
जनऊ — 2 नग, दूध, दही, शहद, घी
-
मिट्टी के 16 दीपक, तिल्ली का तेल (200 ग्राम), घी (100 ग्राम)
-
7 फूल, गोल व लंबी बत्तियाँ, कर्पूर
-
साथ ही दीपोत्सव के लिए फुलझड़ी, अनार, चक्री भी लाएँ
-
प्रातःकालीन ठंड को देखते हुए गर्म वस्त्र, साल और आसान अवश्य साथ रखें
🙏 पितृ शांति और लोककल्याण की भावनाओं से जुड़ा आयोजन
इस सामूहिक वैदिक अनुष्ठान का उद्देश्य केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और आध्यात्मिक एकता को मजबूत करना भी है।
ब्राह्मण समाज के युवा हर वर्ष की तरह इस बार भी पितृ शांति, पाप प्रायश्चित और जन कल्याण की भावना से प्रेरित होकर इस आयोजन को सफल बनाने में जुटे हैं।
आयोजन को सफल बनाने में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं —
-
सहस्त्र औदीच्य ब्राह्मण समाज अध्यक्ष डॉ. प्रदीप रावल
-
डॉ. अनिल दुबे
-
कार्यक्रम संयोजक पंडित निलेश मेहता
-
आचार्य पंडित अजय पंड्या
-
पंडित दीपक पंड्या
सभी ने क्षेत्रवासियों और श्रद्धालुओं से अनुरोध किया है कि वे परिवार सहित इस पवित्र अवसर पर पहुँचकर पितृ मोक्ष और आत्मशुद्धि के इस पुण्य कार्य में भाग लें।
🌼 निष्कर्ष — नरक चतुर्दशी पर पितृ तर्पण का दिव्य अवसर
19 अक्टूबर 2025, ब्रह्ममुहूर्त में आयोजित यह सामूहिक यमदीप दान और पितृ तर्पण अनुष्ठान केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं बल्कि जीवन में प्रकाश और शांति लाने का माध्यम है।
जो व्यक्ति इस दिन दीपदान, जलांजलि और पितृ तर्पण करता है, उसे पापों से मुक्ति और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
चंबल तट की यह पुण्य भूमि इस वर्ष भी हजारों दीपों की ज्योति से आलोकित होगी — जो न केवल नदी के जल में प्रतिबिंबित होगी बल्कि श्रद्धालुओं के हृदय में भी मोक्ष, शांति और आत्मज्योति का संचार करेगी।

