कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के जिले में किसानों के साथ बड़ा खेल: जैविक खाद के नाम पर राख-मिट्टी बेच दी गई
सीहोर से रिपोर्ट | अक्टूबर 2025
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर में किसानों के साथ एक चौंकाने वाला घोटाला सामने आया है। यहां किसानों को जैविक खाद (Organic Fertilizer) के नाम पर राख, मिट्टी और कोयले की धूल बेच दी गई। यह मामला न केवल किसानों की मेहनत पर पानी फेरने वाला है, बल्कि प्रदेश की कृषि व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है।
🌾 ‘उत्तम शक्ति पावर’ के नाम पर चला फर्जीवाड़ा
जानकारी के अनुसार, सीहोर जिले की भैरूंदा तहसील के निमोटा और महागांव गांव में दर्जनों किसानों ने “उत्तम शक्ति पावर” नामक जैविक खाद खरीदी थी। सरकारी केंद्रों पर खाद की कमी के कारण किसान मजबूर होकर निजी विक्रेताओं से यह खाद खरीदने लगे। बताया गया कि 40 किलो की एक बोरी 1500 रुपये में बेची जा रही थी। किसानों को भरोसा दिलाया गया कि यह उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद है, लेकिन जब उन्होंने बोरियां खोलीं, तो उनमें से राख, मिट्टी और कोयले का मिश्रण निकला।
🚜 किसानों ने की शिकायत, प्रशासन में मचा हड़कंप
जैसे ही किसानों को धोखाधड़ी का पता चला, उन्होंने इसकी शिकायत अपने गांव के सरपंच वीरेंद्र सिंह राजपूत और संबंधित अधिकारियों से की। शिकायत के बाद नायब तहसीलदार अनीस कुरैशी और कृषि अधिकारी बी.एस. राज तत्काल मौके पर पहुंचे। जांच में स्पष्ट हो गया कि बोरी में मौजूद सामग्री में किसी प्रकार का पोषक तत्व नहीं था और यह खाद पूरी तरह से नकली (Fake Fertilizer) थी।
इस खुलासे के बाद राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने महागांव कदीम गांव में छापा मारा। छापे में 210 बोरियां नकली खाद की बरामद हुईं, जबकि लगभग 500 बोरियां पहले ही किसानों को बेची जा चुकी थीं।
⚖️ फर्जी सप्लायरों की तलाश शुरू, FIR की सिफारिश
जांच के दौरान सामने आया कि तेजपाल और अजय राजपूत नामक दो व्यक्तियों ने खुद को पंजीकृत सप्लायर बताकर किसानों को ठगा। उनके पास ना तो कोई लाइसेंस था, ना वैध लॉट नंबर या अधिकृत दस्तावेज़। कृषि विभाग ने नकली खाद के नमूने लैब में परीक्षण के लिए भेजे हैं। इसके साथ ही गोपालपुर थाने में एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश भी की गई है।
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। एसडीएम ने भी स्पष्ट किया है कि किसानों के साथ किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
🌿 कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के जिले में ही किसानों की ठगी!
इस घटना का सबसे बड़ा पहलू यह है कि यह मामला केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के अपने गृह जिले सीहोर से जुड़ा है।
किसानों और विपक्षी दलों का कहना है कि जब कृषि मंत्री के जिले में ही ऐसी घटनाएं हो रही हैं, तो बाकी प्रदेश में हालात कितने भयावह होंगे, इसका अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
किसानों का कहना है कि सरकारी खाद वितरण केंद्रों पर लंबी लाइनों और कमी की वजह से उन्हें निजी व्यापारियों से खाद खरीदनी पड़ी। लेकिन अब वे दोहरी मार झेल रहे हैं — एक ओर फसल की चिंता और दूसरी ओर नकली खाद से नुकसान।
💬 किसानों की पीड़ा: “खेतों में उग रही राख, नहीं फसल”
स्थानीय किसान रामपाल यादव ने बताया, “हमने सरकार पर भरोसा किया, लेकिन जब खाद की कमी हुई, तो मजबूरी में निजी दुकानों से खरीदी। खेत में डालने के बाद फसल मुरझाने लगी, तब जाकर हमें शक हुआ कि खाद असली नहीं है।”
दूसरे किसान संतोष मालवीय ने कहा, “अगर कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने जिले में किसानों को सुरक्षित नहीं रख पा रहे, तो बाकी प्रदेश में क्या उम्मीद करें? हमें न सिर्फ नुकसान हुआ, बल्कि हमारी मेहनत की कमाई भी चली गई।”
🧪 खाद के नमूने जांच में, रिपोर्ट से होगा खुलासा
कृषि विभाग ने नकली खाद के नमूने जांच प्रयोगशाला में भेज दिए हैं। रिपोर्ट आने के बाद यह साफ होगा कि बोरियों में किस प्रकार का पदार्थ भरा गया था।
सूत्रों के अनुसार, यह खाद राख, मिट्टी और कोयले की चूरी का मिश्रण था, जो पूरी तरह से कृषि के लिए हानिकारक है।
🏛️ राजनीतिक गलियारों में गूंजा मामला
इस प्रकरण ने मध्य प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। विपक्षी दलों ने इसे “कृषि मंत्री के गृह जिले में किसानों के साथ धोखा” बताते हुए सरकार पर हमला बोला है।
विपक्ष का आरोप है कि सरकार के संरक्षण में ऐसे फर्जीवाड़े फल-फूल रहे हैं, जबकि किसान दिन-रात खेतों में पसीना बहाकर भी ठगे जा रहे हैं।
वहीं, प्रशासन का कहना है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा। कार्रवाई तेज की जा रही है और संबंधित विभागों को जांच में शामिल किया गया है।
🧭 प्रदेशभर में फैले नकली खाद और बीज के जाल की पोल
किसानों का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है। पिछले कुछ महीनों से प्रदेश के अलग-अलग जिलों में नकली खाद और बीज के मामलों की बाढ़ आई हुई है। कई जगहों पर फर्जी कंपनियां किसानों को सस्ती दरों या “जैविक” टैग लगाकर धोखा दे रही हैं।
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि कृषि आपूर्ति तंत्र में कड़ी निगरानी की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो नकली खाद के कारण हजारों एकड़ फसलें बर्बाद हो सकती हैं।
🔎 निष्कर्ष: किसानों के भरोसे पर गहरी चोट
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हमेशा किसानों के हितों की बात की है, लेकिन अब उनके ही जिले में किसानों के साथ ऐसा बड़ा धोखा हुआ है, जो उनकी छवि और विभाग दोनों के लिए चुनौती बन गया है।
किसानों की उम्मीद अब इस बात पर टिकी है कि शिवराज सिंह चौहान स्वयं इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराएं, ताकि दोषियों को सजा मिले और भविष्य में कोई भी व्यापारी किसानों की मेहनत से खिलवाड़ न कर सके।

