इंदौर में बाल स्वयंसेवकों का भव्य पथ संचलन: जयघोष से गूंजीं सड़कें, फूल बरसाकर हुआ स्वागत
इंदौर। रविवार का दिन शहरवासियों के लिए गर्व और प्रेरणा से भरा रहा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बाल स्वयंसेवकों ने आज इंदौर की सड़कों पर शिस्त, उत्साह और देशभक्ति के स्वर में कदमताल की।
दस से सोलह वर्ष आयु वर्ग के हजारों बाल स्वयंसेवक सुबह और शाम दोनों समय अलग-अलग क्षेत्रों में पथ संचलन में शामिल हुए। उनके अनुशासित कदमों और जयघोषों से पूरा शहर गूंज उठा।
फूल बरसाकर और तिलक लगाकर हुआ स्वागत
शहर के हर कोने में स्वयंसेवकों के स्वागत की विशेष तैयारियाँ की गई थीं। नागरिकों ने सड़कों के किनारे मंच लगाए थे, परिवारों ने अपने घरों के बाहर रंगोली बनाई थी और कई स्थानों पर फूल बरसाकर उनका स्वागत किया गया।
महिलाओं ने पारंपरिक तरीके से चंदन तिलक लगाकर स्वयंसेवकों का अभिनंदन किया। हर उम्र के नागरिक इस अनुशासित और भावनात्मक दृश्य को देखकर गर्व महसूस कर रहे थे।
40 स्थानों से निकले संचलन, 90 किलोमीटर की दूरी तय
इंदौर शहर के विभिन्न इलाकों से करीब 40 स्थानों पर पथ संचलन आयोजित किए गए। इन संचलनों ने मिलकर 90 किलोमीटर से अधिक दूरी तय की।
अंदाजन 20 हजार बाल स्वयंसेवक इसमें शामिल हुए, जिनकी एकरूप वेशभूषा, सधे हुए कदम और बैंड की स्वरलहरियाँ देखने लायक दृश्य प्रस्तुत कर रही थीं।
बंगाली कॉलोनी से निकला सबसे बड़ा संचलन
इन सभी संचलनों में बंगाली कॉलोनी से निकला संचलन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। यह जुलूस आधे किलोमीटर से भी अधिक लंबा था और स्थानीय नागरिकों की भीड़ ने जगह-जगह रुककर बाल स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन किया।
बच्चों के चेहरों पर अनुशासन के साथ-साथ देशसेवा का जोश साफ झलक रहा था।
महिलाओं और परिवारों की भागीदारी
इस बार के पथ संचलन की एक विशेष बात यह रही कि केवल बाल स्वयंसेवक ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों ने भी आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाई।
माताओं और बहनों ने स्वागत के लिए रंगोलियां बनाई, आरती उतारी और अपने घरों की बालकनियों से फूलों की वर्षा की।
शहर के कई इलाकों में सुबह से ही वातावरण भक्तिपूर्ण और राष्ट्रभक्ति के रंग में रंग गया।
34 स्थानों से हुआ था पूर्व संचलन, डेढ़ लाख स्वयंसेवक हुए थे शामिल
गौरतलब है कि इसी माह की 5 अक्टूबर को इंदौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा वयस्क स्वयंसेवकों का ऐतिहासिक पथ संचलन निकाला गया था, जिसमें करीब डेढ़ लाख स्वयंसेवक शामिल हुए थे।
संख्या और अनुशासन दोनों दृष्टि से वह इंदौर का अब तक का सबसे बड़ा संचलन माना गया।
बाल स्वयंसेवकों का यह रविवार का आयोजन उसी अनुशासन और समर्पण की अगली कड़ी था, जिसकी तैयारियाँ पिछले कई दिनों से चल रही थीं।
राऊ से नंदानगर तक दिखा उत्साह
रविवार को सुबह से ही शहर के प्रमुख स्थानों जैसे राऊ कन्या शाला मैदान, रिया गार्डन, बंगाली चौराहा, कीमती गार्डन, धार रोड, नगर निगम झोन-1, किला मैदान, सुगनी देवी कॉलेज और नंदानगर से बाल स्वयंसेवक जयघोष करते हुए निकले।
हर क्षेत्र में नागरिकों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी दिखाई। “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के नारों से पूरा शहर गूंज उठा।
अनुशासन और देशभक्ति का अद्भुत संगम
इन पथ संचलनों का दृश्य न केवल अनुशासन का उदाहरण था बल्कि देशभक्ति और संगठन शक्ति का भी प्रतीक था।
बैंड की मधुर धुनों पर जब नन्हें स्वयंसेवक कदमताल करते हुए निकले तो लोग देर तक खड़े रहकर इस दृश्य को कैमरे में कैद करते रहे।
हर सड़क पर संघ की पारंपरिक वेशभूषा में सफेद शर्ट और खाकी निकर पहने हुए बाल स्वयंसेवक देशभक्ति की एक सुंदर झलक बन गए।
शहर प्रशासन और पुलिस की सराहनीय व्यवस्था
इस विशाल आयोजन को देखते हुए शहर प्रशासन और पुलिस विभाग ने भी बेहतरीन व्यवस्था की।
मुख्य मार्गों पर यातायात को अस्थायी रूप से डायवर्ट किया गया ताकि संचलन निर्बाध रूप से आगे बढ़ सके।
सुरक्षा के लिए स्वयंसेवक दल और पुलिसकर्मी दोनों तैनात थे, जिससे पूरे कार्यक्रम में शांति और अनुशासन बना रहा।
नागरिकों में बढ़ा गर्व और प्रेरणा का भाव
इंदौर के नागरिकों ने इस आयोजन को सिर्फ देखने का नहीं, बल्कि महसूस करने का अवसर बताया।
कई लोगों ने कहा कि बाल स्वयंसेवकों की अनुशासनप्रियता और राष्ट्र के प्रति समर्पण देखकर आने वाली पीढ़ियों के प्रति गर्व का भाव बढ़ा है।
कई अभिभावकों ने इसे बच्चों के चरित्र निर्माण की दिशा में “सकारात्मक संस्कार उत्सव” बताया।
संघ की परंपरा, समाज के लिए प्रेरणा
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पथ संचलन सदैव से संगठन, अनुशासन और राष्ट्रनिष्ठा के प्रतीक रहे हैं।
इस बार बाल स्वयंसेवकों का संचलन यह दर्शाता है कि आने वाली पीढ़ी भी इन मूल्यों को आत्मसात कर रही है।
इंदौर जैसे महानगर में इतने बड़े स्तर पर हुआ यह आयोजन संघ की जमीनी पकड़ और समाज में उसकी प्रेरक भूमिका को फिर एक बार सिद्ध करता है।

