अहंकार और बुरे विचार से धर्म व्यर्थ हो जाता है – आचार्य श्री सुबल सागर महाराज
ग्वालियर।
रेसकोर्स रोड स्थित केशरबाग अपार्टमेंट में चल रहे आचार्य श्री सुबल सागर महाराज ससंघ के प्रवचनों में शनिवार को भक्ति और श्रद्धा का विशेष वातावरण देखने को मिला। अपने गहन आध्यात्मिक विचारों से आचार्य श्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं को जीवन का सच्चा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि —
“यदि मन में अहंकार या बुरे विचार हैं, तो दान या धर्म करने का कोई लाभ नहीं होता। धर्म तभी सार्थक होता है जब वह श्रद्धा, प्रेम और सच्ची भावना से किया जाए।”
आचार्य श्री सुबल सागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मन की शक्ति अपार है। यदि मन को जीत लिया जाए, तो असंभव भी संभव हो सकता है। धर्म का वास्तविक अर्थ केवल पूजा या अनुष्ठान नहीं, बल्कि मन और कर्म की शुद्धि है। जब मन में अहंकार, द्वेष या दिखावा आ जाता है, तो धर्म निष्फल हो जाता है।
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने लिया आशीर्वाद, किया पद विहार
प्रवचन के दौरान मध्यप्रदेश सरकार के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने आचार्य श्री सुबल सागर महाराज के चरणों में नमन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। मंत्री तोमर ने कहा कि वे आचार्य श्री के उपदेशों से प्रेरणा लेकर जनसेवा में और अधिक समर्पित भाव से कार्य करेंगे।
इसके बाद उन्होंने आचार्य श्री सुबल सागर महाराज के साथ कुछ दूरी तक पद विहार भी किया। उन्होंने कहा कि ऐसे संतों का सान्निध्य समाज के लिए वरदान है, जो आत्मशुद्धि और संयम का मार्ग दिखाते हैं।
धर्म का अर्थ – वर्तमान को सुधारकर भविष्य को श्रेष्ठ बनाना
आचार्य श्री ने अपने प्रवचन में कहा कि धर्म का अर्थ केवल पूजा-पाठ नहीं बल्कि अपने कर्मों को सुधारने की प्रक्रिया है।
“धर्म वह शक्ति है जो व्यक्ति को पाप से दूर और मोक्ष की दिशा में अग्रसर करती है। मीठी वाणी, सच्चे व्यवहार और समाज के प्रति सद्भावना ही सच्चा धर्म है।”
उन्होंने कहा कि जब मन और शरीर दोनों पवित्र हों, तभी व्यक्ति वास्तविक रूप से धार्मिक कहलाता है। धर्म व्यक्ति को उसके मूल स्वभाव और मूल्यों से जोड़ता है। संकट या विपत्ति के समय भी हमें अपने धर्म से विचलित नहीं होना चाहिए, क्योंकि अंततः धर्म ही जीवन का सबसे बड़ा सहारा बनता है।
केशरबाग जैन परिवारों ने की भव्य स्वागत यात्रा
शनिवार सुबह आचार्य श्री सुबल सागर महाराज ससंघ ने आदित्यपुरम दिगंबर आदिनाथ जैन मंदिर से पदयात्रा आरंभ की।
यह भव्य पदयात्रा ढोल-ताशों और भक्तिमय नारों के साथ सचिन तेंदुलकर मार्ग, सिटी सेंटर और रेलवे स्टेशन रोड से होती हुई केशरबाग अपार्टमेंट पहुंची।
केशरबाग अपार्टमेंट परिसर में डॉ. वीरेंद्र गंगवाल सहित जैन समाज के परिवारों ने रंगोली, पुष्पवृष्टि और आरती के साथ आचार्य श्री सुबल सागर महाराज और मुनिराजों की मंगल आगवानी की। भक्तों ने उनके चरणों का पादप्रक्षालन कर आरती उतारी और मंगलाचरण के साथ आशीर्वाद प्राप्त किया।
जैन समाज का समर्पण और श्रद्धा का उदाहरण
इस अवसर पर डॉ. वीरेंद्र गंगवाल, प्रशांत गंगवाल, डॉ. सुनील गोधा, विमल जैन, अशोक बाकलीवाल, विकास जैन, विनय कासलीवाल, वीरेंद्र बाबा, प्रमोद जैन सहित अनेक श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री के चरणों में श्रीफल चढ़ाकर आशीर्वाद लिया।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि रविवार, 12 अक्टूबर की सुबह 6 बजे आचार्य श्री सुबल सागर महाराज ससंघ केशरबाग से नई सड़क स्थित चंपाबाग धर्मशाला के लिए पदविहार करेंगे, जहां सुबह 9 बजे से प्रवचन का आयोजन रहेगा।
सचिन जैन ने कहा कि आचार्य श्री सुबल सागर महाराज के प्रवचन आज के समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं। उन्होंने सदैव बताया है कि धर्म केवल मंदिरों तक सीमित नहीं, बल्कि यह जीवन जीने की कला है।
“जब धर्म में मन नहीं लगता, तब भी करना चाहिए प्रयास” – आचार्य श्री
आचार्य श्री ने कहा कि कभी-कभी ऐसा होता है कि मन धर्म में नहीं लगता, लेकिन उस स्थिति में भी हमें प्रयास करते रहना चाहिए। उन्होंने समझाया कि
“धर्म केवल तब फल देता है जब वह मन, वाणी और कर्म से एकरूप होकर किया जाए। बिना मन से किया गया धर्म केवल दिखावा बनकर रह जाता है।”
उन्होंने बताया कि धर्म की आराधना जीवन को पवित्र और पावन बनाती है। जब संसार के सभी रास्ते बंद हो जाते हैं, तब केवल धर्म का प्रकाश ही व्यक्ति को आगे बढ़ने की दिशा देता है।
ग्वालियर में आचार्य श्री सुबल सागर महाराज के प्रवचनों से बढ़ रही धार्मिक चेतना
ग्वालियर शहर में पिछले कुछ दिनों से आचार्य श्री सुबल सागर महाराज के प्रवचनों से धार्मिक और आध्यात्मिक चेतना का नया वातावरण बना हुआ है। शहर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु बड़ी संख्या में प्रवचनों में भाग ले रहे हैं।
केशरबाग जैन समाज, आदित्यपुरम जैन मंदिर समिति और चंपाबाग धर्मशाला ट्रस्ट द्वारा इन आयोजनों की सुंदर व्यवस्था की जा रही है।



