MP Cough Syrup Tragedy: मासूमों की मौत का सिलसिला जारी, 21 बच्चे जा चुके हैं, 4 अभी भी गंभीर अवस्था में
भोपाल/इंदौर/नागपुर, 9 अक्टूबर 2025: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में कोल्ड्रिफ कफ सिरप से पैदा हुई त्रासदी अब पूरे देश को हिला रही है। एक और मासूम बच्चे ने नागपुर में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। मोरडोंगरी परासिया निवासी मयंक सूर्यवंशी की मौत के साथ ही इस जहरीली दवा से मरने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 21 हो गई। वहीं, 4 बच्चे अभी भी गंभीर हालत में नागपुर के अस्पतालों में इलाजरत हैं।
SIT की कार्रवाई: कंपनी मालिक रंगनाथन गोविंदन गिरफ्तार
छिंदवाड़ा कफ सिरप केस में मध्य प्रदेश एसआईटी ने बड़ा कदम उठाया है। श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स कंपनी (Sresan Medicals) के मालिक रंगनाथन गोविंदन को गिरफ्तार कर लिया गया है। रंगनाथन की गिरफ्तारी इस मामले की जांच में एक अहम मोड़ साबित हो सकती है। जांच टीम ने उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।
एसआईटी ने तमिलनाडु के कांचीपुरम जिले में फैक्ट्री की तलाशी ली और उसे सील कर दिया। जांच का मकसद यह पता लगाना है कि सिरप के निर्माण और वितरण में किन स्तरों पर लापरवाही हुई और किन जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों ने इस जघन्य त्रासदी को अंजाम दिया।
जहरीली दवा: “कोल्ड्रिफ” का विनाशकारी प्रभाव
जानकारी के अनुसार, “कोल्ड्रिफ” नामक कफ सिरप में हानिकारक और दूषित रसायन पाए गए। इन जहरीले तत्वों के कारण कई मासूम बच्चों की तबीयत बिगड़ी और धीरे-धीरे उनकी जान चली गई। स्वास्थ्य मंत्रालय और ड्रग कंट्रोलर इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच में जुटे हैं।
मध्य प्रदेश स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बताया कि नागपुर में अभी भी 4 बच्चे गंभीर हालत में हैं, जिनका इलाज जारी है। यह दुखद स्थिति यह सवाल उठाती है कि आखिर राज्य और केंद्र सरकार इस तरह की बीमारियों और गलत औषधि वितरण को रोकने में क्यों विफल रहे।
राजनीतिक बयानबाजी: कांग्रेस और राहुल गांधी पर सवाल
इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। मध्य प्रदेश बीजेपी प्रवक्ता डॉ. हितेश वाजपेयी ने सवाल उठाया कि तमिलनाडु में इस तरह की जहरीली दवा बनाने वाले उत्पादक के खिलाफ कांग्रेस और राहुल गांधी ने आंदोलन क्यों नहीं किया। उन्होंने ट्वीट किया कि “देशभर में 26 बच्चों की मौत के बावजूद कांग्रेस चुप क्यों है? क्या कांग्रेस जिम्मेदारों को बचाने में लगी है?”
यह बयान राजनीति की गर्माहट को दर्शाता है, लेकिन वास्तविक सवाल तो यह है कि मासूम बच्चों की जान लेने वाली इस घातक दवा की जांच और सख्त कार्रवाई क्यों देर से हुई।
SIT की जांच: जिम्मेदार कौन?
मध्य प्रदेश एसआईटी की टीम लगातार जांच में जुटी हुई है। रंगनाथन गोविंदन से पूछताछ जारी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि दवा निर्माण में किस स्तर पर लापरवाही हुई। इसके अलावा, यह भी देखा जा रहा है कि इस त्रासदी में और कौन-कौन जिम्मेदार हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि जहरीली दवा का उत्पादन और वितरण पूरी तरह से नियमों के खिलाफ था। अगर समय रहते कड़े कदम उठाए जाते, तो 21 मासूमों की जान शायद बचाई जा सकती थी।
जनता और परिवार की पीड़ा
मासूम बच्चों के माता-पिता और परिवार इस त्रासदी से गहरे सदमे में हैं। हर कोई सवाल कर रहा है कि आखिर यह मौतों का सिलसिला कब तक चलेगा। छोटे-छोटे बच्चों ने अपनी जान गवाई, और सरकार व प्रशासन की लापरवाही अब खुलकर सामने आ रही है।
नागपुर में भर्ती बच्चों के परिजन लगातार अस्पतालों में अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए मौजूद हैं। उन्होंने प्रशासन से तुरंत प्रभावी कार्रवाई की मांग की है ताकि और मासूमों की जान न जाए।
सरकार की जवाबदेही
मध्य प्रदेश और तमिलनाडु की राज्य सरकारें इस मामले में सीधे जिम्मेदार मानी जा रही हैं। ड्रग कंट्रोलर और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कह रहे हैं कि वे इस मामले की पूरी जांच करेंगे, लेकिन सवाल यह है कि क्या इतनी देर तक चुप रहना और लापरवाही करना सही था?
विशेषज्ञों का मानना है कि दवा निर्माण की प्रक्रिया और गुणवत्ता पर लगातार निगरानी रखी जानी चाहिए थी। इसके बावजूद, इस त्रासदी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत में दवा सुरक्षा प्रणाली में गंभीर कमी है।
निष्कर्ष
MP Cough Syrup Tragedy सिर्फ एक स्वास्थ्य संकट नहीं है, बल्कि यह सरकार, प्रशासन और दवा उद्योग की जिम्मेदारी में चूक का परिणाम है। 21 मासूमों की जान जा चुकी है और 4 बच्चे अभी भी जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं।
यह समय है कि राज्य और केंद्र सरकारें मिलकर इस मामले में दोषियों को कड़ी सजा दें, और भविष्य में ऐसे जहरीली दवाओं के उत्पादन और वितरण पर सख्त निगरानी रखें। मासूम बच्चों की जान अनमोल है और इस तरह की त्रासदी दोबारा नहीं होनी चाहिए।


