14 साल बाद झकनावदा में आयोजित अखिल भारतीय विशाल कवि सम्मेलन, कवि रत्न सुरेंद्र सन्नाटा हुए भावुक
झकनावदा (मध्य प्रदेश): 14 वर्षों बाद अपने गृह नगर में आयोजित श्री अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन में कवियों और श्रोताओं ने काव्य प्रेम का अद्भुत संगम देखा। आयोजन की शुरुआत मां शारदा के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन से हुई। मुख्य अतिथि वरिष्ठ भाजपा नेता भूपेंद्र सिंह राठौर सेमलिया और अध्यक्ष राकेश मग ने कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया।
कवि रत्न सुरेंद्र सन्नाटा का भावुक काव्य पाठ
झकनावदा के ही कवि रत्न सुरेंद्र सन्नाटा ने 14 साल बाद अपने गृह नगर में आयोजित इस कवि सम्मेलन में मंच संचालन करते हुए नगर के शिक्षक हेमेंद्र कुमार जोशी, हरिराम पडियार और मनीष कुमट का पुष्प माला पहनाकर स्वागत किया।
काव्य पाठ के दौरान सुरेंद्र सन्नाटा भावुक हो गए और कहा:
“मैं इस गांव का हमेशा शुक्रगुजार रहूंगा। इतने वर्षों बाद भी मुझे यहां के लोगों का उतना ही स्नेह और आशीर्वाद मिल रहा है। इसके लिए मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं।”
कवि कुलदीप रंगीला की कविता ने छुआ दिल
कवि कुलदीप रंगीला ने अपनी कविता में कहा कि हमला हर हिंदुस्तानी पर हो रहा है। उनकी कविता में भाईचारे और आतंकवाद के खिलाफ संदेश ने श्रोताओं का दिल जीत लिया और तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा मंच गूंज उठा।
कमलेश दवे ‘सहज’ ने दी प्रेरणा
इंदौर के कवि कमलेश दवे ‘सहज’ ने कविता के माध्यम से जीवन और नैतिकता की बात करते हुए कहा:
“जो प्यासे की प्यास न बुझा सके वो सागर किस काम का। जो अपने मालिक को बर्बाद कर दे वो कर्मचारी व नौकर किस काम का।”
उनकी कविता पर श्रोताओं ने खूब हंसी और तालियों के साथ प्रतिक्रिया दी।
साहित्य और सामाजिक संदेश का संगम
राजपुरोहित कवि रत्न सुरेंद्र सन्नाटा ने बच्चों और बुजुर्गों को कविता के माध्यम से जोड़ते हुए कहा:
“सवाल यह नहीं कि फितरत किसने फैलाई, सवाल यह नहीं कि आग किसने लगाई, सवाल तो यह है कि मित्रों की फितरत की बदबू हमारे दिल और दिमाग में कहां से आई।”
झाबुआ के कवि और सामाजिक कार्यकर्ता वीरेंद्र मोदी ने गजल के माध्यम से कर्तव्य और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश दिया।
भोपाल से आई कवित्री साबिया असर ने गीत और गजल के माध्यम से श्रोताओं को मनोरंजन और जीवन दर्शन का अनुभव कराया।
दीपक धुप्पल ने मालवी भाषा में हास्य व्यंग प्रस्तुत किया
दीपक धुप्पल ने मालवी भाषा में हास्य व्यंग के माध्यम से पेशेवर जीवन और ग्रामीण संघर्षों को प्रस्तुत किया। श्रोताओं ने उनके काव्य पाठ में खूब आनंद लिया।
आयोजन के मुख्य सहयोगी और सम्मानित व्यक्तित्व
सार्वजनिक नवदुर्गा उत्सव समिति झकनावदा के तत्वाधान में आयोजित कवि सम्मेलन में मुख्य सहयोगी सेठ नरेंद्र कोठारी, प्रदीप कुमार पालरेचा, श्रेणिक कोठारी, मनोहर सिंह राठौर सेमलिया, परीक्षित सिंह राठौर, जितेंद्र राठौड़, राजेश कांसवा रहे।
सुरक्षा व्यवस्था में योगदान देने वाले झकनावदा चौकी प्रभारी विनोद कुमार सोलंकी और आरक्षक दीपक को भी दुपट्टा पहनाकर प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
