CJI बीआर गवई पर सुप्रीम कोर्ट में हमला: बहन कीर्ति गवई ने संविधान की रक्षा की अपील, दलित समुदाय में गहरी चिंता
नई दिल्ली, 8 अक्टूबर 2025 – देश की सर्वोच्च न्यायपालिका के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई पर एक वकील द्वारा सुप्रीम कोर्ट परिसर में हमले की कोशिश ने न केवल न्यायपालिका को हिलाकर रख दिया है, बल्कि समाज में व्यापक राजनीतिक और सामाजिक चर्चा भी शुरू कर दी है। इस हमले को केवल व्यक्तिगत हमला नहीं बल्कि संविधान पर हमला माना जा रहा है। इस घटना ने विशेष रूप से दलित समुदाय को गहरा झटका दिया है, क्योंकि न्यायमूर्ति बीआर गवई ऐतिहासिक रूप से दलित समुदाय से सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने हैं।
CJI की बहन कीर्ति गवई का अपील संदेश: संविधान की रक्षा सर्वोपरि
इस घटना के तुरंत बाद, CJI बीआर गवई की बहन कीर्ति गवई ने इस हमले पर संवेदनशील प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट के अंदर सीजेआई पर हमला केवल व्यक्तिगत स्तर पर नहीं है, यह संविधान पर हमला है। संविधान हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसकी रक्षा करना हमारी ज़िम्मेदारी है।” कीर्ति गवई ने अपने संदेश में यह भी स्पष्ट किया कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संविधान की सुरक्षा हर भारतीय नागरिक की जिम्मेदारी है।
कीर्ति गवई का यह बयान सुप्रीम कोर्ट और भारतीय लोकतंत्र के स्थायित्व के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने मीडिया के माध्यम से पूरे देश से अपील की कि वे संविधान और न्यायपालिका की रक्षा के लिए आवाज उठाएं और लोकतंत्र के मूल्यों को संरक्षित करें।
बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने जताया दलित समुदाय का दर्द
मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई पर हमले की खबर सुनते ही बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि यह घटना ‘सभी दलितों का दर्द’ है। राजेश राम ने कहा, “यह केवल सुप्रीम कोर्ट पर हमला नहीं है, बल्कि लाखों दलितों का अपमान भी है।”
उन्होंने आगे बताया कि न्यायमूर्ति गवई दलित समुदाय के पहले बौद्ध और दूसरे व्यक्ति हैं, जो मुख्य न्यायाधीश बने। राजेश राम ने कहा कि समाज में इस ऊँचाई तक पहुँचने से पहले, उन्हें कितनी त्रासदियों और चुनौतियों का सामना करना पड़ा होगा। इसके बावजूद, समाज में पूरी तरह से स्वीकार किए जाने तक, उन्हें हर स्तर पर संघर्ष करना पड़ा।
राजेश राम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “एक दलित होने के नाते, हमें समाज में हर दिन भेदभाव का सामना करना पड़ता है। इस घटना ने हमें यह याद दिला दिया कि दलितों के अपमान का अनुभव कितने गहरे स्तर पर होता है।” उनके शब्दों में भावनाओं का इतनी गहराई थी कि बीच-बीच में वे रो पड़े।
हमले की घटना और आरोपी वकील
इस हमले के पीछे 71 वर्षीय वकील राकेश किशोर का हाथ था, जिसने सुप्रीम कोर्ट में CJI बीआर गवई पर जूता फेंकने की कोशिश की। इस घटना ने पूरे न्यायपालिका परिसर को चौंका दिया। हालांकि, अभी तक आरोपी ने कोई पछतावा नहीं जताया है।
इस हमले ने सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा और वकील-पत्रकार के आचार व्यवहार पर भी प्रश्न खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के अंदर इस तरह की घटनाएँ न्यायपालिका की गरिमा और सुरक्षा व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर चेतावनी हैं।
संविधान की सुरक्षा पर जोर
कीर्ति गवई और राजेश राम दोनों ने इस हमले को संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला बताया। कीर्ति गवई ने कहा, “हमारे देश की न्यायपालिका और संविधान की रक्षा करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। अगर हम संविधान और न्यायपालिका की गरिमा को कमजोर होने देंगे, तो लोकतंत्र खतरे में पड़ सकता है।”
राजेश राम ने भी अपने भाषण में बाबा साहेब बी.आर. अंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान का उल्लेख करते हुए कहा कि यही संविधान हमें समाज में अपनी आवाज़ उठाने की शक्ति देता है। उन्होंने कहा कि CJI गवई पर हमला केवल एक व्यक्ति पर नहीं हुआ, बल्कि संविधान की आत्मा पर हमला किया गया।
दलित समुदाय के लिए संदेश
इस घटना ने दलित समुदाय में गहरी चिंता पैदा कर दी है। राजेश राम ने कहा, “CJI गवई की उपलब्धि और उनके खिलाफ हमला यह दिखाता है कि समाज में अभी भी भेदभाव और असमानता मौजूद है। यह घटना लाखों दलितों के लिए अपमानजनक है।”
उन्होंने यह भी कहा कि दलितों को हर स्तर पर समान अधिकार और सम्मान दिलाने के लिए समाज और सरकार को और कठोर कदम उठाने होंगे। इस हमले के बाद दलित अधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी न्यायपालिका की सुरक्षा और दलित अधिकारों की रक्षा की अपील की है।
निष्कर्ष
CJI बीआर गवई पर सुप्रीम कोर्ट में हमला केवल एक व्यक्तिगत घटना नहीं है, बल्कि यह संविधान, न्यायपालिका और दलित समुदाय की संवेदनशील स्थिति का दर्पण है। कीर्ति गवई की संविधान की रक्षा की अपील और राजेश राम की भावपूर्ण प्रतिक्रिया इस घटना की गंभीरता को दर्शाती है।
सुप्रीम कोर्ट और कानून व्यवस्था के विशेषज्ञों का कहना है कि इस घटना ने न्यायपालिका की सुरक्षा और लोकतंत्र की मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही, यह घटना समाज में भेदभाव और असमानता को दूर करने की आवश्यकता को भी उजागर करती है।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि संविधान की रक्षा केवल न्यायपालिका ही नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। CJI बीआर गवई पर हमले का प्रयास, दलित समुदाय के लिए अपमानजनक होने के साथ-साथ पूरे देश के लोकतंत्र के लिए चेतावनी भी है।

