भारत कई देशों के साथ एफटीए वार्ता में जुटा — पीयूष गोयल बोले, ‘2030 तक व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाना लक्ष्य’
दोहा में बोले वाणिज्य मंत्री — अमेरिका, ओमान, यूरोपीय संघ, चिली, पेरू और न्यूजीलैंड सहित कई देशों से हो रही मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत
दोहा / नई दिल्ली, अक्टूबर 2025 —
भारत अब वैश्विक मंच पर अपनी आर्थिक साझेदारी को नए स्तर पर ले जाने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि भारत इस समय अमेरिका, ओमान, यूरोपीय संघ (EU), चिली, पेरू, न्यूजीलैंड और यूरेशियन देशों सहित कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement – FTA) पर बातचीत कर रहा है।
गोयल दोहा (कतर) में एक व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य भारत और कतर के बीच निवेश, व्यापार और आर्थिक सहयोग को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि भारत अब ऐसे देशों के साथ एफटीए वार्ता कर रहा है जो भारत के लिए दीर्घकालिक रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
गोयल ने कहा —
“आज भारत ओमान, यूरोपीय संघ, अमेरिका, चिली, पेरू, न्यूजीलैंड, यूरेशिया और कई अन्य देशों के साथ एफटीए वार्ता कर रहा है। इन देशों ने भारत के साथ मजबूत, संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापारिक संबंधों की इच्छा व्यक्त की है। यह भारत के बढ़ते आर्थिक प्रभाव और नीति-सामर्थ्य का संकेत है।”
🏛️ भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता ने पकड़ी रफ्तार
पिछले महीने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने न्यूयॉर्क में एक उच्चस्तरीय आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था। इस दौरान भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement – BTA) पर महत्वपूर्ण चर्चाएं हुईं।
बैठक में दोनों देशों ने निर्णय लिया कि वे जल्द से जल्द एक ऐसा समझौता करेंगे जो दोनों पक्षों के लिए लाभकारी हो। इस दौरान व्यापार से जुड़ी कई अहम रुकावटों और शुल्क संबंधी मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
गोयल ने इस दौरान अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमीसन ग्रीर और भारत में अमेरिका के नामित राजदूत सर्जियो गोर से भी मुलाकात की।
इन वार्ताओं की अहमियत इसलिए भी बढ़ी क्योंकि अमेरिका ने हाल ही में भारतीय निर्यातित उत्पादों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ और 25% पेनल्टी शुल्क लगाया था। इस वजह से भारत से अमेरिका जाने वाले उत्पादों पर कुल 50% तक अतिरिक्त आयात शुल्क लागू है।
अधिकारियों का मानना है कि यह वार्ता इन शुल्कों को कम करने और भारतीय निर्यात को फिर से प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
📈 2030 तक 500 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य
भारत और अमेरिका के बीच चल रही एफटीए वार्ता का पहला चरण 2025 की शरद ऋतु (अक्टूबर–नवंबर) तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
अब तक दोनों देशों के बीच पांच दौर की बातचीत हो चुकी हैं, और चर्चा सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है।
इस प्रस्तावित समझौते का प्रमुख उद्देश्य है —
“द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा 191 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकर 2030 तक 500 अरब डॉलर तक ले जाना।”
वित्त वर्ष 2024–25 में अमेरिका लगातार चौथे वर्ष भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना हुआ है।
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दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 131.84 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।
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भारत का निर्यात 86.5 अरब डॉलर, जबकि आयात 45.3 अरब डॉलर रहा।
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भारत के कुल वस्तु निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी 18%, आयात में 6.22%, और कुल व्यापार में 10.73% है।
🌍 भारत का वैश्विक आर्थिक विस्तार
भारत अब न केवल एशिया बल्कि यूरोप, लैटिन अमेरिका और खाड़ी देशों के साथ भी नए एफटीए फ्रेमवर्क पर काम कर रहा है।
ओमान, यूरोपीय संघ, पेरू और चिली के साथ हो रही वार्ताएं भारत की “एक्सपोर्ट-ड्रिवन ग्रोथ” नीति का हिस्सा हैं।
इन समझौतों से भारतीय उद्योगों — विशेषकर मैन्युफैक्चरिंग, फार्मा, टेक्सटाइल, कृषि और आईटी सेवाओं — को वैश्विक बाजार में बड़ा अवसर मिलेगा।
इसके साथ ही भारत की भूमिका वैश्विक सप्लाई चेन में और मजबूत होगी, जिससे रोजगार, निवेश और निर्यात — तीनों क्षेत्रों में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
गोयल ने कहा कि भारत की कोशिश ऐसे एफटीए करने की है जो “देश के किसानों, एमएसएमई, स्टार्टअप्स और उद्योग जगत के लिए समान रूप से लाभकारी हों।”
🔑 मुख्य बिंदु (Highlights):
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भारत 8 से अधिक देशों के साथ एफटीए वार्ता में जुटा है।
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अमेरिका के साथ 2025 तक पहले चरण का समझौता संभव।
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लक्ष्य: 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाना।
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अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार, लगातार चौथे वर्ष।
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ओमान, यूरोपीय संघ, चिली, पेरू और न्यूजीलैंड के साथ भी सक्रिय वार्ता जारी।
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भारत का ध्यान अब “संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापारिक साझेदारी” पर केंद्रित।
📌 विश्लेषण: भारत की एफटीए रणनीति का व्यापक प्रभाव
भारत की यह नीति न केवल निर्यात में विविधता लाने में मदद करेगी, बल्कि नए बाजारों में भारतीय उत्पादों की पहुंच भी बढ़ाएगी।
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, इन समझौतों से भारत के एमएसएमई सेक्टर, रोजगार, और विदेशी निवेश पर दीर्घकालिक सकारात्मक असर होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की एफटीए नीति अब “रक्षात्मक नहीं बल्कि आक्रामक और आत्मनिर्भर दृष्टिकोण” पर आधारित है — जिसमें उद्देश्य है कि भारत को वैश्विक व्यापारिक निर्णय-निर्माण के केंद्र में लाया जाए।
