आसियान समिट में पहली बार आमने-सामने होंगे मोदी और ट्रंप
टैरिफ विवाद और H-1B वीज़ा पर होगी अहम बातचीत
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव और वैश्विक अस्थिरता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस महीने एक बार फिर आमने-सामने बैठ सकते हैं। मौका होगा 47वें आसियान समिट का, जो 26 से 28 अक्टूबर 2025 के बीच मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में आयोजित होगा। यह बैठक दोनों नेताओं के बीच इस साल की पहली सीधी मुलाकात हो सकती है और इसे द्विपक्षीय संबंधों में संभावित “टर्निंग प्वॉइंट” माना जा रहा है।
ट्रंप का एशिया दौरा
मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने सम्मेलन की तैयारियों के बीच पुष्टि की कि मोदी और ट्रंप दोनों समिट में मौजूद रहेंगे। ट्रंप ने जुलाई 2025 में अनवर को फोन पर औपचारिक निमंत्रण स्वीकार किया था। यह उनका 2017 के बाद पहला आसियान शिखर सम्मेलन होगा। ट्रंप इस यात्रा के दौरान एशिया के कई देशों का दौरा करने वाले हैं, जिसके चलते क्षेत्रीय भू-राजनीतिक समीकरणों पर नज़र और भी गहरी होगी।
टैरिफ विवाद की पृष्ठभूमि
भारत और अमेरिका के बीच मौजूदा तनाव की शुरुआत अगस्त 2025 में हुई, जब अमेरिकी प्रशासन ने भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगा दिया। इसका सीधा असर भारत के टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी और केमिकल सेक्टर पर पड़ा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस फैसले से भारत का लगभग 8 से 27 अरब डॉलर का निर्यात प्रभावित हो सकता है।
दिलचस्प बात यह है कि अब तक भारत ने कोई जवाबी टैरिफ नहीं लगाया है। बल्कि सरकार “मेक इन इंडिया” पहल, जीएसटी सुधारों और आत्मनिर्भरता पर ज़ोर देकर स्थिति को संभालने की कोशिश कर रही है।
पिछली चूक, अब उम्मीदें
ध्यान देने योग्य है कि जून 2025 में कनाडा में हुए जी-7 समिट के दौरान दोनों नेता आमने-सामने नहीं आ सके थे। ऐसे में कुआलालंपुर का यह सम्मेलन भारत-अमेरिका रिश्तों के लिए एक अहम अवसर बनकर उभरा है।
बैठक का संभावित एजेंडा
विशेषज्ञों का मानना है कि मोदी-ट्रंप बैठक के एजेंडे में कई अहम मुद्दे शामिल रहेंगे—
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व्यापार तनाव कम करना और टैरिफ विवाद का समाधान
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एच-1बी वीज़ा संबंधी कड़वाहट और भारतीय पेशेवरों पर असर
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इंडो-पैसिफिक रणनीतिक सहयोग और चीन की बढ़ती गतिविधियों पर चर्चा
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भारत के रूस से तेल आयात का मसला, जिस पर अमेरिका लगातार दबाव बना रहा है।
राजनयिक सूत्रों का कहना है कि चर्चाओं से दोनों देशों के बीच रिश्तों में एक रीसेट की संभावना है। साथ ही, अगर व्यापारिक मोर्चे पर कोई समझौता बनता है तो इसका असर भारत की जीडीपी ग्रोथ पर सकारात्मक पड़ सकता है।
निष्कर्ष
कुआलालंपुर समिट न केवल आसियान देशों के लिए बल्कि भारत-अमेरिका संबंधों के भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। जहां अमेरिका को एशिया में अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत करनी है, वहीं भारत को अपने निर्यात और आर्थिक वृद्धि को बचाने की चुनौती है। ऐसे में मोदी और ट्रंप की मुलाकात आने वाले महीनों की वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था की दिशा तय कर सकती है।

