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    विजयादशमी 2025: श्रवण नक्षत्र और रवि योग में मनाया जाएगा दशहरा, क्या है इसका महत्व?

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    Published On: 30 September 2025
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    Dussehra 2025: श्रवण नक्षत्र और रवि योग में मनाया जाएगा विजयादशमी का पर्व, जानें महत्व, मुहूर्त और परंपराएँ

    दशहरा या विजयादशमी का पर्व हर साल आश्विन माह की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक माना जाता है। वर्ष 2025 में विजयादशमी का पर्व गुरुवार, 2 अक्तूबर को मनाया जाएगा। इस बार दशहरा बेहद शुभ संयोग में आ रहा है क्योंकि इस दिन श्रवण नक्षत्र और रवि योग का साथ मिल रहा है।

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    दशहरा का धार्मिक महत्व

    दशहरा का पर्व भगवान श्रीराम द्वारा रावण के वध और माता दुर्गा द्वारा महिषासुर के संहार की स्मृति में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीराम ने रावण के अहंकार और अत्याचारों का अंत कर धर्म और मर्यादा की स्थापना की। वहीं, मां दुर्गा ने शक्ति स्वरूपा बनकर महिषासुर का वध किया और संसार को अधर्म से मुक्त किया।
    इस कारण विजयादशमी को शक्ति, साहस, मर्यादा, आदर्श और न्याय की विजय का प्रतीक माना जाता है।

    इस दिन भगवान श्रीराम, माता दुर्गा, भगवान गणेश और हनुमान जी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही रामायण पाठ, सुंदरकांड और श्रीराम रक्षा स्तोत्र का पाठ करने से विशेष पुण्य और मनोकामनाओं की पूर्ति मानी जाती है।

    दशहरा पूजा का महत्व

    दशहरे की पूजा में मां दुर्गा शक्ति का प्रतीक हैं, जबकि भगवान श्रीराम आदर्श और मर्यादा के प्रतीक माने जाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि जीवन में शक्ति और मर्यादा का संतुलन आवश्यक है।

    • श्रीराम हमें जीवन में धैर्य, संयम और आदर्श अपनाने की प्रेरणा देते हैं।

    • रावण शिवभक्त होते हुए भी अपने स्वार्थ, अहंकार और अत्याचार का प्रतीक था।
      यही कारण है कि हर वर्ष दशहरे पर रावण के पुतले का दहन कर बुराई के अंत और सत्य की विजय का संदेश दिया जाता है।

    दशहरा 2025 का मुहूर्त

    • दशमी तिथि प्रारंभ: 1 अक्तूबर, बुधवार शाम 7:02 बजे

    • दशमी तिथि समाप्ति: 2 अक्तूबर, गुरुवार शाम 7:10 बजे

    • विजय मुहूर्त: 2 अक्तूबर दोपहर 1:56 बजे से 2:44 बजे तक

    • अपराह्न पूजा मुहूर्त: 2 अक्तूबर दोपहर 1:09 बजे से 3:31 बजे तक

    इस बार दशहरा पूरे दिन रवि योग में रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रवि योग में किए गए कार्य सफल होते हैं और बाधाएं दूर हो जाती हैं। इसके साथ ही श्रवण नक्षत्र भी रहेगा, जो विजयादशमी को और अधिक मंगलकारी बनाता है।

    • श्रवण नक्षत्र प्रारंभ: 2 अक्तूबर सुबह 9:14 बजे

    • श्रवण नक्षत्र समाप्ति: 3 अक्तूबर सुबह 9:34 बजे

    श्रवण नक्षत्र और दशमी तिथि का एक साथ होना शास्त्रों के अनुसार दशहरे के पर्व का सबसे महत्वपूर्ण और शुभ योग माना गया है।

    विजयादशमी 2025 शुभ मुहूर्त

    विजयादशमी की परंपराएँ और विशेष महत्व

    1. शस्त्र पूजन

    दशहरे पर शस्त्रों का पूजन करना परंपरा है। इसे शक्ति और साहस का प्रतीक माना जाता है।

    2. पान का सेवन

    रावण दहन के बाद पान खाना विजय और प्रेम का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन हनुमानजी को बूंदी का भोग लगाकर पान अर्पित करने से विशेष आशीर्वाद मिलता है।

    3. नीलकंठ पक्षी दर्शन

    मान्यता है कि लंका पर विजय प्राप्त करने से पूर्व भगवान श्रीराम ने नीलकंठ पक्षी के दर्शन किए थे। दशहरे पर नीलकंठ के दर्शन को शुभ और भाग्योदय, सुख-समृद्धि का सूचक माना गया है।

    4. शमी वृक्ष की पूजा

    शमी वृक्ष को दशहरे पर विशेष महत्व दिया गया है। इसकी पूजा करने से शत्रुओं पर विजय, धन-समृद्धि और जीवन की बाधाओं से मुक्ति मिलती है। साथ ही शनि दोष और नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव भी समाप्त होता है।

    विजयादशमी से जुड़ी मान्यता

    हिंदू परंपरा में दशहरा को किसी भी नए कार्य की शुरुआत के लिए श्रेष्ठ दिन माना गया है। इस दिन बच्चे का अक्षरारंभ, नया व्यवसाय शुरू करना, भूमि पूजन या कृषि कार्यों का आरंभ करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि विजयादशमी पर शुरू किया गया हर कार्य सफलता की ओर ले जाता है।


    👉 इस प्रकार वर्ष 2025 का दशहरा श्रवण नक्षत्र और रवि योग जैसे अद्वितीय संयोग के साथ आ रहा है। धार्मिक दृष्टि से यह दिन शक्ति, साहस और सफलता प्रदान करने वाला है।

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