पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में बगावत: 70 साल का गुस्सा सड़कों पर, पाकिस्तान सरकार के खिलाफ भड़का आंदोलन
इस्लामाबाद/मुजफ्फराबाद:
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में हाल के वर्षों का सबसे बड़ा जनआंदोलन देखने को मिल रहा है। हज़ारों लोग भ्रष्टाचार, आर्थिक बदहाली और शोषण के खिलाफ शहबाज़ शरीफ़ सरकार के विरुद्ध सड़कों पर उतर आए हैं। लंबे समय से दबे हुए गुस्से ने अब उग्र रूप ले लिया है और हालात इस कदर बिगड़ गए हैं कि पाकिस्तान सरकार को भारी संख्या में सुरक्षा बलों को तैनात करना पड़ा है।
70 साल की उपेक्षा और शोषण का नतीजा
1947 के बाद से पाकिस्तान ने कश्मीर के उस हिस्से को कब्ज़े में ले रखा है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर कहा जाता है। सात दशकों से अधिक समय से यहां के लोगों को न तो विकास मिला, न ही बुनियादी सुविधाएँ। बेरोज़गारी, बिजली संकट, महंगाई, और राजनीतिक उपेक्षा ने आम नागरिकों के जीवन को त्रस्त कर दिया है।
स्थानीय लोग कहते हैं कि पाकिस्तान सरकार सिर्फ अपने फायदे के लिए पीओके का इस्तेमाल करती रही है और यहाँ की जनता को लगातार हाशिए पर धकेला गया है।
आंदोलन की अगुवाई कर रही एएसी
इस जनआंदोलन की कमान “आज़ाद जम्मू कश्मीर संयुक्त कार्य परिषद” (AAC) ने संभाली है। यह संगठन आम नागरिकों को लामबंद कर रहा है और पाकिस्तान सरकार के समक्ष 38 सूत्रीय मांगों का चार्टर रख चुका है।
इनमें प्रमुख माँगें हैं:
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पाकिस्तान में रह रहे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए पीओके विधानसभा में आरक्षित 12 सीटों को खत्म करना, जिसे स्थानीय लोग प्रतिनिधिक शासन के साथ अन्याय मानते हैं।
- रियायती दर पर आटा और सस्ती बिजली उपलब्ध कराना।
- लंबे समय से अटके सुधारों को लागू करना।
- अभिजात वर्ग और नेताओं को मिले विशेषाधिकार खत्म करना।
सरकार के साथ वार्ता विफल
हाल ही में पाकिस्तान सरकार, पीओके प्रशासन और एएसी के बीच चली लंबी वार्ता नाकाम हो गई। एएसी ने साफ कह दिया कि वह अपने मुख्य मुद्दों पर कोई समझौता नहीं करेगा। इसके बाद विरोध और तेज हो गया।
सुरक्षा बलों का भारी जमावड़ा
स्थिति को काबू करने के लिए पाकिस्तान सरकार ने पंजाब से हज़ारों सैनिकों के काफिले भेजे हैं। इसके अलावा इस्लामाबाद से 1,000 अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की तैनाती भी की गई है। राजधानी मुजफ्फराबाद सहित कई शहरों में प्रवेश और निकास द्वारों को सील कर दिया गया है। साथ ही अन्य इलाकों में भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।
आंदोलन का अगला चरण 15 अक्टूबर से
एएसी ने ऐलान किया है कि विरोध प्रदर्शनों का अगला और बड़ा चरण 15 अक्टूबर से शुरू होगा। इससे पहले भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों और कस्बों में विरोध प्रदर्शन हुए, जिनमें हज़ारों लोग शामिल हुए। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि पाकिस्तान सरकार ने मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो हालात और विस्फोटक हो सकते हैं।
भारत की प्रतिक्रिया और व्यापक परिप्रेक्ष्य
भारत लगातार यह कहता रहा है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) उसका अभिन्न अंग है। हाल ही में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी कहा था कि “एक दिन पीओके खुद कहेगा – मैं भारत हूँ।” मौजूदा हालात ने इस बयान को और प्रासंगिक बना दिया है, क्योंकि पीओके की जनता पाकिस्तान के खिलाफ खुलकर आवाज़ बुलंद कर रही है।

