मध्यप्रदेश राजनीति : डिप्टी सीएम से मंत्रियों तक… नेताओं की बयानबाजी से बीजेपी की किरकिरी!
भोपाल।
मध्यप्रदेश की राजनीति इन दिनों नेताओं की जुबान से निकले विवादित बयानों की वजह से लगातार सुर्खियों में है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बड़े नेता हों या मंत्री, बार-बार दिए गए बेतुके और आपत्तिजनक बयान पार्टी की छवि पर दाग छोड़ रहे हैं। ताज़ा मामला नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का है, जिन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के रिश्ते पर टिप्पणी कर नया सियासी तूफ़ान खड़ा कर दिया।
कैलाश विजयवर्गीय का विवादित बयान – भाई-बहन पर उठाए सवाल
शाजापुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान विजयवर्गीय ने कहा कि “नेता प्रतिपक्ष चौराहे पर अपनी जवान बहन को चुंबन कर लेते हैं, यह विदेशी संस्कृति है।”
इस बयान के बाद कांग्रेस आगबबूला हो गई। पार्टी ने इसे महिलाओं का अपमान और भाई-बहन जैसे पवित्र रिश्ते का अपमान बताया। कांग्रेस नेताओं ने नवरात्रि के पावन अवसर पर ऐसे बयान को बेहद शर्मनाक करार दिया और प्रदेशभर में विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिए।
कांग्रेस का जोरदार हमला
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विभा पटेल (महिला कांग्रेस अध्यक्ष): यह बयान नारी सम्मान और भाई-बहन के रिश्ते को कलंकित करने वाला है।
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प्रवीण सक्सेना (भोपाल जिला कांग्रेस अध्यक्ष): विजयवर्गीय की जुबान का हमने गंगाजल से शुद्धिकरण किया।
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जीतू पटवारी (पीसीसी चीफ): मंत्री मानसिक संतुलन खो चुके हैं, उन्हें तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।
भोपाल में हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच झूमाझटकी तक की नौबत आ गई। कई जिलों में कांग्रेस महिला कार्यकर्ताओं ने भी सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला।
विजयवर्गीय की सफाई और समर्थन
बढ़ते विवाद के बीच कैलाश विजयवर्गीय ने सफाई दी – “मैंने किसी भी रिश्ते की पवित्रता पर सवाल नहीं उठाया। मैंने सिर्फ भारतीय और विदेशी संस्कृति की तुलना की थी।”
उन्होंने कहा कि भाई-बहन और पिता-बेटी का रिश्ता पवित्र है और उनका बयान तोड़-मरोड़कर पेश किया गया।
लेकिन मामला यहीं शांत नहीं हुआ। प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विजय शाह उनके समर्थन में उतर आए और कहा – “भारतीय संस्कृति में इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। कैलाश जी ने सही कहा है।” हालांकि शाह का यह बयान आग में घी डालने जैसा साबित हुआ।
बीजेपी के पुराने बयानवीर – जिन्होंने पार्टी की छवि धूमिल की
कैलाश विजयवर्गीय का विवाद कोई पहला मामला नहीं है। बीते कुछ वर्षों में भाजपा नेताओं ने ऐसे कई बयान दिए, जिन्होंने पार्टी को राजनीतिक मुश्किलों में डाल दिया।
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जगदीश देवड़ा (डिप्टी सीएम): ऑपरेशन सिंदूर पर बयान देते हुए कहा था कि पूरा देश और सेना प्रधानमंत्री के चरणों में नतमस्तक है। विपक्ष ने इसे सेना के राजनीतिकरण का आरोप लगाकर बड़ा मुद्दा बना दिया।

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विजय शाह (कैबिनेट मंत्री): सेना की महिला अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की। मामला इतना बढ़ा कि हाईकोर्ट के आदेश पर FIR तक दर्ज हुई।

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फग्गन सिंह कुलस्ते (पूर्व मंत्री): एक कार्यक्रम में पाकिस्तान के आतंकवादियों को “हमारे आतंकवादी” कह बैठे। विपक्ष ने इसे देशद्रोह जैसा मुद्दा बनाकर भाजपा को कठघरे में खड़ा किया।
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उज्जैन भाजपा नगर अध्यक्ष: एक वायरल वीडियो में “कांग्रेस का सत्यानाश” कहते-कहते “धर्म का नाश” बोल गए। कार्यकर्ताओं ने रोकने की कोशिश की लेकिन वीडियो वायरल होकर विपक्ष के हाथ हथियार बन गया।
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प्रीतम लोधी (विधायक):
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खराब सड़कों की तुलना अभिनेता ओम पुरी से और अच्छी सड़कों की तुलना अभिनेत्री श्रीदेवी से कर दी।
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ब्राह्मण समाज पर भी विवादित टिप्पणी कर बैठे, जिसके बाद उन्हें 6 साल के लिए निष्कासित किया गया। हालांकि चुनावी समीकरण साधने के लिए कुछ महीनों बाद उनकी वापसी हो गई।
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निष्कर्ष – भाजपा की बढ़ती मुश्किलें
डिप्टी सीएम से लेकर मंत्री और विधायक तक, भाजपा नेताओं की जुबान अक्सर पार्टी को असहज स्थिति में डाल रही है। हर विवादित बयान कांग्रेस को हमले का नया मौका दे देता है और भाजपा को बार-बार सफाई देनी पड़ती है।
कैलाश विजयवर्गीय का हालिया बयान इस सिलसिले की अगली कड़ी बन गया है, जिसने न केवल मध्यप्रदेश बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी भाजपा की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

