इंदौर नगर निगम में छोटे कर्मचारियों की मनमानी – आम जनता परेशान
इंदौर: नगर निगम के छोटे स्तर के अधिकारी और फील्ड कर्मचारी रोजमर्रा के कामों में जनता से सीधे जुड़े होने के बावजूद अक्सर रिश्वतखोरी और मनमानी करते हैं।
हाल ही की घटनाएँ
- 24 सितम्बर 2025: सफाई दरोगा गोपाल पटोना ₹10,000 रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया।
- इसी कार्रवाई में सुपरवाइजर भरत मुराड़िया भी गिरफ्तार।
- खाद्य विभाग से जुड़े मामलों में अधिकारी धमेंद्र शर्मा ₹15,000 रिश्वत लेते पकड़े गए (नवंबर 2021)।
- अन्य दरोगा ₹3,000 रिश्वत लेते गिरफ्तार।

स्रोतों के अनुसार, आम जनता को प्रतिदिन 5–6 ऐसी खबरें सुनने को मिलती हैं। कभी किसी ने ₹1,000 तो कभी ₹10,000 की रिश्वत दी, लेकिन यह चक्र लगातार जारी है।
आम जनता क्यों परेशान है?
- नगर निगम के छोटे कर्मचारी प्रत्यक्ष रूप से काम में बाधा डालते हैं, लाइसेंस, राशन, दुकानों से जुड़ी मंजूरी आदि में।
- जनता बार-बार शिकायत करने के बावजूद फील्ड स्तर पर जवाबदेही कम है।
- कर (टैक्स) देने के बाद भी आम लोग रिश्वत देने के लिए मजबूर हैं।

सवाल उठता है
- वरिष्ठ अधिकारी कब तक नजर रखेंगे और जवाबदेही सुनिश्चित करेंगे?
- कब तक छोटे कर्मचारी जनता को परेशान करते रहेंगे?
- क्या इनकी मनमानी और रिश्वतखोरी कभी खत्म होगी?
विशेषज्ञ और जनभागीदारी संगठन का सुझाव
- लोकायुक्त कार्रवाई तेज और निरंतर हो: बार-बार कार्रवाई की आवश्यकता।
- ऑनलाइन और पारदर्शी प्रक्रिया: फाइल और अनुमति काम बिना मानवीय संपर्क के।
- जनता शिकायत पोर्टल और हेल्पलाइन: शिकायत पर त्वरित कार्रवाई और जवाबदेही।
- वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी: छोटे कर्मचारियों पर वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी आवश्यक।
निष्कर्ष
छोटे कर्मचारियों द्वारा रिश्वत और मनमानी आम समस्या बन चुकी है। आम जनता की परेशानी तभी कम होगी जब सरकार पारदर्शी, डिजिटल और जवाबदेह बनी रहे और लोकायुक्त जैसी संस्थाएं सक्रिय भूमिका निभाएं।
मुख्य तथ्य सारणी
| घटना | अधिकारी/कर्मचारी | रिश्वत राशि | तारीख | कार्रवाई |
|---|---|---|---|---|
| सफाई दरोगा गिरफ्तार | गोपाल पटोना | ₹10,000 | 24 सितम्बर 2025 | रंगे हाथों गिरफ्तार |
| सुपरवाइजर गिरफ्तार | भरत मुराड़िया | — | 24 सितम्बर 2025 | गिरफ्तार |
| खाद्य विभाग अधिकारी | धमेंद्र शर्मा | ₹15,000 | नवंबर 2021 | रंगे हाथ पकड़ा गया |
