ट्रंप ने फिर लगाया टैरिफ बम, दवाइयों से लेकर ट्रकों तक पर बढ़ेगा आयात शुल्क
वॉशिंगटन।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से दुनिया को चौंकाते हुए नए टैरिफ (आयात शुल्क) का ऐलान कर दिया है। 25–26 सितंबर 2025 की देर रात घोषित इस फैसले के अनुसार, 1 अक्टूबर से अमेरिका में आने वाली कई आयातित वस्तुओं पर भारी शुल्क लगाया जाएगा। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह कदम “राष्ट्रीय सुरक्षा” और घरेलू उद्योग को प्रोत्साहन देने के लिए उठाया गया है।
किन-किन वस्तुओं पर बढ़ेगा टैरिफ?
नई घोषणा के मुताबिक विभिन्न वस्तुओं पर अलग-अलग दरों से शुल्क लगाया जाएगा –
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दवाइयाँ (ब्रांडेड / पेटेंट वाली दवाएँ): 100% टैरिफ
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रसोई कैबिनेट और बाथरूम वैनिटी: 50% टैरिफ
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सोफा, कुर्सी जैसे अपहोल्स्टर्ड फर्नीचर: 30% टैरिफ
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भारी ट्रक: 25% टैरिफ

हालांकि, दवा कंपनियों के लिए एक शर्त रखी गई है – यदि कोई फार्मा कंपनी अमेरिका के भीतर अपना नया उत्पादन संयंत्र (प्लांट) बनाने का काम शुरू कर चुकी है, तो उसकी दवाइयों पर यह 100% टैरिफ लागू नहीं होगा।
ट्रंप का तर्क
राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे राष्ट्रीय हित का मामला बताते हुए कहा कि अमेरिका को विदेशी आयात पर निर्भरता घटानी होगी। उनके मुताबिक, “ये टैरिफ घरेलू उत्पादन बढ़ाने, रोजगार सृजित करने और हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आवश्यक हैं।”
पृष्ठभूमि – सेक्शन 232 जांच
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह फैसला फरवरी–मार्च में शुरू की गई Section 232 Trade Expansion Act 1962 की जांच से जुड़ा है। इस जांच में यह आकलन किया गया था कि दवाइयों और भारी वाहनों का आयात अमेरिका की सुरक्षा और औद्योगिक क्षमता को किस हद तक प्रभावित करता है।
संभावित असर
🔹 दवाइयाँ महंगी होंगी: दोगुने टैरिफ का सीधा असर दवा कंपनियों और उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। बीमा खर्च और स्वास्थ्य सेवाओं की लागत भी बढ़ सकती है।
🔹 महंगाई पर दबाव: कैबिनेट, फर्नीचर और ट्रकों पर शुल्क बढ़ने से रोज़मर्रा के उपभोक्ता सामान और परिवहन महंगे होंगे। इससे महंगाई (inflation) पर नया दबाव पड़ेगा।
🔹 वैश्विक व्यापार तनाव: इस कदम से अमेरिका के व्यापारिक साझेदार देशों के साथ विवाद गहरा सकता है। संभव है कि प्रभावित देश भी जवाबी टैरिफ लगाएँ।
🔹 घरेलू उद्योग को बढ़ावा: ट्रंप का दावा है कि यह कदम अमेरिकी फैक्ट्रियों और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए नई ऊर्जा लेकर आएगा। कंपनियों को उत्पादन अमेरिका में शिफ्ट करने की मजबूरी होगी।
🔹 आर्थिक अनिश्चितता: अचानक बदले नियम निवेशकों और बाजारों के लिए चिंता का विषय बन सकते हैं। एशियाई शेयर बाजारों में इस घोषणा के बाद गिरावट भी दर्ज की गई।
निष्कर्ष
ट्रंप का यह फैसला दर्शाता है कि वे 2025 में भी टैरिफ को हथियार बनाकर वैश्विक व्यापार समीकरणों को बदलना चाहते हैं। हालांकि, इस कदम से अमेरिकी उद्योग को कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन दवाइयों की कीमतों, वैश्विक व्यापार तनाव और उपभोक्ताओं की जेब पर इसका भारी असर देखने को मिलेगा। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि क्या यह नीति अमेरिका की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी या फिर महंगाई और व्यापार विवाद की नई लहर पैदा करेगी।

