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“महापौर जी, पहले गड्ढों का इलाज करें – जनता की आवाज़: नो गड्ढा डे चाहिए, सुरक्षित सड़क पहले, नो कार डे बाद में!”

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Published On: 21 September 2025
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इंदौर में जनता की मांग: महापौर जी, पहले ‘नो गड्ढा डे’ की तैयारी कीजिए, ‘नो कार डे’ बाद में भी मनाया जा सकता है

इंदौर। हर साल बारिश के मौसम में शहर की सड़कों पर गड्ढों का संकट बढ़ जाता है। लेकिन अनंत चतुर्दशी, नवरात्रि और दीपावली जैसे पर्वों के दौरान शहरवासियों को यह समस्या और भी परेशान करती है। इस साल भी अनंत चतुर्दशी और नवरात्रि आ चुकी हैं, लेकिन शहर की सड़कों पर गड्ढों की भरमार बनी हुई है।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव इस समय शहर में ‘नो कार डे’ मनाने की तैयारियों में जुटे हैं, जिसका मकसद शहर में वाहनों की संख्या कम करके प्रदूषण और ट्रैफिक को नियंत्रित करना है। लेकिन जनता का कहना है कि एक दिन कारें न चलें, उससे समस्या का समाधान नहीं होगा, जबकि गड्ढों से हर रोज़ लोगों को चोटें लग रही हैं।
शहरवासियों का सवाल है कि अगर महापौर जी उतनी ही गंभीरता गड्ढों को भरने में दिखाते जितनी नो कार डे के आयोजन में लग रही है, तो शहर और उसकी जनता की भलाई कहीं ज्यादा हो जाती।

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सीमेंट की सड़कों पर भी गड्ढों का जाल
पहले शहर में केवल डामर की सड़कों पर गड्ढे बनते थे, लेकिन अब नई बनी सीमेंट की सड़कों पर भी गड्ढों की भरमार है। अक्सर पाइपलाइन डालने या अन्य कामों के लिए सड़क खोदी जाती है, और महीनों तक वह जगह बिना सुधार के खुली रहती है। इससे लोग दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं।
गड्ढों में ही हो रही गरबे की प्रैक्टिस
सोशल मीडिया पर लोग मज़ाक में कह रहे हैं कि अब गरबा प्रैक्टिस गड्ढों में ही हो जाती है। गड्ढों की वजह से दोपहिया वाहन चालकों को संतुलन और संभलकर चलने की प्रैक्टिस मिल रही है। कुछ लोगों ने महापौर को “गड्ढा मित्र” तक कह दिया है।
नो कार डे और जनता की मांग
महापौर जी ने शहर में नो कार डे मनाने की घोषणा की है, लेकिन जनता का कहना है कि इससे पहले एक दिन ‘नो गड्ढा डे’ मनाना ज्यादा जरूरी है। यानी पूरे शहर की सड़कों से गड्ढों को भरवाना और सुनिश्चित करना कि शहरवासियों को सुरक्षित सफर मिले। नो कार डे जैसी पहल महत्त्वपूर्ण है, लेकिन जब तक बुनियादी समस्याएं हल नहीं होतीं, तब तक इनका असर सीमित ही रहेगा।
ट्रैफिक सुधार की कोशिशें और आलोचना
पिछले प्रयास जैसे ट्रैफिक मित्र योजना, वन-वे सिस्टम और नो ई-रिक्शा जोन भी फेल रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि जनता ने महापौर को वोट देकर मित्र समझा, लेकिन शहर की मूल समस्याओं में सुधार क्यों नहीं हो पा रहा।
जनता की अपील:
“महापौर जी, पहले ‘नो गड्ढा डे’ मनाइए, जिससे हर नागरिक सुरक्षित रहे। उसके बाद नो कार डे मनाना आसान और प्रभावशाली होगा।”
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