भारत-ओमान के बीच जल्द होगा CEPA व्यापार समझौता, वार्ता पूरी: ओमान के राजदूत का बयान
नई दिल्ली: भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (Comprehensive Economic Partnership Agreement – CEPA) जल्द ही हस्ताक्षरित होने वाला है। यह जानकारी ओमान के भारत में राजदूत ईसा सालेह अब्दुल्ला सालेह अलशिबानी ने एक साक्षात्कार में दी। उन्होंने बताया कि समझौते को लेकर सभी वार्ताएं पूरी हो चुकी हैं और अब केवल कानूनी तथा प्रशासनिक प्रक्रियाएं शेष हैं।
राजदूत ने कहा, “हमें उम्मीद है कि बहुत जल्द इस समझौते पर हस्ताक्षर हो जाएंगे।”
CEPA का उद्देश्य और महत्व
CEPA का मुख्य उद्देश्य भारत और ओमान के बीच व्यापार और निवेश के अवसरों को व्यापक रूप से बढ़ाना है। इसके प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
- व्यापार का विस्तार – पारंपरिक ऊर्जा क्षेत्र से आगे बढ़कर नए उत्पाद और सेवाओं तक व्यापार को विस्तारित करना।
- कस्टम ड्यूटी में कटौती – अधिकतम उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी को कम या खत्म किया जाएगा, जिससे आयात-निर्यात बढ़ सके।
- सेवा क्षेत्र में आसानी – सेवा क्षेत्र में व्यापार को सरल और अधिक सुविधाजनक बनाने के उपाय।
- विदेशी निवेश को बढ़ावा – विदेशी निवेश (FDI) को आकर्षित करने के लिए नियमों और प्रक्रियाओं को सरल बनाना।

CEPA वार्ता का इतिहास
भारत और ओमान के बीच CEPA पर बातचीत नवंबर 2023 में शुरू हुई थी। तब से दोनों देशों ने विभिन्न विवादास्पद मुद्दों और नियमों पर विस्तृत चर्चा की। राजदूत के अनुसार, यह प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुँच चुकी है और समझौते के हस्ताक्षर का मार्ग तैयार हो चुका है।
समझौते का आर्थिक और रणनीतिक महत्व
- व्यापारिक अवसरों में वृद्धि: भारत की ऊर्जा, कृषि, औद्योगिक उत्पाद और सेवा क्षेत्र में नई संभावनाओं का सृजन।
- ओमान के लिए लाभ: ओमान को भारत के विशाल बाजार तक पहुँच का फायदा।
- आर्थिक सहयोग को मजबूती: दोनों देशों के बीच निवेश और आर्थिक सहयोग को नई दिशा।
- व्यवसाय में सरलता: कस्टम ड्यूटी में कटौती और सेवा क्षेत्र में आसान नियम व्यापार और निवेश दोनों के लिए सकारात्मक।
आगे की प्रक्रिया
अब समझौते की केवल हस्ताक्षर प्रक्रिया और कानूनी औपचारिकताएं बाकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व द्वारा CEPA पर जल्द ही हस्ताक्षर किए जाने की संभावना है।
इस समझौते के लागू होने के बाद भारत और ओमान के बीच व्यापार और निवेश के नए अवसर खुलेंगे, जिससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।
