थांदला जैन समाज ने आयोजित किया अणु दर्शन यात्रा और सामूहिक क्षमा याचना
थांदला, मध्यप्रदेश: जैन धर्म में चातुर्मास और पर्युषण पर्व के अंतिम दिन विशेष धार्मिक अनुष्ठान और क्षमा याचना का महत्व अत्यंत है। इसी भाव के साथ थांदला जैन श्रीसंघ ने हाल ही में अणु दर्शन यात्रा का आयोजन किया, जिसमें गोधरा, लोमड़ी, बांसवाड़ा और कुशलगढ़ में विराजित संत-सतियों के दर्शन कर उनके साथ सामूहिक क्षमा याचना की गई।
सामूहिक क्षमा याचना और गुरु दर्शन
जैन धर्म में संवत्सरीक प्रतिक्रमण के दौरान तीनों लोक की समस्त आत्माओं के लिए क्षमा याचना की जाती है। थांदला से दीक्षित हुए समस्त संतों के आगामी वर्षावास की विन्नति करते हुए, स्थानीय श्रीसंघ के अध्यक्ष प्रदीप गादिया और सचिव हितेश शाह के नेतृत्व में संघ के वरिष्ठ सदस्य जैसे पूर्व अध्यक्ष रमेशचंद्र चौधरी, महेश व्होरा, कोषाध्यक्ष रजनीकांत शाह, संतोष चपलौद, चंद्रकांत घोड़ावत, सुरेशचंद्र चौधरी, भूपेंद्र पावेचा, राजेन्द्र रुनवाल, पवन नाहर, राजेश पोरवाल और नीलेश पावेचा सहित महिला मंडल के वरिष्ठ सदस्यों ने भाग लिया।
संतों और सतियों से सामूहिक वंदना और जिनवाणी श्रवण किया गया। संघ अध्यक्ष प्रदीप गादिया ने विगत वर्षों में हुई तीर्थ अशातना अभक्ति के लिए सभी से क्षमायाचना की, और संघ जनों ने भी आपसी क्षमा का आदान-प्रदान कर भगवान की क्षमा भावों वाली शिक्षा से अपने कर्मों का प्रक्षालन किया।
अणु दर्शन यात्रा का मार्ग और प्रमुख स्थल
अणु दर्शन यात्रा सुबह 6 बजे थांदला से शुरू हुई और रात 9 बजे पुनः थांदला पहुँचकर समाप्त हुई। इस पंच तीर्थ यात्रा में प्रमुख रूप से निम्नलिखित संतों के दर्शन किए गए:
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गोधरा (गुजरात): पूज्य श्री सन्दीपमुनिजी म.सा. आदि ठाणा-4
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लोमड़ी, लिमडी: महासती पूज्या श्री कुसुमलताजी म.सा. आदि ठाणा-4
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बांसवाड़ा: पूज्य श्री शुभेषमुनिजी म.सा. आदि ठाणा-3
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कुशलगढ़: संघ हित चिंतक तत्वज्ञ पूज्य श्री धर्मेन्द्रमुनिजी म.सा. आदि ठाणा-4
यात्रा के दौरान संघ ने नवकारसी से लेकर भोजन तक की सेवाएँ प्रदान की और संघ अध्यक्ष एवं सचिव का विशेष सम्मान किया।
आगामी वर्षावास की विन्नति और संतों का मार्गदर्शन
थांदला संघ ने रतलाम में धमर्दास गण नायक प्रवर्तक देव, पूज्य श्री जिनेंद्रमुनिजी म.सा. एवं पूज्या श्री पुण्यशीलाजी म.सा. के दर्शन कर सामूहिक क्षमायाचना की। इस अवसर पर पूज्य श्री धर्मेन्द्रमुनिजी, पूज्य श्री संदीप मुनिजी, पूज्य श्री प्रशस्तमुनिजी, पूज्य श्री सुयशमुनिजी, पूज्य श्री जिनांशमुनिजी, और पूज्य श्री ललितमुनिजी आदि संतों के आगामी वर्षावास 2026 के लिए विन्नति की गई।
प्रवर्तक देव द्वारा संत-सतियों की कमी और विभिन्न क्षेत्रों की विन्नति को देखते हुए आगामी वर्षावास की योजना बनाई जाती है। इससे संघजन संतों की सेवा और आगामी चातुर्मास में भागीदारी के लिए तैयार रहते हैं।

