उज्जैन-नागदा क्षेत्र में पेयजल व्यवस्था पर सवाल
उज्जैन-नागदा क्षेत्र के नागरिक दूषित जल पीने को मजबूर हैं, जिससे उनकी सेहत पर गंभीर खतरे मंडरा रहे हैं। इस मुद्दे को हाल ही में एक जागरूक पत्रकार द्वारा उजागर किया गया, लेकिन न तो सत्ताधारी दल और न ही विपक्ष ने जनता की ओर से आवाज़ उठाई।
नगर पालिका की लापरवाही
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नगर पालिका द्वारा बिना वैज्ञानिक लैब टेस्ट के पानी उपलब्ध कराना गंभीर लापरवाही है।
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मिनरल वॉटर सप्लाई का वादा करने वाले जनप्रतिनिधियों की चुप्पी जनता के लिए चिंता का विषय है।
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट की मांगें
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तत्काल प्रभाव से पेयजल का वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाए।
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दोषी अधिकारियों और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
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जनता को सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए।
राष्ट्रीय अध्यक्ष का संदेश
राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सुनील सिंह यादव ने कहा:
“नागदा क्षेत्र की जनता को दूषित जल पिलाना किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जल, जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ मौलिक मानव अधिकार है। यदि तत्काल प्रभाव से सुरक्षित पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई, तो हमारा संगठन जनआंदोलन छेड़ने से पीछे नहीं हटेगा।”
ट्रस्ट के सदस्य शिवम तिवारी, कृष्णा यादव, मनीष गुप्ता, मुकेश विश्वकर्मा, जीवनलाल जैन चाय वाले, सुनील सेठिया ने कहा कि यह केवल नागदा का नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की जनता के स्वास्थ्य का सवाल है, और जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह बनाना ही होगा।
रिपोर्ट: संवाददाता जीवन लाल जैन, नागदा
